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हिमाचल प्रदेश:ऐतिहासिक स्मारकों की बहुमूल्य धरोहर के सरंक्षण को प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार 




ऐतिहासिक स्मारकों की बहुमूल्य धरोहर के सरंक्षण को प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार 

     हिमाचल प्रदेश में पुरातात्विक महत्व वाले अनेक ऐतिहासिक स्मारक एवं प्राचीन मन्दिर हैं तथा प्रदेश सरकार इस बहुमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने के लिए प्रयासरत है। पूर्व में मन्दिरों एवं स्मारकों इत्यादि के जीर्णोद्धार एवं मुरम्मत के लिए अधिकतम 50 हजार रूपये तक की धनराशि उपलब्ध करवाई जाती थी। वर्तमान प्रदेश सरकार ने पुराने मन्दिरों एवं पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्मारकों के पुरातन वैभव को बरकरार रखने के लिए इन की मुरम्मत व जीर्णोद्धार के लिए आवश्यकतानुसार धनराशि उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजनों के लिए प्रदेश सरकार सभी जिला मुख्यालयों पर जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है, वहां इन्डोर सभागारों के निर्माण पर बल दे रही है और इस के लिए वर्तमान वित्त वर्ष के लिए 10 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। प्रदेश सरकार ने समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रदर्शन को सुनिश्चित बनाने तथा कलाकारों, शिल्पकारों, साहित्यकारों, शोधार्थियों तथा कवियों को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक योजनाएं आरम्भ की है। 
     वर्तमान प्रदेश सरकार ने जिला कांगड़ा की अनेक ऐतिहासिक धरोहरों एवं मन्दिरों तथा भवनों की मुरम्मत एवं जीर्णोद्धार हेतु पिछले वर्षों में भाषा एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से लाखों रूपये की धनराशि उपलब्ध करवाई है। जिला भाषा अधिकारी कार्यालय कांगड़ा के माध्यम से वर्ष 2013-14 मंे भराड़ी देवी मन्दिर सरांह की मुरम्मत हेतु 5 लाख 50 हजार रूपये की धनराशि व्यय की गई। इसके अतिरिक्त, बाबा काठक मन्दिर सकडी बैजनाथ के लिए 19 लाख 65 हजार रूपये खर्च किए गए। वर्ष 2013-14 के दौरान लक्ष्मी नारायण मन्दिर सरशावा पालमपुर की मुरम्मत हेतु 25 हजार व हौरी देवी बाबा सिद्ध चानों मन्दिर फतेहपुर की मुरम्मत हेतु 15 हजार रूपये की धनराशि खर्च की गई। कांगड़ा कला संग्राहलय की मुरम्मत के लिए वर्ष 2015-16 में 5 लाख 21 हजार सात सौ रूपये और संस्कृति भवन चेल्लियां की मुरम्मत के लिए 2 लाख 16 हजार आठ सौ रूपये की धनराशि प्रदान की गई है। 
     सरकार बहुमूल्य पुरातन पाण्डुलिपियों, छायाचित्रों, पेंटिग्ज, ऐतिहासिक दस्तावेजों तथा अन्य पुरातात्विक एवं अभिलेखीय वृति की महत्वपूर्ण वस्तुओं के संग्रहण एवं संरक्षण पर विशेष बल दे रही है। पुरातन कला एवं संस्कृति के पुनरूत्थान एवं पुनःस्थापन तथा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने राज्य में ललित कला महाविद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। हिमाचली विद्यार्थियों को प्रदेश से बाहर निष्पादन कला, ललित कला इत्यादि के उच्च अध्ययन संस्थानों में प्रवेश पर छात्रवृतियां भी प्रदान की जा रही हैं। प्रदेश सरकार के प्रभावी प्रयासों से हिमाचल की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का जहां समुचित संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित बनाया जा रहा है, वहीं वैश्विक फलक पर इसकी पहचान को और नये आयाम दिए जा रहे हैं।  

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