(शैलेश कुमार पाण्डेय )

मथुरा के जवाहर बाग पर कब्जा जमाए उपद्रवियों की हिंसा में शहीद हुए एसपी मुकुल दि्वेदी की मां ने यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि अपने बेटे को वो खो चुकी है. अब मुझे पैसे नहीं चाहिए. सीएम मुझे मेरा बेटा लाकर दे दें. शहीद के परिवार में कोहराम मचा हुआ है.

बता दें कि इस घटना में 23 पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती हैं. वहीं एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार यादव समेत अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है. उपद्रवियों में से 22 लोगों की मौत हो चुकी है. मौक पर पहुंचे डीजीपी जावीद अहमद और गृह सचिव ने जांबाज शहीद अफसरों को कंधा देकर शव यात्रा को रवाना किया. गौरतलब है कि बीते गुरुवार को पुलिस की एक टीम सरकारी जमीन पर से अवैध कब्जा हटाने गई थी. इसी दौरान कथित सत्याग्रहियों ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग, हथगोला और मिर्ची बम फेंका था.

क्या है पूरा मामलाSnapshot-1-03-06-2016-16-00-560x420 sp-mukul_1464935096

मथुरा. यूपी के मथुरा में गुरुवार को सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ ने हमला बोल दिया। फायरिंग के साथ आगजनी भी की। इसमें एक एसपी और एक एसओ की मौत हो गई। वहीं, 23 पुलिसवाले घायल हो गए। पुलिस की जवाबी फायरिंग में 22 उपद्रवियों की भी मौत हो गई। एसपी की मां ने सीएम अखिलेश यादव से कहा है कि हमें पैसा नहीं चाहिए। हमें हमारा बेटा वापस चाहिए। उसे क्या मरने के लिए मथुरा भेजा था? बता दें कि एसपी का फरवरी में ही मथुरा ट्रांसफर हुआ था। कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद है कब्जा…

– शहर के जवाहर बाग की करीब 250 एकड़ जमीन पर अवैध कब्‍जा हटाने पुलिस पहुंची थी। ये जमीन बागवानी विभाग की है।
– लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने 2 दिन पहले बाग पर कब्‍जा किए लोगों को नोटिस देते हुए इसे 24 घंटे के अंदर खाली करने की वॉर्निंग दी थी।
– इसके बाद भी अवैध कब्जा करने वालों ने बाग को खाली नहीं किया।
– गुरुवार को पुलिस जवाहर बाग पहुंची। 2 हजार लोगों के लौट जाने के बाद भी बाग में करीब 3 हजार लोग मौजूद थे।
– पुलिस को देखते ही लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। इससे अफरा-तफरी मच गई। भीड़ ने आगजनी भी की।
– फायरिंग में एडि‍शनल एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव, एसओ प्रदीप कुमार और एसओ संतोष कुमार यादव को गोली लग गई।
– हॉस्‍पिटल ले जाते समय संतोष कुमार यादव की मौत हो गई।
– वहीं, द्विवेदी की आगरा के नयति हॉस्पि‍टल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

कौन थे एसपी मुकुल द्विवेदी?
– फायरिंग के दौरान मारे गए एसपी मुकुल द्विवेदी 1998 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे।
– 2000 में उनका प्रमोशन हुआ और डिप्टी एसपी बनाए गए।
– द्विवेदी के दो बेटे हैं। दोनों बरेली में पढ़ाई करते हैं। इस वक्त गर्मी की छुट्टी होने के कारण दोनों मथुरा में ही हैं।

परिवार ने CM, एडमिनिस्ट्रेशन पर क्यों उठाए सवाल?

– तीन फरवरी को ही द्विवेदी की मथुरा में उनकी पोस्टिंग हुई। यहां वे एडिशनल एसपी बनकर आए थे। बाद में एसपी बने।
– द्विवेदी की मां ने कहा- ”पैसे नहीं चाहिए। मुझे मेरा बेटा चाहिए। मेरे बेटे को मरवाने के लिए मथुरा भेजा था। मुख्यमंत्री मुझे मेरा बेटा ला दें। हम पति-पत्नी बुजुर्ग हैं। मेरेे बेटे के छोटे-छोटे बच्चे हैं।”
– एसपी के पिता मुकुल द्विवेदी ने कहा, ‘हम क्या कर सकते हैं। हमारा बेटा इतना अच्छा था कि जहां कहीं रहा, लोग कहते थे कि बड़े अच्छे संस्कार मिले हैं। हम कहते थे कि संस्कार भगवान ने दिए हैं। हमने उसे नैतिकता सिखाई है। अच्छे काम सिखाए हैं।”
– ”उसके दिमाग में था कि हम कैसे लोगों की मदद करें। उसी मदद करने के चक्कर में बलिदान दे दिया। एएसपी-डीएम ने क्या किया? लोगों ने वहां दो साल से कब्जा कर रखा था। उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की? मरवा दिया हमारे बेटे को।”

– बता दें कि इस हिंसा में मारे गए पुलिसवालों के परिजन के लिए यूपी सरकार ने 20 लाख के मुआवजे का एलान किया है।

DGP बोले- कब्जा हटाने नहीं, रेकी करने गई थी पुलिस

– यूपी के डीजीपी जाविद अहमद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस जवाहर बाग में रेकी करने गई थी। एक्चुअल कार्रवाई 2-3 दिन बाद होनी थी।

