ऋण लेकर संवार रहा दस परिवारों का जीवन

बिलासपुर 18 जुलाई, 2016ः- मानव जीवन के प्रारम्भिक काल से ही चमड़े का प्रयोग भिन्न -2 अवस्थाओं में होता चला आ रहा है। पशुओं की खाल को ओढ़कर अपने शरीर की रक्षा करने वाला आदिकाल का मनुष्य आधुनिक युग में खाल अथवा चमड़े की विभिन्न तरह की वस्तुएं निर्मित करके न केवल उन्हें प्रयोग में ला रहा है अपितु चमड़े को लाखों-करोड़ों लोगों के रोजगार का जरिया भी बना रहा है। 66 वर्षीय लेख राम भाटिया का नाम भी इन्हीं लोगों में शुमार है। बिलासपुर जिला के गांव दगसेच में अत्यंत निर्धन परिवार में पैदा होने वाले ‘लेखू’ को यह नहीं पता था कि वह चर्म शिल्प की बदौलत न केवल एक दिन अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण करेगा वल्कि दस-बारह अन्य परिवारों को भी रोजगार उपलब्ध करवाकर उनका जीवन संवारेगा।

पांच वर्ष की अल्प आयु में जब बच्चे खिलौने के लिए मचलते और लालायित रहते हैं उस अवस्था में ‘रम्बी’ (चमड़ा काटने का औजार) थाम कर अपने पिता स्वर्गीय श्री दुर्गा राम के कार्य में सहायता करने वाले लेख राम ने चमड़ेे के काम को हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा है। यही कारण रहा कि वर्ष 1966 में पंजाब यूनीवर्सिटी से दसवीं और फिर प्रभाकर व स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात भी लेख राम भाटिया ने सरकारी नौकरी के पीछे भागने के बदले चमड़े के जूते बनाने को अधिमान दिया और इस क्षेत्र में नित नया करने की उनकी भावना ने उन्हें न केवल अलग पहचान दी वल्कि युवा पीढ़ी के लिए वे एक प्रेरणा स्त्रोत भी बने।

वर्ष 2005 में लेख राम भाटिया ने राष्ट्रीय राजमार्ग नम्होल के समीप जूते बनाने की अपनी कार्यशाला आरम्भ की जहां प्रदेश के कारीगरों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, दिल्ली , पंजाब तथा हरियाणा के कारीगर भी उनके यहां कार्य कर अपनी आजीविका कमाते रहे।

प्रदेश सरकार की गरीब व पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए चलाई जा रही अम्बेडर लघु ऋण योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति निगम बिलासपुर से ऋण लेकर उन्होंने अपने कार्य को विस्तार दिया। बाबा स्किन कम्पनी जालंधर से चमड़े की आधुनिक वस्तुएं निर्मित करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया ।

आज उनकी वर्कशाप में ”सावर“ वफफ लैदर, सोफटी लैदर, बी0डी0एस0 लैदर और सामान्य चमड़े के महिलाओं, पुरूषों व बच्चों के सुंदर टिकाऊ तथा नवीनतम डिजाईनों के जूते व चप्पलें बनाई जा रही हैं।

आधुनिक युग में बड़ी कंपनियों के ब्रांडेड जूतों की स्पर्धा के बीच लेख राम भाटिया द्वारा निर्मित डबल गोला, डर्बी, पंजाबी, तिल पंजाबी, रिंग पंजाबी व जलसा जूता लोगों की पसंद का मुख्य केन्द्र रहते हैं।

जहां प्रदेश के विभिन्न जिलों में यहां बनाए गए जूतों की अच्छी-खासी मांग है वहीं अन्य राज्यों तथा विदेशी पर्यटकों को भी लेख राम भाटिया द्वारा डिजाईन्ड जूते खूब लुभाते हैं। लेख राम भाटिया को ”कच्चे माल“ के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा के अतिरिक्त आगरा से चमड़ा मंगवाया जाता है। उनका कथन है कि अत्याधिक भाड़े के कारण उन्हें आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ रहा है।

लेख राम के साथ बेटा राजेश व उनके दो भतीजे सुरेश व राकेश भाटिया भी अपने पुस्तैनी व्यवसाय को संभाले हुए हैं। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार अगर इन्हें कम ब्याज दर पर अधिक ऋण उपलब्ध करवाती है तो ये न केवल अत्याधुनिक मशीनरी से इस व्यवसाय को विस्तार व गति दे सकते हैं वल्कि और अधिक लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवा सकते हैं।

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