imagesआजादी और लोकतंत्र के तमाम दावों का पोल खोलता हथुआ राज
(शैलेश कुमार पाण्डेय /मानवेन्द्र मिश्रा )
– आखिर ये कैसी आजादी ? images
गोपालगंज / हथुआ :- एक तरफ जहा हमारा देश आज आजादी का 70 वाँ वर्षगाठ धूम – धाम से मना रहा है , देश के माननीय प्रधान मंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जहा लालकिला से आज देश कि आजादी पर अपने कई महत्वपूर्ण विचार रखे है , देश के विकास के लिए कई घोषनाए कि, जिसमें सबका साथ सबका विकास और सबको समानता कि अधिकार कि बातो पर अपना पूरा जोर दिए है , वही बिहार में माननीय मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार भी अपने संबोधन में समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने की बात पर जोड़ दिए , उन्होंने अपने सात निश्चयो को पूरा करने कि बात कहि, लेकिन आज आजादी के लगभग सतर वर्ष बित जाने के बाद भी बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ में हथुआ राज का राज तंत्र आज भी कायम है , आजादी और लोकतंत्र के तमाम दावों का खुलेआम पोल खोलता हथुआ राज परिवार का राज तंत्र आज भी कायम है , जिसका नतीजा यह है कि जिले के हाजारो एकड़ सारकारी जमीन पर आज भी हथुआ राज परिवार का कब्जा है , इस सभी सारकारी जमीनों पर हथुआ राज परिवार अपना खेती – बारी और ब्यवसायिक कामो के उपयोग कर रहा है, और इस सभी जमीनों पर सरकार का कही एक इंच भी कब्जा नही है , सारकार और प्रसाशन भी हथुआ राज द्वारा सरकारी जमीनों के अवैध कब्जे को रोकने में असफल दिख रही है , और न कोइ समाजिक कार्यकर्ता इस तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहा है , जो इसके विरोध में अपनी आवाज उठाता है उसे तरह – तरह के हथकंडे अपनाकर हथुआ राज उसके आवाजो को दबा देता है , भारतीय लोकतंत्र के चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मिडिया भी अपने निजी स्वार्थो के लालच में आकर हथुआ राज कि चापलूसी कर रहा है , आपको बता दे कि आजादी मिलने के बाद वर्ष 1952 तक सभी पांच सौ बाईस देशी रियासते सरकार में विलीन हो गयी , लेकिन हथुआ राज एक ऐसा रियासत है जो सरकार में दिखावे के लिए विलीन तो हुआ लेकिन हथुआ राज ने क़ानूनी हथकंडा अपना कर जाल फरेब करके आजतक अपने राज को कायम रखा है , कहने के लिए तो जिले में हजारो एकड़ सरकारी जमीन है , लेकिन एक इंच भी जमीन आज तक अपने कब्जे में नही ले पाई है , ढाई हजार एकड़ जमीन पर अपने करीबी और रिश्तेदारों के नाम फर्जी अंतरण कर अपना कब्जा जमाये रखा गया , हथुआ राज कचहरी जो कि पूर्ण रूप से सरकारी है , उसमे केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा फर्जी रूप से मान्यता लेकर हथुआ राज द्वारा संचालित संस्था “ईमरेयिल पब्लिक स्कूल “ और पूनम शाही बीएड कालेज चलाया जा रहा है , ये दोनों संस्थाए जिस जमीन पर चल रही है , वह जमीन पूर्ण रूप से सरकारी जमीन है , लेकिन इस जमीन पर सरकार अपना हाथ डालने से क्यों परहेज कर रही है , आखिर सरकार और प्रसाशन के पास ऐसी कौन सी मजबूरी है ?
आपको यहाँ बताते चले कि गोपालगंज के पूर्वे जिलाधिकारी कुलदीप नारायण में जब हथुआ राज के काले करतूतों को उजागर करने के लिए अपना कदम बढाया तो सरकार द्वरा उनका तबादला कर दिया गया ,उसके बाद कोइ भी जिलाधिकारी हथुआ राज से जुड़े मुद्दे पर अपना हाथ लगाने से परहेज करते है , आखिर ऐसा क्यों “क्या भारतीय संविधान को हथुआ राज आज भी नही मानता है” या सरकार हथुआ राज के प्रति भारतीय सविधान को लागू नही मानती है यह बात आज भी लोगो के समझ से परे है , आखिर ये कैसी आजादी और कैसा सविधान ?

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