हिमाचल प्रदेश-मुस्कान से मिलने घर पहुंचे उपायुक्त रितेश चौहान

धर्मशाला, 13 अप्रैलः मुस्कान के चेहरे पर खिली मुस्कुराहट उसकी खुशी बयान कर रही थी… उसके साथ-साथ पूरे परिवार के चेहरे पर रौनक थी, और होती भी क्यों नहीं … आज उनके घर मुस्कान को गोद लेने वाले माता-पिता आये थे।… गोद लेने वाले माता-पिता (कानूनी तौर पर नहीं) यानि उपायुक्त कांगड़ा रितेश चौहान और उनकी धर्मपत्नी देविका चौहान। इस दंपति ने मुस्कान की पढ़ाई-लिखाई और अन्य आवश्यकताओं का खर्च वहन करने का जिम्मा लिया है।
रितेश चौहान और श्रीमती देविका चौहान लगभग 12 बजे धर्मशाला के तंगरोटी-खास में मुस्कान के घर पहुंचे, और करीब डेढ़ घंटा मुस्कान को लाड़-प्यार करते और घरवालों से बातचीत में बिताया। श्रीमती चौहान ने मुस्कान के लिए खास तौर पर लाई मिठाई, फल और अन्य उपहार उसे दिये। इस दौरान उन्होंने बेटी की अन्य जरूरतों के बारे में भी जाना।
हंसी-खुशी के इन पलों में मुस्कान ने साइकिल की चाह जताई तो देविका चौहान ने झट से हामी भरते हुये कहा कि अगली बार आऊंगी तो साईकिल के साथ और खिलौने भी लेती आऊंगी।उन्होंने मुस्कान की पढ़ाई-लिखाई और अन्य रूचियों के बारे में भी पूछा, और उसकी हौंसला अफजाई की।
इस अवसर पर रितेश चौहान ने कहा कि ‘बेटी-बचाओ बेटी -पढ़ाओ’ अभियान के अन्तर्गत जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों का यह विचार था कि व्यक्तिगत प्रयास कर निर्धन परिवारों की बेटियों की पढ़ाई-लिखाई एवं अन्य आवश्यकताओं का खर्च अपने वेतन से वहन किया जाये, ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जाये और बड़ी संख्या में लोग इस मुहिम से जुडं़े। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले में शिशु लिगांनुपात की दर में सुधार लाने और बेटा-बेटी के बीच भेदभाव की मानसिकता बदलने के लिए सभी के सम्मन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
इस दौरान बीडीओ धर्मशाला धर्मेश, स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान अर्पणा देवी भी उपस्थित रहीं।
‘‘डॉक्टर बनना चाहती हैं मुस्कान’’
मुस्कान से जब पूछा गया कि वह बड़ी होकर क्या बनना चाहती है, उसने तपाक से जवाब दिया ‘डाक्टर’। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी मुस्कान 12 वर्ष की है और अभी एएफसीबी उच्च विद्यालय, योल में सातवीं में पढ़ती है। करीब चार साल की रही होगी जब सिर से पिता का साया उठ गया था। बड़ा भाई अक्षय इसी स्कूल में दसवीं और दूसरा भाई अंशुल नौवीं में पढ़ता है। मां निर्जला देवी मेहनत मजदूरी करके बच्चों का पढ़ाई-लिखाई और घर का खर्च चलाती हैं। निर्जला देवी इस प्रोत्साहन के लिए उपायुक्त और उनकी धर्मपत्नी का आभार जताते हुए कहती हैं कि इस पहल से उनकी बेटी तो प्रेरित होगी ही अन्य अभिभावकों और बच्चियों का हौंसला भी बढ़ेगा।
गौरतलब है कि उपायुक्त रितेश चौहान की अगुवाई में जिलाभर के विभिन्न अधिकारियों ने ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत व्यक्तिगत उदाहरण प्रस्तुत कर समाज को प्रेरित करने की अनूठी एवं प्रेरणास्पद पहल की है। उपायुक्त सहित जिला के सभी एसडीएम, बीडीओ तथा डीआरडीए के परियोजना अधिकारी ने गत 30 मार्च को बीडीओ कार्यालय धर्मशाला में आयोजित एक समारोह में अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के निर्धन परिवारों की बेटियों की पढ़ाई-लिखाई एवं अन्य आवश्यकताओं की देखभाल का खर्च वहन करने का जिम्मा ग्रहण किया था। उक्त सभी अधिकारियों ने स्वेच्छा से अगले एक वर्ष की अवधि तक निर्धन परिवारों की एक-एक बेटी का सारा खर्च अपने वेतन से वहन करने का प्रण लिया है। अधिकारियों की निर्धन परिवारों की बच्चियों की देखभाल का खर्च वहन करने की पहल समाज को व्यक्तिगत उदाहरण प्रस्तुत कर प्रेरित करने का प्रयास है, ताकि अन्य लोग भी स्वेच्छा से इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सामने आएं।

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