पटना .मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अव्यावहारिक, अप्रासंगिक और नए कानून के विरोधाभाषी कानून खत्म होंगे। वे मंगलवार को विधानसभा में पेश बिहार विधि निरसन (जो आवश्यक अथवा सुसंगत नहीं रह गये हैं) विधेयक, 2016 पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस समय भी कई ऐसे कानून अस्तित्व में हैं, जो आजादी के पहले के हैं और मौजूदा समय में अव्यावहारिक और अप्रासंगिक हो चुके हैं। यही नहीं वे मौजूदा नए कानूनों के विरोधाभाषी भी हैं।
सीएम ने कहा कि इस समय 1870 के एक्ट के तहत चौकीदारों के वेतन आदि के लिए टैक्स लगाने का प्रावधान है। कर वसूली मासिक की जगह त्रैमासिक होनी है। इसी तरह पंचायतों को डीएम द्वारा मनोनीत करने का प्रावधान किया गया है। वर्ष 1990 से चौकीदारों को सरकारी सेवक का दर्जा दे दिया गया है। ऐसे में उनके लिए टैक्स की क्या जरूरत है? ऐसा होता भी नहीं है। फिर भी पुराना एक्ट काम कर रहा है। इसी तरह पंचायत अब निर्वाचित संस्था है। ऐसे में डीएम द्वारा मनोनयन के कानून की क्या प्रासंगिकता रह जाती है?
इसीलिए हम ऐसे पुराने प्रावधान खत्म करेंगे। बिहार लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक की चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि लोकायुक्त के चयन में सरकार की भूमिका नहीं होती। अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद इनके चयन के नए प्रावधान किये गए हैं। मौजूदा संशोधन के बाद लोकायुक्त रिटायर नहीं होंगे। उनके उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक वे पद पर बने रहेंगे। इस समय लोकायुक्त पांच साल या 70 वर्ष की आयु तक के लिए चयनित होते हैं।

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