बिलासपुर 25 अप्रैलः  किसी भी महिला को सूर्य अस्त के पश्चात व सूर्य उदय से पूर्व गिरफ्तार नही किया जा सकता । यह जानकारी अधिवक्ता किरण लता ने आज मोबाइल विधिक साक्षरता शिविरों के आयोजन के तीसरे दिन रघुनाथपुरा, नौणी, ब्रहम्पुखर तथा नम्होल में दी । उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को गिफ्तार करने व उसकी तलाशी के लिए महिला पुलिस कर्मी का होना अनिर्वाय है । गिरफ्तार महिलाओं की तलाशी केवल महिला ही लेगी । उन्होंने निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में उल्लेख करते हुए बताया कि प्रत्येक नागरिक जिनकी सभी स्तोत्रों से प्रतिवर्ष आय 1 लाख रू. हो निःशुल्क कानूनी सहायता के पात्र हैं । विधिक सेवा अधिनियम 1987 के अनुसार वह व्यक्ति भी मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार रखता है जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, मानसिक रूप से अस्वस्थ या निःशक्त, महिलाएं व बच्चे, औद्योगिक कामगार तथा इसके अलावा कोई भी व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय 1 लाख रू. से कम हो मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार रखता है । उन्होंने पत्नी, बच्चों व माता-पिता के खर्चे व भरण पोषण के अधिकारों का जिर्क करते हुए कहा कि हर वह व्यक्ति जो साधन सम्पन्न है, अपनी पत्नी, बच्चों, वृद्ध व लाचार माता-पिता जो स्वयं अपना खर्चा उठाने में अस्मर्थ हो का भरण-पोषण करना उसका कानूनी दायित्व है ।इसी कड़ी में अधिवक्ता वनिता धीमान ने दहेज निरोधक अधिनियम 1961 का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति दहेज प्रतिरोधक अधिनियम 1961 के तहत दहेेज देता या लेता अथवा लेने-देने में उक्साता है तो ऐसे दोषी व्यक्ति को पांच साल तक के कारावास की सजा न्यूनतम 15000 रू. का जुर्माना या दहेज के मूल्य की बराबर की रकम का जुर्माना भी हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति दहेज की मांग परोक्ष या अपरोक्ष रूप से दुल्हा या दुल्हन के माता-पिता से करे तो ऐसे व्यक्ति के दोषी साबित होने पर कम से कम छः माह व अधिकतम 2 साल की कैद तथा 10 हजार रू. तक का जुर्माना हो सकता है । विवाहित महिलाओं पर अत्याचार एवं कानूनी प्रावधान के बारे में जानकारी देेते हुए बताया कि अगर किसी औरत की मृत्यु जलने, शारीरिक चोट लगने या सन्देहास्पद स्थिति में शादी के सात वर्ष के अन्दर होती है और यह मालूम हो जाए कि मृत्यु से पहले महिला से दहेज की मांग लेकर उसके पति या रिशेदार द्वारा सताया गया हो ऐसी स्थिति में औरत के पति या रिशतेदार को उस महिला की मौत का जिम्मेदार माना जाएगा । कानूनी की धारा 104-बी के तहत ऐसे व्यक्ति को 7 वर्ष का कारावास या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है । इसके अलावा उन्होंने मजदूरों के अधिकारों के बारे में भी लोगों को विस्तृत जानकारी दी । इसी प्रकार अधिवक्ता विनोद राणा ने उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम 1986  के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा का अधिकार के तहत ऐसे समाज के क्रय-विक्रय के विरूद्ध संरक्षण पाने का अधिकार है जो जीवन और सम्पति के लिए हानिकारक होता है । उन्होंने बताया कि सूचित किए जाने के अधिकार के तहत उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार व्यवहारों से सरंक्षण प्रदान करने के लिए माल की गुणवत्त, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में सूचित किए जाने का अधिकार है । उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को जहां भी सम्भव हो वहां मुनासीब मुल्यों पर माल की विभिन्न किस्मों को उलब्ध करवाए जाने का अधिकार प्राप्त है । अनुचित व्यापारिक व्यवहार या उपभोक्ताओं को अनुचित शोषण के विरूद्ध क्षतिपूर्ति का भी अधिकार प्राप्त है तथा जानकार उपभोक्ता बने रहने के लिए ज्ञान क्षमता प्राप्त करने का भी अधिकारी है । इसके अलावा उन्होंने लेबर एक्ट के बारे में भी लोगों को जागरूक किया ।

इसी प्रकार गत दिवस विधिक सेवा समिति द्वारा छड़ोल, गम्भरपुल, स्वारघाट, कैंची मोड़, कौलावाला टोबा तथा रोड जामण में भी मोबाईल विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया जिसमें अधिवक्ता राकेश शर्मा ने मुफ्त कानूनी सहायता व घरेलू हिस्सा अधिवक्ता अमित शर्मा ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम व अधिवक्ता मुनीष चन्देल ने माता-पिता, पत्नी व बच्चों के भरण पोषण अधिनियम तथा मोटर वाहन अधिनियम क बारे में लोगों को जागरूक किया ।इस अवसर पर जनरल मनेजर बरोजा एवं तारपीन फैक्टरी रघुनाथपुरा विपन शर्मा, पैरालिगल बोलैटिंयर, नायब नाजिर देवीराम तथा लेबन इन्सपैक्टर बिलासपुर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे ।

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