गोपालगंज : नेपाल में हो रही बारिश से गंडक नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है. गंडक नदी में वाल्मीकि नगर बराज से सोमवार की शाम चार बजे 2.35 लाख क्यूसेक जल डिस्चार्ज होने की सूचना है. नदी में उफान के कारण दियारा के लगभग दो दर्जन गांवों का संपर्क मार्ग भंग हो चुका है. बाढ़ की पानी से पूरी तरह से गांव घिर चुके है. आने-जाने के सभी रास्तों पर पानी की धारा बह रही है. गांव के लोग मुख्य धारा से कटे हुए है. प्रशासन के तरफ से अब तक नाव की व्यवस्था नहीं करायी जा सकी है.
तटबंधों की सुरक्षा के लिये अधिकारी तैनात
उधर, तटबंधों की सुरक्षा के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी पतहरा में कैंप कर रहे है. समाचार लिखे जाने तक नदी के जल स्तर का बढ़ना जारी था. बता दें कि अचानक गंडक नदी में आयी उफान से कुचायकोट प्रखंड के दो दर्जन से अधिक गांव चारों तरफ से पानी से घिर गये हैं. यहां आने-जाने वाले रास्ते पर तीन फुट से अधिक पानी बह रहा है. गांव में लगभग 50 हजार की आबादी गांव के अंदर ही कैद हो गयी है. नाव ही एक मात्र सहारा है जिससे लोग आ जा सकते है. लोग अपने-अपने सामान को सुरक्षित करने में जुट गये है. गांव में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है. हालांकि विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की जरूरत नहीं है.

खाट बना मरीजों का सहारा
कुचायकोट प्रखंड के कालामटिहिनिया गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है. टाड़पर गांव पानी से घिरा हुआ है. सड़क मार्ग से संपर्क टूटा हुआ है. स्थिति यह है कि गांवों में घिरे लोग सब्जी और आवश्यक सामान के लिए भी बाहर नहीं निकल रहे है. बीमार होने की स्थिति में खाट ही एक मात्र सहारा है जिसके सहारे ग्रामीण इलाज के लिये जा पा रहे हैं. नाव नहीं चलने से लोगों में आक्रोश है.
नदी में शुरू हुआ ड्रेजर से सफाई
गंडक नदी की धारा को मोड़ने के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग ने इस बार ड्रेजर मशीन से नदी के धारा के बीच गाद की सफाई शुरू कर दी गयी है. बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष अब्दुल हामिद की माने तो पाइलट चैनल को मुहाना को बढ़ा कर नदी में आये सिल्ट को यह मशीन साफ करेगा. नदी की धारा को पायलट चैनल डायवर्ट करने में सहयोग करेगा. धारा अगर मुड़ती है तो तटबंध पर दबाव कम होगा.

डीएम ने अधिकारियों को किया अलर्ट
गोपालगंज बाढ़ व आपदा की समीक्षा करते हुए डीएम राहुल कुमार ने अधिकारियों को गंडक नदी में आयी उफान को देखते हुए अलर्ट किया है. डीएम ने नाव से लेकर बाढ़ से पूर्व की तैयारियों की समीक्षा की . बाढ़ से विस्थापितों के लिए शिविर लगाने, चूड़ा, गुड़, अनाज की भंडारण, पॉलिथीन आदि की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया.

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