नई दिल्ली/ नवीन कुमार :- पूरे भारत वर्ष की खेल में आन-बान-शान बढ़ाने वाली दो बेटियों साक्षी और सिंधु ने  कमाल कर दिया ,साक्षी ने इस बार रियो ओलंपिक कुश्ती में ब्रांज और पी वी सिंधु ने बैडमिंटन में सिल्वर पदक जीतकर इतिहास बना दिया, सिंधु कम उम्र में भारत को  पदक दिलाने  वाली पहली खिलाडी बन गयी है.इसी के चलते आज 31 अगस्त 2016 को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने रियो ओलंपिक में पदक लाने वाली इन दो महान खिलाडियों को सम्मानित  किया, जिसमें सम्मान  के तौर पर 1 करोड़ रूपये का चेक साक्षी मलिक को ,2 करोड़ रूपये का उपहार के तौर पर  चेक पी वी सिंधु को और  सिंधु के  कोच गोपी चंद को  उपहार के तौर पर  मात्र 5 लाख रूपये क्या ये सीधे तौर पर उस गुरु का अपमान नहीं है? जिसने अपनी मेहनत व लगन से हम सब भारत वासियों को ये कभी न भूलने वाला यादगार इतिहास  दिया. उसके साथ जो हुआ क्या ये निंदनीय नहीं है ?हमारी सरकार व सिस्टम पहले से ही  क्रिकेट को छोड़कर अन्य  सभी खेलो में भेदभाव करती आई है,अन्य खेलो के  खिलाडियों को उस दर्जे पर नहीं आँका जाता जहां खेल क्रिकेट और उसके खिलाडियों  को महत्व दिया  जाता है और अब खिलाडियों के  कोच को भी राजनीति का हिस्सा बना रही है इससे अच्छा है की कोच को मनमुताबिक आँका  न करे उसको  सम्मान दे सम्मान किसी भी व्यक्ति या खेल या अन्य कोई भी संस्थान  के लिए बहुत महत्व रखता है  जिसका वो सही मायने में हकदार है. खिलाडी को फर्श से अर्श पर ले जाने वाला कोच ही होता है उसकी कमियों और खूबियों को पकड़ने वाला एक कोच ही होता है ,ये बात  हमारे राजनेताओ को समझनी ही पड़ेगी अन्यथा  परिणाम और बद्तर साबित हो सकते है.

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