कांगड़ा जिला में कृषि विकास गतिविधियों को दिया जा रहा प्रोत्साहनः  रितेश चौहान 
धर्मशाला, 23 अप्रैल – उपायुक्त कांगड़ा रितेश चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दे रही है तथा पोलीहाऊस लगाकर बेमौसमी तथा नकदी फसलों की खेती में प्रदेश ने  देशभर में नाम अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला में कृषि विकास, फसल विविधीकरण, संरक्षित खेती एवं जैविक खेती आदि गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वे आज यहां कृषि विभाग कांगड़ा की गत सवा तीन वर्षों की गतिविधियों एवं उपलब्धियों को सांझा करने के लिए आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में बोल रहे थे।
  चौहान ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2014-15 में आरम्भ की गई डा0 वाईएस परमार स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत किसानों की आर्थिक उत्थान के लिए 85 प्रतिशत की दर से उपदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में इस योजना के अन्तर्गत जिले में  139 किसानों को लाभ पहुंचाया गया है, जिस पर 172.10 लाख रूपये व्यय किये गये हैं। इसी तरह वर्ष 2015-16 में 127 किसानों को इस योजना के तहत लाभ प्रदान किया गया है, जिस पर 365.13 लाख रूपये व्यय किये गये हैं।
उपायुक्त ने कहा कि जिला में कृषि में वृद्धि के लिए राष्ट्रीय सत्त कृषि मिशन के अन्तर्गत एकीकृत कृषि, जल उपयोग दक्षता, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन इत्यादि गतिविधियों पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के तहत वर्ष 2015-16 में जिला में 524 लाख रूपये की धनराशि व्यय की गई है।
  उन्होेंने कहा कि जिले में मृदा स्वाथ्य परीक्षण कार्यक्रम का सफल कार्यान्वयन किया जा रहा है तथा किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर निशुल्क जांच के उपरान्त उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिये जा रहे हैं। अप्रैल, 2015 से अभी तक जिले में मिट्टी के 18066 नमूनों की जांच की गई है।
    चौहान ने कहा कि जिले में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को उपदानयुक्त दरों पर कंेचुआ खाद इकाई स्थापित करने सहित अन्य सम्बन्धित गतिविधियों के लिए वित्तिय सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में 2800 कम्पोस्ट पिट एवं टेट्रा बेड बनाने के लिए 140 लाख रूपये की वित्तिय सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त 150 हैक्टेयर भूमि पर जैविक खेती को बढ़ावा देने एवं प्रोत्साहन के लिए 30 लाख रूपये की धनराशि व्यय की गई है।
  उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की फसलों को बन्दरों, आवारा पशुओं तथा जंगली जानवरों से बचाने के लिए ‘मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत किसानों को अपने खेतों में बाड़ लगाने के लिए 60 प्रतिशत की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे ग्राम सभाओं में भाग लेकर पंचायत के माध्यम से बीज एवं कृषि उपकरण, खाद एवं अन्य सम्बंधित सामग्री की अपनी मांग कृषि विभाग को भेजें, ताकि उन्हें समय पर समुचित सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।
  इस अवसर पर उपनिदेशक कृषि विभाग डा0 देस राज शर्मा, जिला कृषि अधिकारी अरूण व्यास, विषयवाद विशेषज्ञ राहुल कटोच सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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