हिमाचल प्रदेश:पशु कल्याण गतिविधियों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल: रितेश चौहान
हिमाचल प्रदेश:पशु कल्याण गतिविधियों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल: रितेश चौहान
धर्मशाला, 31 मई: उपायुक्त कांगड़ा रितेश चौहान ने कहा कि प्रदेश की कृषि प्रधान आर्थिकी में पशुधन का विशेष स्थान है तथा प्रदेश सरकार किसानों के मवेशियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। इसी क्रम में कांगड़ा जिला में दुधारू पशु नस्ल को स्तरोन्नत करने और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर विशेष बल दिया जा रहा है। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए जिले में पशुपालन विभाग की विभिन्न गतिविधियों के लिए लगभग 27.50 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है।
  उपायुक्त आज यहां पशुपालन विभाग कांगड़ा की विगत सवा तीन वर्षों की उपलब्धियों एवं कार्यक्रमों को सांझा करने के लिए आयोजित ‘‘प्रेस से मिलिये’’ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिले में पशुपालकों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए अनेक प्रभावी पग उठाए गए हैं।
लावारिस पशुओं के लिए पशु अभ्यारणय बनाने का प्रस्ताव 
  रितेश चौहान ने कहा कि पशुपालन विभाग ने जिले में लावारिस पशुओं के लिए पशु अभ्यारणय बनाने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा है। उन्होंने कहा कि लावारिस पशुओं के लिए अभ्यारणय बनने से लोगों को तो राहत मिलेगी ही, निरीह पशुओं के कष्ट भी कम होंगे।
पशु चिकित्सा एवं रोगों की रोकथाम एवं उन्मूलन के लिए उठाए जा रहे प्रभावी पग
  उपायुक्त ने कहा कि पशुपालकों को उन्नत पशुपालन एवं पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं विभिन्न रोगों के बारे में लोगों को जागरूक करने पर बल दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों के मवेशियों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विगत तीन वर्षों में विभाग ने 11 लाख 36 हजार से अधिक पशुओं का असंक्रामक रोगों के लिए उपचार किया है। 23 लाख से अधिक पशुओं का मुंह खुर रोग प्रतिरोधक टीकाकरण और 8 लाख से अधिक पशुओं का गलघोटु प्रतिरोधक टीकाकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि भेड़-बकरियों को कृमि नाशक स्नान एवं टीकाकरण सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसके अतिरिक्त, दुधारू पशु नस्ल को स्तरोन्नत करने के लिए लगभग साढ़े 6 लाख गायों एवं भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान करवाया गया है।
पशु चिकित्सा संस्थानों के ढांचागत विकास पर बल
    उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, जिला में पिछले तीन वर्षों में पशु चिकित्सा संस्थानों के ढांचागत विकास पर बल दिया गया है। इस अवधि में सामान्य योजना केन्द्रीय प्रायोजित योजना, अनुसूचित जाति उपयोजना तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत पशु चिकित्सालयों के भवन निर्माण पर 4.56 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई है।
पशुपालकों के लिए विभिन्न योजनाएं
  चौहान ने कहा कि पशुपालन गतिविधियों के अंतर्गत लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के पात्र व्यक्तियों को 200 कुक्कट इकाईयों की स्थापना के लिए प्रति इकाई 18 हजार रूपये की सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत वे लोग लाभान्वित किए जाते हैं जिनकी वार्षिक आय 40 हजार रूपये से कम है। इसके अतिरिक्त, भेड़ पालक स्मृद्धि योजना के अंतर्गत भेड़ पालकों को भेड़-बकरी पालन यूनिट चलाने के लिए बैंकों से सस्ती ब्याज दर पर एक लाख रूपये की राशि के ऋण का प्रावधान है। नेशनल लाईवस्टोक मिशन के अंतर्गत सामान्य श्रेणी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों को चूजों की इकाई लगाने के लिए अनुदान के रूप में 6 लाख 82 हजार 500 रूपये व्यय किए गए हैं।
पशु कल्याण के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रम 
  चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत गाभिन गाय एवं भैंस के रख-रखाव के लिए लगभग साढ़े 81 लाख रूपये व्यय किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत पशुपालकों को क्षेत्र विशेष खनिज मिश्रण के आबंटन पर 6.35 लाख रूपये व्यय किए गए हैं। पशुपालकों को घास काटने की मशीन उपलब्ध करवाने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान राशि दी गई है। एक हजार 60 लोगों को हस्त चलित अथवा विद्युत चलित घास काटने की मशीन उपलब्ध करवाने के लिए 83.55 लाख रूपये अनुदान राशि के रूप में दिए गए हैं।
  पशुपालकों की सुविधा के लिए एसएमएस पोर्टल
  चौहान ने कहा कि विभाग एसएमएस पोर्टल के माध्यम से जिले में पशुपालकों को पशुओं संबंधित विभिन्न जानकारियां उपलब्ध करवा रहा है। इस सेवा के माध्यम से पंजीकृत पशुपालकों को हर सप्ताह एसएमएस भेज कर पशुओं के रख-रखाव, टीकाकरण, पशु आहार और कृत्रिम गर्भाधान इत्यादि की जानकारी दी जा रही है।
  गौ सदनों के निर्माण पर बल 
  उपायुक्त ने कहा कि जिले में गौ सदनों के निर्माण पर बल दिया गया है तथा इस कार्य में पंचायती राज संस्थाओं, मंदिर न्यासों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग सुनिश्चित बनाया जा रहा है। वर्तमान में जिले में सरकारी एवं निजी क्षेत्र में 24 गौ सदन है, जिनमें से 16 गौ सदन पूर्णतयः कार्य कर रहे हैं जबकि अन्य सदनों के निर्माण संबंधी कार्य प्रगति पर है।
  इस अवसर पर पशु पालन विभाग के कार्यकारी उप-निदेशक डॉ. राजेश सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी धर्मशाल डॉ. सुजय शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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