हिमाचल प्रदेश;बौद्ध दर्शन पर तीन दिवसीय सम्मेलन 10 से 12 जून तक,

दगपो शदडुबलिंग बौद्ध विहार, कायस, कुल्लू द्वारा किया जा रहा है आयोजन राजीव कुल्लू ब्यूरो-

कुल्लू, 4 जून। दगपो शदडुबलिंग बौद्ध विहार, कायस, जिला कुल्लू की ओर से कुल्लू-मनाली घाटी में बौद्ध दर्शन विषय पर तीन दिनों का राष्टÑीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से यह सम्मेलन 10 से 12 जून तक प्रत्येक दिन घाटी में अलग-अलग स्थान पर होगा। 10 जून को प्रात: सम्मेलन का उद्घाटन हिमालय बौद्ध विहार, मनाली में होगा। उस दिन के सभी सत्र विहार के नवनिर्मित सभा भवन में होंगे। 11 जून को यह सम्मेलन डोलमा लाखंग, भुंतर में होगा, जबकि 12 जून का सम्मेलन भादा गोन्पा, कुल्लू में होना है। इसी शाम सम्मेलन का समापन कायस स्थित दगपो शदडुबलिंग बौद्ध विहार में होगा। कायस स्थित बौद्ध विहार के प्रबंधक उज्ञन नोरबू तथा सम्मेलन के संयोजक डॉ़ टशी पलजोर ने कहा कि कुल्लू-मनाली की वादियों में विभिन्न स्थानों पर होने वाले इस सम्मेलन में अधिकाधिक स्थानीय लोग भाग ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में देश के विभिन्न स्थानों से बौद्ध दर्शन और बौद्ध संस्कृति के लगभग 40 विद्वान आमंत्रित हैं। इनमें लेह-लद्दाख से केन्द्रीय बौद्ध विद्या संस्थान के कुलपति गेशे कोंचोक वांग्दी, प्रख्यात विद्वान गेशे कोंचोक नमज्ञाल, उर्ज्ञन दादुल, डॉ. नवांग छेरिंग तथा छवांग दोरजे कुल्लू पधार रहे हैं। सारनाथ से डॉ. बनारसी लाल तथा प्रो. रमेश नेगी, नागपुर से डॉ. विमल कीर्ति, दिल्ली से प्रो. हीरागंग नेगी तथा प्रो. सत्येन्द्र पांडे, जम्मू से प्रो. रामनंदन सिंह, चंडीगढ़ से डॉ. जे. के. शर्मा, शिमला से जोनंग खम्पो, डॉ. तुलसी रमण, श्रवण कुमार तथा प्रभु लाल, किन्नौर से रोशन लाल नेगी तथा फुंचोग शास्त्री, लाहुल से ठिन्ले नमज्ञाल और अमची कर्मा आदि इस सम्मेलन में भाग लेंगे। इनके अतिरिक्त स्पीति से पिनगोन्पा के खम्पो डिमेद तथा काजा के पद्मा नमज्ञाल, कुल्लू-मनाली घाटी के छेरिंग दोरजे, तोबदन, सतीश कुमार लोपा और कर्नल नोरबू आदि के साथ विभन्न विहारों के विद्वान लामा इसमें भाग लेंगे। प्रमुख विद्वान विभिन्न विषयों पर पत्र पढ़ेंगे और उन पर विचार-विमर्श होगा। उल्लेखनीय है कि दगपो शदडुबलिंग बौद्ध विहार की स्थापना महामहिम दगपो रिनपोछे ने की है जो इन दिनों फ्रांस में रह रहे हैं। प्रतिभागी विद्वानों के आवास की व्यवस्था कायस स्थित विहार परिसर में होगी। वहीं से विद्वानों को विभिन्न सम्मेलन स्थलों के लिए ले जाएंगे। इस सम्मेलन में कुल्लू जिलो के बौद्ध समाज की विशेष भागीदारी रहेगी

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