(शैलेश कुमार पाण्डेय/ मानवेन्द्र मिश्रा )
-कोर्ट के आदेशो को आज भी नही मानता है हथुआ राज परिवार.
– जिले के वरीय अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक है हथुआ राज के चापलूसी में .
– हथुआ थानाध्यक्ष के कार्यशैली भी राज परिवार के साथ है संदेह के घेरे में .
– आजादी के लगभग सतर वर्ष गुजर जाने के बाद भी कायम है हथुआ में राजतंत्र .
– आजादी और लोकतंत्र के तमाम दावों का पोल खोलता हथुआ राज .
– श्मशान कि जमीन को अपना बताकर बेच रहा है हथुआ राज .

हथुआ / गोपालगंज : आपने सुनामी टाईम्स के पिछले दो अंको में पढ़ा था हथुआ राज परिवार के काले करनामे के बारे में , जिसमे मेरा पहला शीर्षक था कि “ हथुआ में आज भी कायम है राजतंत्र “ वही दुसरे अंक में मैंने लिखा था कि “ हथुआ राज परिवार के मनमानी के आगे जिला प्रशासन बना बौना “ लेकिन इसके वावजूद भी आज तक जिले के संबंधित अधिकारियो द्वारा कोइ ठोस करवाई न कर पाना , हथुआ राज परिवार और प्रशासन कि मिलीभगत को दर्शाता है , अधिकारियो के साथ – साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियो का भी इस मामले में कोइ आवाज न उठा पाना , हथुआ राज परिवार और स्थानीय जनप्रतिनिधियो के साथ निजी स्वार्थ और मिलीभगत को दर्शाता है , हलाकि सुनामी टाईम्स के खबर पर हथुआ प्रखंड के पंचायत समिति की बैठक में हथुआ पंचायत के पंचायत समिति के सदस्य रविकान्त द्वारा हथुआ राज कि मनमानी का मामला जोर – शोर से उठाया गया , आपको बता दे कि हथुआ राज परिवार आज भी कोर्ट के किसी भी आदेशो को नही मानता है , हथुआ राज आज भी राजतन्त्र वाला तानाशाही रवैया अपनाकर हथुआ के चहुमुखी विकास में बाधक बना हुआ है जिसका परिणाम है कि हथुआ को आज तक नगर पंचायत का दर्जा नही मिल पाया , जबकि हथुआ नगर पंचायत के सभी मानको को पूरा करता है , सरकारी जमीन पर हथुआ राज जबरन कब्ज़ा जमाकर अपना निजी ब्यवसाय चला रहा है वही प्रशासन सब कुछ जानते हुए मूकदर्शक बना हुआ है , कुछ मिडिया के लोग भी अपने निजी स्वार्थो को लेकर हथुआ राज का भरपूर सहयोग दे रहे है , हथुआ थानाध्यक्ष प्रियव्रत के कार्यशैली भी राज परिवार के साथ है संदेह के घेरे में , अपने सुनामी के प्रिय पाठको को यहाँ स्पष्ट बता दे पिछले दो महीने पहले हथुआ राज के भूमाफियाओ द्वरा( हथुआ के दक्षिण महैचा गाव के खाता न० – 03 ) सरकारी जमीन को निजी बताकर भोले – भाले लोगो से बेचा गया , जब इस पुरे मामले का खुलासा सुनामी मिडिया द्वारा किया तो अंचल पधाधिकारी हथुआ द्वरा कुछ चंद लोगो पर प्राथमिकी दर्ज कर मात्र खानापूर्ति कि गयी , उसके बाद भी उक्त जमीन पर निर्माण कार्य और जमीन बेचने का कार्य आज भी जारी है और अंचल पधाधिकारी हथुआ द्वारा दर्ज प्राथमिकी के वावजूद हथुआ थानाध्यक्ष द्वारा कोइ करवाई न कर पाना संदेह के घेरे में है , स्थानीय लोगो का कहना है कि “आखिर हथुआ थाना प्रभारी कि ऐसी कौन सी मजबूरी है कि वे कोइ भी करवाई करने से कतरा रहे है “. माननीय उच्च न्यालय पटना के C.W.J.C 3217/1992 