बिलासपुर ।
कानन पेण्डारी जू में दिनांक 24 फरवरी 2016 को हैदराबाद जू से बहुप्रतिक्षित मूषक हिरण 2:2 आया था, जिनमें सफल ब्रिडींग के परिणाम स्वरूप दोनों पेयर में क्रमशः एक मादा एवं एक नर शावक पैदा हुए हैं दोनों शावकों को सुरक्षित पालन किया जा रहा है, इस प्रकार इनकी कुनबा 4 से बढ़कर 6 हो गए हैं। इसके लिए कानन पेण्डारी जू से बार्किंग डियर (कोटरी हिरण) 1:2 एवं एक नग नर घड़ियाल हैदराबाद जू को वन्य प्राणी आदान प्रदान योजना के तहत दिया गया था।
माऊस डियर के आने से केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली से अनुमोदित कानन पेण्डारी जू के नये मास्टर ले आऊट प्लान में प्रावधानित सभी हिरण प्रजाति की पूर्ति हो गया है। नये मास्टर ले आऊट प्लान में 13 प्रकार के हिरण प्रजाति रखे जाने का प्रावधान है जिसमें से 12 कानन में पहले से थे ही तेरहवां एवं अंतिम प्रजाति माऊस डियर के आने से इसकी पूर्ति हो गया है।
कानन में जो 13 प्रकार के हिरण हैं वे हैं (1) चीतल (2) चौसिंगा (3) कोटरी (4) काला हिरण (5) सफेद हिरण (6) चिंकारा (7)गोराल (8)शूकर हिरण (9) नीलगाय (10) सांबर हिरण (11) बारहसिंघा (12) शंघाई या मणीपुरी मृग। हैदराबाद से प्राप्त (13) माऊस डियर।
माऊस डियर भारत में घोषित 10 संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक प्रजाति है जो वन बहुत कम वनक्षेत्रों में कहीं कहीं होने की सूचना है पर दिखता नहीं है। छत्तीसगढ़ में तो नगण्य ही है। यह रात्रिचर प्राणी है जिसके कारण जू में भी दिन में छुपकर बैठा रहता है। ये सिर्फ फल ही खा रहे हैं एवं वह भी रात्रि में खाते हैं दिन मे खाना नहीं खाते जिसके कारण इनक़ो व इनके शावकों की निगरानी के लिए विशेष प्रबंध किया गया है।
केन्द्रिय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा माऊस डियर की सफल ब्रिडींग हेतु फंड भी उपलब्ध कराता है, अब चूंकि माऊस डियर में ब्रिडींग कानन जू में सफल हो चूका है जिसके आधार पर इस प्रजाति की संख्या में वृद्धि हेतु प्रोजेक्ट केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नईदिल्ली को भेजकर फंड लिया जाना सम्भव हो सकेगा।

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