बिलासपुर, 16 मईः  भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर द्वारा दिनांक 15.05.2016 को प्रातः 11 बजे संस्कृति भवन के साहित्यिक कक्ष में मासिक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें हाल ही में शिक्षा उप निदेशक के पद से संयुक्त निदेशक के पद पर पदोन्नत हुए श्री सुशील पुण्डीर ने बतौर मुख्यअतिथि तथा श्री जीत राम सुमन ने अध्यक्ष के पद के रूप में शिरकत की। सर्व प्रथम मुख्यअतिथि तथा अध्यक्ष सहित अन्य साहित्यकारों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके दीप प्रज्वलित किया गया। इसके उपरान्त दैनिक ट्रिब्यून के पूर्व सम्पादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री विजय सहगल के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर सभी साहित्यकारों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। मचं का संचालन रविन्द्र भटटा द्वारा किया गया। संगोष्ठी का आरम्भ साहित्यकार जीतराम सुमन द्वारा सरस्वती वन्दना से किया गया। पंक्तियां थी : – ‘‘ ऐ मां हम तुम्हारे चरणों में शीश झुकाने आये हैं‘‘। इसके बाद श्री कुलदीप चन्देल द्वारा ‘‘आत्ममुग्धता और साहित्यकार ‘‘ विषय पर पत्र वाचन किया गया। श्रीमती किरण ठाकुर ने ‘‘तेरा नाम न जपया गया ‘‘ सुन्दर भजन सुनाकर खूब तालियां बटोरी । डॉ0 जय नारायण कश्यप की कविता की पंक्तियां थीः- हमी है बैठे जो इस नाव को खेने, हमीं से है उम्मीदें, नाव पार होगी‘‘। कुलदीप चन्देल ने ‘‘ जाने के बाद वह फिर लौट आया, मौसम में खुशनुमा बदलाव आया‘‘ तथा जीत राम सुमन ने ‘‘ रूठ गई बहारें हमसे गांवों में जब से शहर उगने लगे हैं‘‘ सुन्दर रचनाएं प्रस्तुत करके खूब तालियां बटोरी। संतोष कुमारी की ‘‘बेटियां ‘‘शीर्षक कविता की पंक्तियां थी- जिनके है बेटियां वो परियों के देश में रहते हैं। प्रदीप गुप्ता ने ‘‘राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कुछ यूं फरमाया ‘‘इधर भी गधे हैं उधर भी गधे हैं, गधे हंस रहे है इन्सान रो रहे हैं’’। हुसैन अली ने ‘‘ हक से कोई हक की क्या करे फरियाद होती जहां से बरसात वहीं से बिजली गिराई जाती है, तथा कौशल्या ने ‘‘दादे का किरडू ‘‘ एस आर आजाद ने ‘‘ इक चेहरे पर कितने मखौटे लगाये हैं लोग,मुस्कराहटों में कितने राज छुपाये हैं लोग‘‘ कविताएुं सुनाकर खूब वाह-वाही लूटी। इसके अतिरिक्त डॉ0 अनीता शर्मा ने ‘‘ मेरे इर्द-गिर्द रचे गए अनेक षडयंन्त्र और मैं देखती रह गई निशब्द,ईर्ष्या, द्वेष के सब बवन्डर तथा रवि सांख्यान ने सर्व शिक्षा अभियान व पंकज ठाकुर ने कलियुग का पितामह शीर्षक से कविता सुनाकर गोविन्द सागर झील में डूबे प्राचीन रंगनाथ मन्दिर का दर्द बयां किया।श्री नरैणु राम हितैषी ने जूते की चोरी शीर्षक से व्ंयग्य रचना प्रस्तुत की।  रविन्द्र भटटा ‘‘दिव्यांगों ‘‘ के जीवन तथा सुशील पुण्डीर परिंदा ने आभार जिन्दगी तूने मुझे जीना सिखा दिया रचना प्रस्तुत की। इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव राजेश धर्माणी द्वारा भाषा विभाग को लोक गीतों के संरक्षण हेतु जो निर्देश दिए गए हैं उस बारे सभी साहित्यकारों ने विस्तृत विचार विमर्श करते हुए ज़िला भाषा अधिकारी डॉ0 अनीता शर्मा को आश्वासन दिया कि वो हर संभव मदद करेंगे। मुख्यअतिथि व कार्यक्रम के अध्यक्ष के धन्यवाद सहित संगोष्ठी सम्पन्न हुई। इस अवसर पर कार्यालय के परमदेव शर्मा, इन्द्र सिंह चन्देल, कान्ता देवी, भी श्रोताओं के रूप में उपस्थित रहे।

 

 

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