अनुज कटोच,ब्यूरो हिमाचल-कांगड़ा जिला के विकास खंड भवारना के भटू समूला के लगभग दस परिवार पीढ़ियों से बांस का सामान बनाने का काम करते आ रहे थे, लेकिन बीते कुछ वर्षों में सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के अभाव में ये परिवार अपने पुश्तैनी काम से दूर होते जा रहे थे। गांव के एक सज्जन ने उन्हें एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम के तहत् आर्थिकी सुधारने के लिए मिलने वाली सहायता के बारे में बताया। इन परिवारों की महिलाओं ने इस जानकारी का लाभ उठाने और अपने पुश्तैनी काम को आगे बढ़ाते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की ठानी।

आशा, श्रेष्ठा, सीनू, बबली सहित इन परिवारों की दस महिलाओं ने मिलकर लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह के नाम से एक स्वयं सहायता समूह बनाया।एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम के तहत् समूह को आरंभ में 25 हजार रूपये सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई। समूह के सदस्यों ने बांस का सामान बनाने का अपना काम फिर से शुरू किया और देखते ही देखते उनके दिन बदलने लगे।

समूह की सदस्य श्रेष्ठा देवी बताती हैं कि कार्यक्रम से जुड़ने के उपरांत पंचायत में पौधारोपण के जो कार्य किये गये, उनमें पौधों की बाड़ के लिए ‘किरनू’ (बाड़ा) बनाने का काम उन्हें मिला, जिससे समूह का काम भी बढ़ा और आय भी। समूह की एक अन्य सदस्य सीनू का कहना है कि बांस की टोकरियां, चंगेरटी, छड़ोलू इत्यादि की गांवों में खूब मांग रहती है और उनका समूह यह सब सामान उपलब्ध करवा कर अच्छी खासी आमदनी प्राप्त कर रहा है। समूह की एक अन्य सदस्य आशा देवी बताती हैं कि उनके समूह की हर महीने लगभग 10 से 12 हजार रूपये की आमदनी हो रही है, जिससे समूह से जुड़े हर सदस्य को खर्च लायक धन भी मिल रहा है और हौंसला भी बढ़ रहा है। जिला स्तरीय सामुदायिक संयोजक सजंय परमार बताते हैं कि योजनाओं के समायोजन के अन्तर्गत इस समूह को उद्योग विभाग के साथ भी जोड़ा गया है तथा समूह के सदस्यों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्हें आर्थिक मदद भी दी जायेगी। इसी तरह कार्यक्रम के अन्तर्गत गठित अन्य समूहों को नाबार्ड के साथ जोड़ कर प्रशिक्षित किया जा रहा है। एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम के उपनिदेशक मनीष कुमार बताते हैं कि गत तीन वर्षों के दौरान कार्यक्रम के तहत जिले में 621 स्वयं सहायता समूह बने हैं, जिनमें से 494 स्वयं सहायता समूहों को लगभग एक करोड़ 24 लाख रूपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई है।वे बताते हैं कि यह राशि प्रति समूह 25 हजार रूपये के रिवॉल्विंग फंड के रूप में 18 महीनों के लिए प्रदान की जाती है। उनका कहना है कि अन्य स्वयं सहायता समूहों को भी शीघ्र ही सहायता राशि उपलब्ध करवाई जायेगी।विकास खंड भवारना के खंड विकास अधिकारी कमल देव जानकारी देते हुये बताते हैं कि उनके ब्लॉक में जलागम प्रबंधन कार्यक्रम का कार्यान्वयन 24 ग्राम पंचायतों में किया जा रहा है। जलागम क्षेत्र में अधिकतर लोग लघु व सीमांत किसान हैं। कार्यक्रम के माध्यम से जनसमुदाय को जागरूक किया जा रहा है। जनसमुदाय की भागीदारी से बाबड़ी, स्पर, बायारक्रट, चैकडैम, कुहलों आदि का निर्माण करवाया जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रगतिशील किसानों व पंचायत सदस्यों को जागरूक करने के लिए पंचायत स्तर व खंड स्तर पर प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करवाया गया है।

क्या कहते हैं जिलाधीश

जिलाधीश कांगड़ा रितेश चौहान का कहना है कि जिले में महिला कल्याण गतिविधियों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है तथा महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अनेक कदम उठाये गये है। महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से महिलाओं सहित सभी लोगों को स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

 

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