(मो फिरोज आलम )

सीवान : पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में पुलिस तार-से-तार जोड़ कर अपनी तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है. घटना का पूरा सीन स्टेशन रोड स्थित घटनास्थल फल मंडी के नजदीक सरिया दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद होने की बात सामने आ रही थी, जिसको पुलिस ने जांच के लिए एसएफसीएल, पटना भेजा था. वहां की जांच में फुटेज के साथ छेड़छाड़ की बात सामने आयी थी और डिलिट किये गये 70 प्रतिशत फुटेज को रिकवर कर लेने की बात कही जा रही है, लेकिन उसकी क्वालिटी और फाइनल रिपोर्ट के लिए हैदराबाद लैब में भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का पुलिस इंतजार कर रही है.

तार से जोड़े जा रहे तार : पुलिस का दावा है कि उसकी जांच सही दिशा में जा रही है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस हत्याकांड से जुड़े राज सामने आ रहे हैं.

 

पुलिस की तफ्तीश में अब श्रीकांत हत्याकांड और राजदेव हत्याकांड के तार एक दूसरे से काफी हद तक जुड़ते दिख रहे हैं. शुरू से ही दोनों कांडों को अंजाम देने के स्टाइल में समानता होने के कारण पुलिस ने घटना के चंद घंटों बाद ही जीरादेई के भैंसाखाल स्थित चिमनी से उसके मालिक उपेंद्र सिंह सहित चार लोगों को हिरासत में लिया था. उपेंद्र श्रीकांत हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया जाता है और उसके हिरासत में लेने के बाद से ही दोनों कांडों के तार आपस में जुड़े होने की चर्चा आम है.

 

उपेंद्र पर है पुलिस की कड़ी नजर

 

मास्टरमाइंड उपेंद्र द्वारा पुलिस को भटकाने के लिए राजदेव हत्याकांड में बदलते बयान और अलग-अलग लोगों की ओर इशारा करने से भी पुलिस को उस पर शक और गहरा हो गया. इस हत्याकांड में उपेंद्र द्वारा नगर थाने के रामनगर निवासी लडन मियां और पूर्व सांसद मो शहाबुदीन के करीबी मुंशी मियां की ओर इशारा किया गया था. मुंशी मियां से पूछताछ में उसकी भूमिका नजर नहीं आने पर पुलिस ने उसे पीआर बॉड पर छोड़ दिया. वहीं, रामनगर के हिस्ट्रीशीटर लडन मियां की गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है. घटना के बाद से ही अपने परिवार सहित लडन के गायब होने और कुछ ही दिन पूर्व जानलेवा हमले के एक मामले में जेल से बाहर आने के कारण पुलिस का शक उस पर गहरा गया.

 

उपेंद्र व सोनू के अहम खुलासे की चर्चा :

 

पूछताछ के दौरान पुलिस की कड़ाई पर उपेंद्र सिंह के कुछ अहम राज उगलने की चर्चा है, जिससे राजदेव हत्याकांड के खुलासे में पुलिस के आगे बढ़ने की संभावना बढ़ी है. वहीं उपेंद्र के राजदार जीरादेई के नरेंद्रपुर निवासी सोनू सिंह द्वारा भी श्रीकांत हत्याकांड और पत्रकार हत्याकांड में कुछ अहम जानकारियां पुलिस को उपलब्ध कराने की चर्चा हैं. इससे जुड़ी जानकारी के आधार पर दोनों कांडों को एक-दूसरे से जोड़ कर देखा जा रहा है. पुलिस इस मामले में अभी विशेष बताने से बच रही है. उसका कहना है कि जांच सही दिशा में चल रही है. अब शीघ्र ही मामले का उद्भेदन कर दिया जायेगा.

 

सीवान मंडल कारा से 10  मोबाइल बरामद

 

मंडल कारा, सीवान में शुक्रवार की शाम हुई रूटीन जांच के दौरान 10  मोबाइल सेटों को बरामद किया गया है. जेल अधीक्षक विधु कुमार ने बताया कि इस  संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुफस्स्सिल थाने में प्राथमिकी दर्ज  करायी गयी है.

 

बाहर से लाये गये शूटर ने मारी थी गोली!

 

पटना : सीवान के पत्रकार राजदेव हत्याकांड में अब तक हुई जांच में यह बात काफी उभर कर सामने आ रही है कि उन्हें गोली मारनेवाले शूटर यूपी के थे, जबकि इस वारदात को अंजाम देने में हर तरह से सहयोग करनेवाले और गोली मारने के दौरान शूटर के साथ वाला अपराधी स्थानीय ही था. हालांकि, जांच दल ने इन बातों को अभी पूरी तरह से पुष्ट नहीं किया है.

 

इसकी जांच पूरी होने के बाद ही तमाम सच्चाई सामने आयेगी. पुलिस मुख्यालय सूत्रों ने बताया है कि यूपी के एक बाहुबली से इसके तार जुड़े होने और शूटर की गिरफ्तारी के लिए यूपी के एसटीएफ से भी मदद ली जा रही है. पड़ोसी राज्य में इस मामले की पड़ताल वहां के एसटीएफ की मदद से की जा रही है. पत्रकार को गोली मारने वाला भले ही पड़ोसी राज्य से लाया गया हो, लेकिन इस वारदात में हर तरह से मदद करने और शूटर के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठनेवाला अपराधी स्थानीय ही था. अभी किसी शूटर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. पुलिस की प्राथमिकता फिलहाल शूटरों और मुख्य अपराधियों को गिरफ्तार करना है. इसके लिए कई पहलूओं पर जांच की जा रही है.

 

‘कम बैक’ के लिए यूपी से ले रहे थे सहयोग : आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अधिकतर  स्थानीय शूटर पुलिस की गिरफ्त में थे. जो कुछ अपराधी बचे थे, वे फरार थे या इधर-उधर बच कर काम कर रहे थे.  पुलिस सूत्र इस सूचना पर अपनी छानबीन कर रहे हैं कि बाहर के शूटर को गोली मारने की जिम्मेवारी दी गयी थी और स्थानीय शूटर को राजदेव को रोकने और उन्हें बातों में उलझाने का टास्क था.

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