(शैलेश कुमार पाण्डेय )

-दाने – दाने के लिए मजबूर है आगलगी से पीड़ित परिवार

– पीड़ित  परिवारों के आसू पोछने तक नही पहुचे कोइ नेता

– कैसे होगी बिटिया कि शादी , आगलगी ने तबाह कर दी पुरे परिवार कि जिंदगी

– परिजनों का है रो – रो कर बुरा हाल

– आखिर कैसे चलेगी इन बेसहारो कि जिंदगी ?

गोपालगंज / हथुआ : हथुआ प्रखंड के अटवा महदेवा गाव में पिछले गुरुवार के दिन भीसड़ आग लगी में आधे दर्जन  घर जल कर राख हो गये थे , इस आगलगी ने आधे दर्जन परिवार के लोगो कि जिंदगी को तबाह कर दी , ग्रामीणों के घंटो प्रयास के किसी तरह से आग पर काबू पाया था , आग बुझ जाने के बाद फायर बिग्रेड कि गाड़ी पहुच पाई थी , इस आगलगी में आधे दर्जनों परिवारों  के भोजन के साथ कपड़ें और लाखो रूपये के नगद सहित समान जल कर राख हो गये थे ,  घटना के तुरंत बाद हथुआ के अंचल पधाधिकारी धर्मनाथ बैठा ने पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया था और उन्होंने शीघ्र में पीड़ितों को सरकारी सहयता उपलब्ध कराने कि बात कही थी , लेकिन आगलगी के घटना के चार दिन बाद भी अभी तक इन पीड़ित परिवार वालो को कोइ सरकारी सहयता नही मिल पाई , स्थानीय विधायक के प्रति भी लोगो कि जबरजस्त नाराजगी है , लोगो का कहना है कि कोइ जनप्रतिनिधि इस दुःख कि घड़ी में उनका हाल चाल लेने तक नही पहुच पाया , पीड़ित परिवार घुरल महतो के माने तो उनका कहना है कि स्थानीय विधायक जी से हमलोगों को कुछ उमीद थी कि कही विधायक जी इस संकट कि घड़ी में हम पीड़ितों को कोइ सरकारी सहयता दिलाकर इस संकट कि घड़ी से उबारने का काम करेगे , लेकिन उन्होंने तो अभी तक हाल चाल पूछना भी मुनासिब नही समझा , अब इस दुःख कि घड़ी में भगवान ही हमलोगों के मालिक है , इस परिवार कि हालत देख लोगो के आखो से असू निकल जा रहे है  , आगलगी ने पीड़ित परिवारों में चाद्रिका महतो , मुन्दिरका महतो , घुरल महतो , बिरेन्द्र महतो , सुगन महतो , बशिष्ठ महतो , गंगा महतो , उड़न महतो से उनकी पूरी मेहनत कि पूरी कमाई को छीन लिया है , गेहू , कपड़ा इंदिरा आवास के पैसा के साथ बेटी के शादी के लिए रखे गहने और कपड़े सहित सारे समानो को जलाकर राख कर दिया है ,

इन पीड़ितों में चन्द्रिका महतो कि बेटी के शादी तय थी इस आगलगी कि तबाही ने उनके सारे सपने चकनाचूर कर दिए है , आखिर कैसे अब होगी बिटिया कि शादी यह कहकर बार – बार अचेत हो जा रही है चन्द्रिका महतो कि पत्नी , सभी पीड़ित परिवारों को  इस तबाही से रो- रोकर बुरा हाल है,  ये सभी परिवार खाने के  लिए दाने – दाने के मुहताज है , पहनने के कपड़े . सोने के लिए खाट और बिछावन तक नही है , ये परिवार पेड़ के निचे जमीन पर भूखे पेट सोकर अपनी जिंदगी किसी तरह से जीने के लिए मजबूर है , पंचायत चुनाव के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इन परिवारों के मदत नही कर पा रहे है ,

गरीब पीड़ित परिवार कहते है कि काश इस जिले के डीएम साहब इस दुःख कि घड़ी में हम परिवारों को कोइ सहयता दिलवाते , इस परिवारों के पास जिला मुख्यालय में जाकर जिलाधिकारी के पास जाने भर कि किराये के पैसे तक नही है ताकि ये परिवार जाकर जिलाधिकारी महोदय के दरबार में सहयता के गुहार लगा सके . पड़ोस के रहने वाले लोगो के यहाँ से कुछ खाने पिने का ब्यवस्था हो जा रहा है जिससे ये परिवार किसी तरह अपनी जिंदगी जी रहे है , काश कोइ भगवान का दूत इन बेसहरा परिवारों को सहारा देता कि उनका संकट दूर होता , आखिर कैसे चलेगी इन बेसहारो कि जिंदगी यह सवाल आज हमारे समाज के जनप्रतिनिधियों से लेकर नेताओ तक है .DSCN3115

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