राजेंद्र राणा ने की आपदा प्रबंधों की समीक्षा-
आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से हुई चर्चा-
राजीव कुल्लू ब्यूरो-
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने बुधवार को कुल्लू में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों और इससे जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करके जिले में आपदा से निपटने के लिए किए जा रहे प्रबंधों की समीक्षा की। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सम्मेलन कक्ष में आयोजित इस बैठक में राणा ने अधिकारियों से आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की तथा उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए एक प्रभावी ढांचा विकसित किया जा रहा है। नूरपुर में राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) की कंपनी स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं। जीआईसी की जमीन एनडीआरएफ के नाम हस्तांतरित की जा रही है और इसकी एवज में 6.13 करोड़ की धनराशि की अदायगी भी कर दी गई है। एनडीआरएफ की इस कंपनी में कुल तीन यूनिटें होंगी। प्रत्येक यूनिट में 45-45 प्रशिक्षित अधिकारी व कर्मचारी तैनात होंगे। राणा ने बताया कि कुल्लू में जिला एमरजेंसी आपरेशन सेंटर की स्थापना का कार्य पूरा कर लिया गया है। 24 घंटे कार्य करने वाले इस सेंटर के लिए आठ कर्मचारियों की नियुक्ति को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। शीघ्र ही इनकी नियुक्तियां कर दी जाएंगी। इस सेंटर के टैलीफोन नंबर के अलावा टाॅल फ्री नंबर 1077 पर भी किसी भी तरह की आपदा की तुरंत सूचना दी जा सकती है। राणा ने कहा कि पंचायत व गांव स्तर पर आपदा की त्वरित सूचना के लिए एक मैसेज सेवा भी आरंभ की गई है। इसमें जिले की सभी 204 ग्राम पंचायतों के प्रधानों-उपप्रधानों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को जोड़ा गया है। बैठक में राणा ने विभिन्न उपमंडलों के एसडीएम के अलावा पीडब्ल्यूडी, आईपीएच, स्वास्थ्य व अन्य विभागों के अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक प्रबंध करने और एहतियात बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने उपमंडल स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाने और इन्हें पहली जुलाई से चालू करने को कहा। राणा ने कहा कि कुल्लू जिला पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है लेकिन यहां बरसात के मौसम में प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनी रहती है। इसलिए पर्यटकों को विशेष रूप से आगाह करने के लिए नदी-नालों के किनारे सूचना व चेतावनी बोर्ड अवश्य लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि ग्राम व पंचायत स्तर पर गठित आपदा प्रबंधन कमेटियों में पूर्व सैनिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं की सेवाएं ली जानी चाहिए। इन्हें आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। बच्चों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थानों में माॅक ड्रिल्स भी करवाई जाएंगी। इससे पहले उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष हंसराज चैहान ने राणा का स्वागत किया जिला में किए गए आपदा प्रबंधों की जानकारी दी। एडीएम एवं प्राधिकरण के नोडल अधिकारी विनय सिंह ने भी आपदा प्रबंधों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया।

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