>सहरसा के मरीज की पथरी के इलाज के दौरान धोखे से किडनी निकालने के मामले में नाराज पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के समर्थकों ने आरोपी डाक्टर के क्लीनिक पर तोड़फोड़ की है।>पटना। पथरी के इलाज के दौरान किडनी निकालने के मामले को तूल देते हुए पूर्व सांसद पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी से जुड़े लोगों ने आज यहां चिकित्सक डॉ.प्रमोद कुमार झा उर्फ डा.पीके झा की क्लीनिक पर जमकर हंगामा किया।तोड़फोड़ में क्लीनिक को भारी क्षति पहुंची है। जिस मरीज की किडनी निकाली गई है वह पप्पू यादव के कार्यक्षेत्र सहरसा से है।
जानकारी के अनुसार, सहरसा जिले के बरारी थाना क्षेत्र अंतर्गत कसैरिया गांव निवासी 35 वर्षीय मो. रफीक को काफी दिनों से पेट में दर्द था। गांव के डॉक्टर से परामर्श लिया तो किडनी में पथरी (स्टोन) की शिकायत मिली। ऑपरेशन से स्टोन निकलवाने के लिए वह 20 मई को केबी सर्जिकल अस्पताल में भर्ती हुआ। इसके बाद डॉ. प्रमोद कुमार झा ने उसका ऑपरेशन किया था।</p><p>
ऑपरेशन के बाद भी रफीक के पेट का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था। उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। 26 मई को उसकी तबीयत काफी खराब हो गई। इसके बाद डॉ. झा ने उसे पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल) रेफर कर दिया।</p><p>
परिजनों ने विचार-विमर्श करने के बाद रफीक को राजाबाजार के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां किडनी निकाले जाने की जानकारी हुई। रफीक के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने बिना बताए किडनी निकाल ली तथा दर्द बढऩे के बावजूद उनसे यह बात छुपाई।

>डॉक्टर ने कहा
>इस बाबत डॉ. प्रमोद कुमार झा ने कहा कि मरीज रफीक की किडनी नहीं निकाली जाती तो उसकी जान जा सकती थी। उन्होंने अपने स्तर से कोई गलती नहीं की है। मरीज की किडनी अब भी उनके अस्पताल में है। कोई देखना चाहे तो देख ले।
<p>एसके पुरी थानाध्यक्ष संजय कुमार वर्मा का कहना है कि फोन पर हुई बातचीत में डॉ. प्रमोद कुमार झा ने किडनी निकालने की बात स्वीकार कर ली है। उनका कहना है कि मरीज का जीवन बचाने के लिए किडनी निकालना जरूरी था। उधर, मरीज और उसके परिवारजनों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में ऐसी किसी बीमारी का जिक्र नहीं है, जिसके लिए किडनी निकालना जरूरी था। यदि यह आवश्यक था तो उन्हें बताया क्यों नहीं गया

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