शैलेश कुमार पाण्डेय

सासाराम :  बिहार में शराब बंदी पर तरह तरह के चर्चाओं का बाजार गर्म है , एक तरफ शराब के चलते अपने पति से प्रताडित महिलाओ को बेहद खुशी मिली तो एक तरफ ज्यादा शराब का सेवन करनेवालों को रात में नीद नही आ रहे जसके लिए नशेड़ी और दूसरे नशे का उपयोग कर रहे है . लेकिन शराब बंदी से तो ज्यादा लोगो को खुशी ही मिली है इसका सबसे बड़ा उदाहरण यहा देखने को मिला कि वर्षों से टूटे हुए रिश्ते अब जूट गए है, सासाराम के मोहद्दीगंज में शराबबंदी का असर ऐसा हुआ की 16 साल पुर्व अलग हुए पति पत्नी भी एक हो गये. दुल्हे-दुल्हन की लिवाज में बुजुर्ग दम्पति पुनर्विवाह कर रहे हैं. मोहद्दीगंज के जयगोविंद सिंह का उम्र 58 साल हैं. पहले वे छक कर शराब पीते थे. शराब के कारण ही 16 साल पुर्व उनकी पत्नी ने उनका साथ छोड़ कर अपनी बेटी को लेकर अपने मां-बाप के घर चली गयी थी.लेकिन जबसे सरकार ने शराबबंदी की घोषणा कर दी उसके बाद जय गोबिंद भी शराब से तौबा कर लिया. जय गोबिंद में हुए बदलाव का पता उनकी पत्नी विजयंता को मिली. मात्र एक साल की उम्र में अपनी मम्मी के साथ गयी बेटी गुड्डी भी अब बड़ी हो गयी उसने भी पहल किया और शराब के कारण अलग हुए अपनी मम्मी-पापा को फिर से एक करा दिया.शराब ने जिसको पत्नी से अलग कर दिया था. अब वो परिवार के साथ हो गया है. पत्नी विजयंति कहती हैं कि उनमें आया बदलाव उन्हें उनके पास खींच लाया. वही राम गोबिंद कहते हैं कि अब शराब को जीवन भर हाथ नहीं लगायेंगे.

बेटी गुड्डी कहती हैं कि वो दुनिया के सबसे अजूबा बेटी है जो अपने ही माता-पिता के शादी की कार्ड बाँट रही हैं. कार्ड पर आकांक्षी में बेटी का ही नाम हैं. बेटी कहती हैं कि उसने अपने हाथों से पूरे गांव में कार्ड बाँटा हैं. इस प्रकार शराबबंदी और बेटी की प्रयास से 16 साल पुराना बिछड़ा दम्पति एक हो गये. इस पुनर्विवाह समारोह में पूरे गांव के लोगों ने भोज खाया, गाजा बाजा भी बजा. इस प्रकार शराब ने जिस परिवार को बर्बाद कर दिया था. शराबबंदी के बाद वो आबाद हो रहा हैं. इस अजूबे पुनर्विवाह ने समाज में मिसाल पेश किया है. वही पूरे इलाके में ये चर्चा का विषय बन गया हैं.340MARRIAGE-7-1__1865252173 (1)

 

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