में निहित निर्देश यह स्पष्ट किया गया है कि( भुहद्बंदी वाद बिहार राज्य बनाम दुर्गेश्वरी शाही एव अन्य कि सुनवाई समहार्ता महोदय गोपालगंज के न्यालय में चल रही है ) किसी भी परिस्थिति में न्यालय में लंबित मुदाममें के दौरान यथा स्थिति रखते हुए स्वरूप परिवर्तन न किया जाय , कोर्ट के निर्देश के अनुसार इसकी सारी जिम्मेवारी स्थानीय प्रशासन को दी गयी है , लेकिन इसका खुलेआम उलंघन हथुआ राज द्वारा स्थानीय प्रशासन कि मिलीभगत से किया गया जा रहा है , जिसका उदहारण हथुआ का पुरानी किला है , जिसका विस्तृत विवरण निम्नलिखित है : – मौजा हथुआ थाना नम्बर 1008 खाता नम्बर 225 (गैर मजरूआ मालिक है ) :
खाता नम्बर खेसरा नम्बर रकबा किस्म
225(गैर मजरूआ मालिक है ) 135 0-7- 5 धुर परती
137 0-17-4 धुर परती
138 2-0-18 धुर यमुना पोखर
134 5-15-11 धुर पुरानी किला
129 3-2- 0 धुर लगभग यमुना पोखर
130 0-1-2 धुर परती
131 0-4-1 धुर रास्ता
132 0-2- 4 धुर रास्ता
133 0-3-15 धुर रास्ता
उपरोक्त सभी भूमि गैर मजरुआ मालिक (बिहार सरकार ) है जिसमे स्थानीय प्रशासन कि मिलीभगत से गोपनीय ढंग से रात में खोदाई कर जमीन से सम्पति निकाली जा रही है , इसके साथ ही पुरानी किले के दक्षिण तरफ खंडहर हुए धापी भवन को आधुनिक ढंग से बनवाकर व्यवसायिक कामो में उपयोग करने कि तैयारी चल रही है , वही पुरानी किले के अंदर मुख्य दरवाजे से लेकर किले के भीतर – भीतर जीर्णोद्धार कर आधुनिक तरीके से संग्रहालय का रूप हथुआ राज द्वारा दिया जा रहा है , जबकि पुरानी किला हथुआ थाने के ठीक सामने ही अवस्थित है .
साथ ही सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि हथुआ माली टोला के बगल में सार्वजिनक असमशान (श्मशान ) जो कि सार्वजनिक जमीन है जिसको हथुआ राज द्वारा अपना बताकर , फर्जी तरीके से अपने दखल में लेकर भोले – भाले लोगो से मनमाने दाम में बेचा जा रहा है , जिसका विवरण इस प्रकार है :-
मौजा हथुआ थाना नम्बर 1008 खाता नम्बर 225 गैरमजरूआ मालिक , खेसरा नम्बर 787 , रकबा 01 बिगहा 4 कट्ठा 15 धुर (असमसान ) जबकि यह जमीन सार्वजिनक है , जिसका हथुआ पैमाईस नक्शे में अस्पष्ट रूप से दर्शाया गया है . फिर भी यहा हथुआ राज द्वारा जमीन लिखने के नाम पर भोले – भाले लोगो को ठगने का कार्य किया जा रहा है .
वही मौजा रतंचक के खाता नम्बर 178 हथुआ राज कचहरी की जमीन भी गैरमजरूआ आम और मालिक है , जिसमे हथुआ राज द्वारा अपना निजी पब्लिक स्कूल (इम्पेरियल पब्लिक स्कूल) और बीएड कालेज (महरानी पूनम शाही बीएड कालेज ) चलाया जा रहा है , वही अवस्थित भारतीय स्टेट बैंक कि हथुआ शाखा से भी हथुआ राज द्वारा आज भी किराया लिया जाता है , इन सारी बातो से स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक अवगत है लेकिन प्रशासन द्वारा इसकी अनदेखी हथुआ राज से प्रशासन कि मिलीभगत को दर्शाता है .
थावे में भी हथुआ राज चला रहा है अपनी मनमानी
– स्थानीय प्रशासन बना मूकदर्शक .
– सरकारी जमीन पर हथुआ राज बना रहा है अपना पांच सितारा होटल .
