(शैलेश कुमार पाण्डेय )marriage-profit-and-loss1374498185-marriage-08

-बिहार के  समस्तीपुर जिले में शुरू हुई ये अनोखी परंपरा

– डांस की जगह पर्यावरण पर गोष्ठी करते दिखे बाराती

समस्तीपुर : अभी तक आपने शादी के मौके पर संस्कृति कार्यक्रम का आयोजन या नागिन डांस देखे होगे लेकिन एक नई परम्परा का शुरुआत बिहार के समस्तीपुर जिले में पर्यावरण बचाओ की थीम पर एक अनोखे शादी समारोह का आयोजन किया गया. आम शादियों की तरह इस शादी में भी सब कुछ था लेकिन अंतर था तो बस शादी को एंज्वाय करने के तरीके में. मंगल गीत, गाजे-बाजे और डीजे की धुन, नाच-मस्ती के दृश्य से हट कर इस समारोह में सबकुछ पर्यावरण के अनुरुप था. समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड के रामचंद्रपुर दशहरा गांव में हुई इस शादी में बाराती से ले कर साराती तक पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने का संदेश देते दिखे. विदाई के समय वर-वधू ने पौधरोपण किया तो नाच-गाने की जगह शामियाने में ‘बेटी बचाओ-वृक्ष लगाओ’ विषय पर विचार गोष्ठी हुई. शादी समारोह में विवाह के लिए तैयार किया गया मंडप भी हरियाली का संदेश दे रहा था. मंडप को पूरी तरह से पेड़ की हरी डालियों से तैयार किया गया था, जिसे लोगों ने खूब सराहा. बारात में आये बारातियों और लोगों को भी प्लेट की बजाय पत्तल में भोजन और कुल्हड़ में पानी परोसा गया. यह शादी रामचंद्रपुर दशहरा गांव के कृष्ण कुमार राय के यहां हुई. उनकी पुत्री सोनी की शादी सीमान बसढ़िया निवासी त्रिपित राय के पुत्र दिलीप राय से हुई. सादगी के साथ आयोजित इस विवाहोत्सव में हर काम पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय किए गए थे. बारातियों का स्वागत अभिनंदन पत्र के साथ-साथ फलदार वृक्ष का एक-एक पौधा भेंट कर किया गया बारातियों और अतिथियों को खाना परोसने के लिए कुल्हड़ के ग्लास और पत्तों की व्यवस्था की गयी थी. दरवाजा लगने में जहां मांगलिक गीत सुनने को मिले वहीं इसके बाद परंपरागत ढंग से बारातियों का स्वागत किया गया. शादी के बाद सुबह विदाई के वक्त वर-वधू ने घर के पास पौधरोपण भी किया. पर्यावरण बचाओ अभियान में लगे सुजीत भगत की पहल पर यह अनोखा विवाह समारोह किया गया. सुजीत के मुताबिक वर्ष 2013 में इस गांव में उन्होनें अपनी बहन पूनम कुमारी की शादी समारोह में पौधरोपण का कार्य कराया था और सभी बारातियों को भेंट स्वरूप पौधा प्रदान किया था.

 

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