– पहले ये कहा जा रहा था कि पुलिस कब्जा हटाने के लिए ही जवाहर बाग पहुंची थी।
– उन्होंने बताया कि उपद्रवियों ने झोपड़ियों में रखे सिलेंडर में आग लगा दी। इससे जो ब्लास्ट हुआ उसमें भी कई उपद्रवी चोटिल हुए।
– शाम तक सभी उपद्रवियों को वहां से हटाया जा चुका था।
– उपद्रवी मथुरा के लोगों को परेशान करते थे। फायरिंग के दौरान जब ये लोग भागने लगे तो उन्हें पकड़ने में लोकल लोगों ने मदद की।
– 22 उपद्रवी जान गंवा चुके हैं। इनमें से 11 आग से झुलस कर मरे हैं। बाकी लाठी डंडों और अन्य चोटों के कारण मारे गए हैं।
– पुलिस के दो जवान एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव शहीद हुए हैं।
– अब तक 47 कट्टे, 6 राइफलें और 178 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। 15 गाड़ियां और 6 बाइक भी बरामद की गई।
– 124 लोगों को गिरफ्तारी बलवा करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मर्डर के आरोप में अरेस्ट किया गया है। इन लोगों के खिलाफ एनएसए लगाने की कार्रवाई भी होगी।
– डीजीपी ने कहा, ”रामवृक्ष यादव, चंदन बोस, विवेक यादव और राकेश संगठन के मुखिया थे। इनमें से जो भी जिंदा है उन्हें हम गिरफ्तार करेंगे। इन लोगों पर एनएसए लगाया जाएगा।”

कौन हैं उपद्रवियों का लीडर?

– उपद्रव में शामिल तीन हजार लोगों का नेता रामवृक्ष यादव है।
– रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य रह चुका है। जय गुरुदेव की विरासत के लिए समर्थन नहीं मिलने पर उसने अलग गुट बना लिया था।
– इसके बाद जवाहर बाग में 270 एकड़ जमीन पर कब्जा कर समानांतर सरकार चलाने लगा था।
– रामवृक्ष के खिलाफ पहले से हत्‍या की कोशिश, जमीन कब्‍जा करने सहित आठ मुकदमे चल रहे हैं।
– फायरिंग के दौरान रामवृक्ष घायल हो गया। उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

कैसे किया 270 एकड़ जमीन पर कब्जा?
– इनकी 9 मांगें हैं, जिसके लिए ये 2 साल पहले एमपी के सागर से दिल्‍ली जाकर सत्‍याग्रह करने वाले थे।
– दिल्‍ली में जगह नहीं मिलने की वजह से इन्‍होंने मथुरा के जवाहर बाग में ही अपना डेरा जमा लिया।
– हालांकि, मथुरा प्रशासन ने इन्‍हें एक दिन के लिए यहां सत्‍याग्रह करने की परमिशन दी थी।
– लेकिन सत्‍याग्रहियों ने एक दिन बीतने के बाद भी यह जगह खाली करने से मना कर दिया।
– इसके बाद प्रशासन ने इन्‍हें कई बाद समझाने और जगह खाली करवाने की कोशिश की, लेकिन ये नहीं माने।
– इस दौरान इन्‍होंने कई बार समझाने गए अधिकारियों के साथ मारपीट भी की।

ये हैं उपद्रवियों की अजीबोगरीब डिमांड

1#खुद को सुभाषचंद्र बोस का अनुयायी कहने वाले ये लोग पेट्रोल और डीजल की कीमत एक रुपए लीटर करने की मांग कर रहे हैं।
2#देश में सोने के सिक्कों का प्रचलन किया जाए।
3#आजाद हिंद फौज के कानून माने जाएं। इसी की सरकार देश में शासन करे।
4#जयगुरुदेव का मृत्यु प्रमाण पत्र दिया जाए।
5#आजाद हिंद बैंक करेंसी से लेन-देन शुरू की जाए।
6#खुद को सत्याग्रही कहने वाले इन उपद्रवियों की मांग है कि जवाहरबाग की 270 एकड़ जमीन ‘सत्‍याग्रहियों’ को सौंप दी जाए।
7# ‘सत्‍याग्रहियों’ के बीच में पुलिस कोई कार्रवाई न करे।
8#देश में अंग्रेजों के समय से चल रहे कानून खत्‍म किए जाएं।
9#पूरे देश में मांसाहार पर बैन लगाया जाए। मांसाहार करने वालों को सजा दी जाए।

10# उपद्रवियों का नारा था, ‘आजाद हिंद बैंक करेंसी से लेन-देन करना होगा, नहीं तो भारत छोड़ना होगा’।

मिनट टु मिनट समझें- गुरुवार को कैसे भड़की हिंसा
– 4:30 PM:एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस ऑफिसर्स की मीटिंग हुई।
– 4:40 PM:पुलिस ने जवाहरबाग के पीछे की बाउंड्री तोड़कर कथित ‘सत्याग्रहियों’ के लिए रास्ता बनाया।
– 5:00 PM:जवाहरबाग की घेराबंदी शुरू हुई।
– 5:11 PM:मथुरा और आगरा के बीच का मार्ग बंद कर दिया गया।
– 5:15 PM:डीएम राजेश कुमार और एसएसपी डॉ. राकेश कुमार फोर्स के साथ जवाहरबाग के मेन गेट से अंदर घुसे।
– 5:25 PM:पेड़ों पर बैठे हथियारबंद कथित सत्याग्रहियों ने पुलिस फोर्स पर जवाहरबाग गेट के अंदर दाखिल होते ही गोलियां चलानी शुरू कर दी।

 

 

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