– थावे दुर्गा मंदिर के जमीन को अपना बताकर बेच रहा है हथुआ राज
एक तरफ जहा बिहार सरकार थावे देवी स्थान को पर्यटन स्थल का दर्जा देने के लिए प्रयासरत है, वही हथुआ राज यहाँ भी अपने काले करतूतों से बाज नही आ रहा है . जिले के पूर्वे पर्यटन मंत्री रामप्रवेश राय ने अपने कार्यकाल के दौरान थावे को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने के लिए सदन में आवाज उठाई थी , उसके बाद जिले के प्रभारी मंत्री शिवचंद्र राम ने गोपालगंज में आगमन के दौरान थावे को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने कि बात कही थी हलाकि इसके लिए बिहार सरकार प्रयासरत है, लेकिन हथुआ राज द्वारा यहाँ भी अपनी मनमानी चलाई जा रही है , थावे दुर्गा मंदिर कि जमीन को हथुआ राज द्वारा अपना बताकर भोले – भाले लोगो को गुमराह कर दुकान देने के नाम पर धन कि उगाही कि जा रही है . यहाँ भी जिस जमीन को हथुआ राज द्वरा अपना बताकर पांच सितारा होटल का निर्माण कराया जा रहा है और दुकान देने के नाम पर लोगो से पैसा लिया जा रहा है वह जमीन सरकारी है , यहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि मौजा थावे के खाता नम्बर -03 के खेसरा नम्बर 13, 14, 15 में प्रखंड कर्यालय , संकुल संसाधन केंद्र , किसान भवन कुछ अंश में अवस्थित है जबकि उसमे का शेष अंश वो खेसरा नम्बर 14/32 को मिलाकर दो मंजिला इमारत बन कर तैयार है , जिसको आगे होटल का स्वरूप दिया जाएगा , इसके अलावे खेसरा नम्बर 17 में पुराना मंदिर का धर्मशाला है जिसको हथुआ राज द्वरा अपना बताकर मरमती का कार्य तेजी से कराया जा रहा है , ये सारा कार्य प्रखंड कर्यालय थावे के ठीक सामने ही हो रहा है और प्रशासन सारी बात जानकर भी अनजान बना हुआ है , आखिर प्रशासन की कौन सी ऐसी मजबूरी है कि हथुआ राज के किसी भी मामले में प्रशासन हाथ डालने से परहेज कर रहा है ? जबकि उच्च न्यालय के आदेश के तहत सिलीग में जो भी मामले है उसपर स्वरूप परिवर्तन नही किया जा सकता है , यहा तो हथुआ राज के मिलीभगत से प्रशासन कोर्ट के आदेशो को भी नही मान रहा है , इन सभी मामलो में हथुआ राज का राजतंत्र खुलेआम दिख रहा है , अगर कोइ मिडिया कर्मी हथुआ राज के किसी भी मामले को लोगो के सामने रखने का प्रयास करता है तो उन्हें लालच देकर उनके आवाजो को दबाने का कार्य किया जाता है , पिछले तिन अंको से सुनामी मिडिया ने अपने मुहीम के तहत हथुआ राज के काले करतूतों को जनता के सामने इस पत्रिका के माध्यम से रखने का काम कर रहा है , अगले अंक में हथुआ राज के काले करतूतों का विस्तृत खुलासा किया जाएगा . जब इस मामले में हमारी टीम थावे के अंचल पदाधिकारी से बात की तो क्या कहा उन्होंने : –
हमे इस बारे हमे कोइ जानकारी नही है , अगर ऐसी कोइ बात है तो निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगनी चाहिए , जब मामला सीलिंग में है तो इस पर कोइ निर्माण कार्य नही हो सकता है , वहा के किसी स्थानीय ब्यक्ति से आप बोलिए कि हथुआ राज द्वारा कराए जा रहे निर्माण पर मेरे पास आवेदन दे , मै उसके आवेदन कि जाँच कर करवाई करुगा .
अंचल पधाधिकारी , थावे , गोपालगंज .

जबकि उच्च न्यालय ने अपने आदेश में स्थानीय सीओं को इसका रिसीवर बहाल किया है , कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि सीलिंग में जिस ममले कि सुनवाई चल रही है उस जमीन पर कोइ भी कार्य या स्वरूप परिवर्तन नही किया जा सकता है , यहाँ तो सिओं साहब को कोइ भी जानकारी ही नही है या सब जानकर खुद अनजान बन रहे है ,

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