(शैलेश कुमार पाण्डेय )

  • कला बिल्ला लगाकर पत्रकारों ने किया अपना विरोध प्रगट .
  • पत्रकारों के सुरक्षा के बिना लोकतंत्र खतरे में .
  • राजदेव रंजन के हत्या के बाद भय के वतावरण में है अन्य पत्रकार .
गोपालगंज : नेशनल प्रेस मेंस यूनियन के पत्रकारों की बैठक गोपालगंज जिला इकाई के द्वारा हुई जिसकी अध्यक्षता यूनियन से सचिव संजय कुमार अभय ने की , बैठक में सर्वसमिति से पत्रकारों के सुरक्षा को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार से

पत्रकार सुरक्षा कानून लागु करने की मांग की गयी , साथ ही सिवान जिले के हिंदुस्तान के जिला ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या पर गहरा शोक प्रगट किया गया , उपस्थित पत्रकारों ने एक स्वर में राजदेव रंजन के हत्यारों को गिरफ्तारी

कर अभिलम्ब कठोर सजा दिलाने की मांग की ,और उनके परिवार को सरकार से एक करोड़ की मुवावजा दिलाने की मांग की बैठक को सम्बोधित करते हुए संजय कुमार अभय ने कहा की सरकार अगर पत्रकारों की सुरक्षा उपलब्ध नही कराती है तो आये दिन पत्रकारों पर हमले होते रहेगे और हमारे कलम के सिपाही भय के कारण सच्चाई लिखने में असमर्थ हो जाएगे , जिससे भारतीय लोकतंत्र में खतरे की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी , उपस्थित सभी पत्रकारों ने कला बिला लगाकर अपना विरोध प्रगट किया , मौके पर प्रभात खबर के जिला ब्यूरो चीफ अवधेश कुमार राजन , संजय कुमार अभय , सुनामी मिडिया के प्रमंडल ब्यूरो चीफ शैलेश कुमार पाण्डेय , जिला ब्यूरो चीफ मानवेन्द्र कुमार मिश्र , जन टीवी के जिला ब्यूरो चीफ शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव , अशोक कुमार मिश्र , प्रशांत पाठक , सतेन्द्र कुमार सिंह , बूढ़ेश्वेर कुमार शुक्ला , आशुतोष तिवारी , सुनील कुमार , अनिल यादव , चन्द्रहाश शर्मा , गोविन्द कुमार , के अलावे दर्जनों पत्रकार उपस्थित थे

बैठक में पत्रकारों के विभिन्न मागों पर बिस्तृत चर्चा की गयी .

 

1-    “पत्रकार सुरक्षा कानून” अविलम्ब लागू हो।

 

2-    पत्रकार/मीडियाकर्मी पर कवरेज के दौरान हमले को विषेश कानून के तहत दर्ज किया जाए।

 

3-     पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज करने से रोकने को सरकारी काम में बाधा की तरह देखा जाए।

 

4-      पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामलों की पहले स्पेशल सेल के तहत जांच की जाए, मामले की पुष्टि होने पर ही केस दर्ज किया जाए।

 

5-      पत्रकार/मीडियाकर्मी पर दर्ज हुए मामले की जांच के लिये कम से कम पीसीएस या आईपीएस अधिकारी द्वारा जांच हो।

 

6-      यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी पर झूठा मामला दर्ज किया जाता है और उसकी पुष्टि होती है तो झूठा मुकदमा करने वालों के खिलाफ आजीवन कारावास और अधिकतम जुर्माने का प्रावधान हो।

 

7-      पत्रकार/मीडियाकर्मी की हत्या को रेयरेस्ट क्राइम के अंतर्गत रखा जाए।

 

8-      पत्रकार/मीडियाकर्मी की कवरेज के दौरान दुर्घटना या मृत्यू होने पर नि:शुल्क बीमा प्रदान किया जाए।

 

9-      कवरेज के दौरान घायल हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी का इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

 

10-   यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी के परिजनो पर रंजिशन हमला किया जाता है तो उनका इलाज सरकारी अथवा निजि अस्पताल में नि:शुल्क किया जाए।

 

11-   कवरेज के दौरान अथवा किसी मिशन पर काम करते हुए पत्रकार/मीडियाकर्मी की मृत्यु होने पर उसके परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए।

 

12-   पत्रकार/मीडियाकर्मी को आत्म सुरक्षा हेतु लाइसेंस इश्यू किया जाए।

 

13-   सभी पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज के लिये राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए।

 

14-   प्रशासनिक व विभागीय बैठकों में पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य हो।

 

15-   पत्रकार/मीडियाकर्मी को कवरेज हेतु आवागमन के लिये आधे किराये का प्रावधान हो, तथा रेलवे में यात्रा के लिये शीघ्र आरक्षण का प्रावधान हो।

 

16-   पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये टोल टैक्स में छूट प्रदान की जाए।

 

17-   यदि पत्रकार/मीडियाकर्मी को धमकियां मिले तो उसकी सुनवाई शीघ्र हो तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

 

सामाजिक सुरक्षा हेतु संस्तुतियां

 

1-      राज्य एवं केन्द्र के स्तर पर पत्रकार आर्थिक सुरक्षा निधि  योजना का संचालन हो।

 

2-      10,000 का नि:शुल्क बीमा सुनिश्चित हो।

 

3-      गम्भीर बीमारी की स्थिति में अच्छे अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था हो।

 

4-      पत्रकार/मीडियाकर्मी के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना हो।

 

5-      जिस तरह किसान ऋण योजना है उसी प्रकार पत्रकार/मीडियाकर्मियो हेतु ऋण योजना बैंको द्वारा संचालित हो।

 

6-      पत्रकार/मीडियाकर्मियों हेतु कार्यालय योजना हो जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर कार्यालय उपलब्ध हों।

 

7-      प्रिंटिंग प्रेस लगाने हेतु विषेश पैकेज व्यवस्था हो तथा प्रिंटिंग प्रेस पर आयत शुल्क में रियायत हो।

 

8-      पत्रकार/मीडियाकर्मियों के बच्चों के लिये अच्छे शिक्षण संस्थानों में कोटा हो अथवा उनकी फीस में रियायत हो।

 

9-      पत्रकार/मीडियाकर्मी हेतु आवास योजना हो, जिसमें सस्ते व आसान किश्तों पर आवास उपलब्ध हों।

 

जब तक लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकार/मीडियाकर्मी की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक किस तरह एक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना की जा सकती है और किस तरह भारत विश्व में निष्पक्ष भयहीन और स्वतंत्र मीडिया होने का दम्भ भर सकता है। जल्द से जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए।

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