पटना.राजधानी पटना से 30 km दूर बिहटा में बंदूक के दम पर माफिया बालू की अवैध खुदाई करते हैं। पीला सोना कहे जाने वाले सोन नदी के बालू के लिए माफिया एक दूसरे का खून भी करने से नहीं चूकते। ऐसी ही एक घटना में रविवार को दो गुटों में गैंगवार हो गया और AK 47 व अन्य हथियारों से अपराधी एक दूसरे पर गोलियां बरसाने लगे। मंगलवार को पटना SSP मनु महाराज AK 47 लिए पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की। उनको देखते ही गुंडे भाग खड़े हुए। गैंगवार के बाद भी हो रही थी अवैध खुदाई…
नाव से गंगा पार कर मनु महाराज सोन नदी के इलाके में पहुंचे। यहां गोलीबारी की घटना के बावजूद भारी संख्या में लोग अवैध बालू खनन करते दिखे। SSP के आदेश पर पुलिस ने 4 नाव पर सवार 28 मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही छुपाकर रखे गए 14 पोकलेन मशीन को भी जब्त कर लिया। मनु महाराज ने कहा कि गोलीबारी कांड के बाद पूरे इलाके में छापेमारी शुरू कर दी गई है। जल्द ही खनन विभाग से विचार विमर्श कर आगे की कार्रवाई की जायेगी।

फौजिया और सिपाही दोनों गुट के नेटवर्क को करेंगे ध्वस्त

एसएसपी ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जिस तरह से उन्होंने मनेर दियारा में ऑपरेशन चला कर फौजिया को गिरफ्तार किया था। उसी तरह एक बार फिर ऑपरेशन चला कर फौजिया को गिरफ्तार करेंगे। सिपाही राय गुट को भी ध्वस्त किया जाएगा। गौरतलब है कि रविवार को हुए गैंगवार में प्रमोद नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।

यहां गिरोहों का चलता है राज
सोन नदी के इलाके में शंकर सिंह उर्फ फौजिया (सेना का भगोड़ा) और उमाशंकर सिंह उर्फ सिपाही (मुखिया) का आतंक है। यहां कानून का नहीं, सरगनाओं की हुकूमत है। सरगनाओं के नियम-फरमान के खिलाफ होने पर गोलियों की बौछार होना आम बात है। महुई महाल के सैकड़ों एकड़ में हो रहे अवैध बालू उत्खनन वाले एरिया में जमीन पर कब्जा को लेकर दोनों सरगनाओं के बीच खूनी होड़ मची है।
सरगनाओं के पीछे अमनाबाद और चौरासी गांव के लोग भी आमने-सामने आ गए हैं। लोगों के मुताबिक 1987 के बाढ़ के बाद बदले हालात में टापू जैसा एरिया निकल आया था। उस इलाके में बालू का उत्खनन तो पहले से हो रहा है, लेकिन बालू माफिया की भिड़ंत का नया प्वाइंट अमनाबाद एरिया बन गया है। चार-पांच वर्षों से यहां से बालू की खुदाई हो रही है।

बालू माफिया करते हैं मोटी कमाईmanu-maharaj_1470142551
सड़क मार्ग से बालू लेकर जानेवाली गाड़ियों को चालान कटाना पड़ता है, लेकिन नदी मार्ग से जानेवाली नाव बंदूक की बदौलत चलती हैं। इनको किसी चालान की आवश्यकता नहीं होती। महुई महाल से बालू लादकर नाव से माफिया छपरा में बालू बेचते हैं। सिर्फ उन्हें पोकलेन मशीन से लदाई एवं रंगदारी में बतौर 20 रुपए फीट देना पड़ता है। एक नाव पर 15 से 25 फीट तक बालू लोड होता है। लदाई में 200 रुपए का खर्च होता है। छपरा पहुंचने के बाद 2000 रुपया फीट बालू बेचते हैं। प्रतिदिन 5000 नाव बालू लादकर जाते हैं, जिससे 50 लाख से अधिक कमाते हैं।

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