बिलासपुर । कानन पेण्डारी जू में पदस्थ उपवनक्षेत्रपाल श्री विश्वनाथसिंह ठाकुर को उनकी सेवानिवृत्ति के सुअवसर पर उन्हें कानन पेण्डारी के अधिकारीयों एवं कर्मचारियों द्वारा भावभिनी विदाई दी गई। श्री विश्वनाथसिंह ठाकुर जी के द्वारा कानन के वन्यप्राणीयों की संरक्षण एवं सवर्धन के साथ उनकी बेहतर रहवास ब्यवस्था के परिणाम स्वरूप कानन में न केवल वन्यप्राणीयों स्वास्थ्य में सुधार हुआ अपितु इनकी प्रजनन से संख्या में भी उत्साहजनक बृद्धि हुई है। कानन के अधिकांश वन्यजीव श्री ठाकुर के बुलंद आवाज से अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं जिनमें लायन प्रिंस, हिप्पो गजनी, जंगली सूअर राजू , चीतल रानी, टाईगर आकाश एवं टाईग्रेस चेरी व आशा प्रमुख हैं। श्री ठाकुर मई 1977 से वनविभाग अंबिकापुर में लिपिक पद पर कार्यप्रारंभ किए थे बाद में वर्ष 1979 में बैतुल से वनपाल प्रशिक्षणोपरान्त बिलासपुर एवं कोरबा वनमण्डल में अपनी सेवाएं दिए एवं वर्ष 2000 से 31 अगस्त 2016 तक कानन पेण्डारी जू में वन्यजीवों की देखरेख में अपनी 16 वर्ष का समय दिए। कानन में इनके लम्बी व समर्पित सेवा का ही परिणाम है कि यहां आज 66 प्रजातियों के लगभग 560 की संख्या में वन्यप्राणी स्वस्थ एवं सुरक्षित हैं। आज उनके इस विदाई समारोह में सर्वश्री एन.के श्रीवास्तव अधीक्षक एवं श्री टी.आर जायसवाल रेंज आफीसर के साथ राज्य स्तरीय वन्यजीव समन्वय समिति के सदस्य श्री द्वारिकासिंह ठाकुर जी उपस्थित रहे। श्री ठाकुर अपना सम्पूर्ण प्रभार वन्यप्राणी शाखा के वरिष्ठ वनपाल श्रीमति सुखबाई कंवर को सौंपकर कार्यमुक्त हुए हैं। इस अवसर पर कानन के सभी मैदानी कर्मचारियों के साथ जू कीपर एवं अन्य दैनिक श्रमिक लगभग 145 की संख्या में उपस्थित रहे हैं। श्री ठाकुर की आज सेवानिवृत्ति  के बाद उन्हें उनकी 16 वर्षों की सेवा अनुभव के आधार पर पुनः वन्प्राणी सलाहकार मण्डल में वरिष्ठ सदस्य के रूप में सेवा लिए जाने की घोषणा अधीक्षक कानन पेण्डारी जू द्वारा की गई।

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