नवीन कुमार /नई दिल्ली :-कहते है इंसान के लिए आत्म –सम्मान  और इज्जत से बढ़ कर कुछ नहीं होता ,लेकिन इंसान अपनी इज्जत को ही बेचने लग जाए तो उसे समाज में इन्सान का दर्जा नहीं दिया जाता ,यही वजह है कि  या तो वो रात के अँधेरे में निकलेगा या फिर मुँह  छिपाकर दिन के उजाले में अपनी पहचान छुपाये पैरवी करने वाने पक्ष और विपक्ष  वाले बहुत मिल जायेगे लेकिन कडवा सच यही है की इन जिस्मफिरोशी करने वालो को चलाने वाले आप और हमारे समाज के बीच से ही निकले  लोग है जिनकी संख्या इतनी हो चुकी है की हमारी सरकार भी चाह कर उन पर अंकुश नहीं लगा सकती सोचिये ताजा मामला दिल्ली सरकार के एक  मंत्री संदीप कुमार का जिसने दिल्ली की सियासत में भूचाल ला दिया  आनन्- फानन में उसका बचाव करते आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष ने तो पैरवी करते हुए हमारे  महात्मा गांधी  ,जवाहरलाल नेहरु ,अटल बिहारी वाजपेयी ,और बड़ी कई हस्तियों की तुलना इस तताकथित मंत्री संदीप कुमार से कर दी और पुरे होश  में राष्ट्र पिता  महात्मा गांधी को भी ऐयाश बताया और ये सुनकर भी आज  पूरा भारत खामोश है क्या अब राष्ट्र पिता को भी वे लोग चरित्र प्रमाण पत्र देंगे जिन्हें वे खुद राष्ट्र पिता मानते है अपनी करतूत छुपाने के लिए ये पुरे भारत में जो अश्लीलता अपने सन्देश से आशुतोष ने फैलाई है वो पूरी तरह से निंदनीय है खैर आगे बढ़ते है बात कर रहे थे दिल्ली के रेड लाईट  जीबी रोड की जहाँ खुलेआम जिसम फिरोशी होती है और बकायदा दलाल होते है जो आपको इन बदनाम गलियों से रूबरू करवाते है ऐसा नहीं है की दिल्ली में जी बी रोड ही एक ठिकाना है ठिकाना हर वो जगह हो सकती है जहां हमारे सिस्टम में शौषण और  रेपिस्ट मंत्री संदीप कुमार और बचाव करने वाले मंत्री आशुतोष जैसे पूर्व गन्दी मानसिकता के पत्रकार रहते हो जो औरत को महज शारीरिक भूख के अलावा कुछ नहीं समझते दिल्ली पुलिस के के मुताबिक जीबी रोड पर 83 कोठे है जिनमे करीब 4500 किशोरी- युवतिया जिस्मफिरोशी का व्यापार करती है कोठो की दिन की कमाई दो से तीन लाख रुपए होती है जब पुलिस उनको पकडती है तो कोठे ग्राहक कहते है की वो गलत क्या कर रहे है ऐसा पुलिस कहती है तो सोचिये इस जिस्म फिरोशी की पहुँच कहा कहा तक है कोठा संचालको में आज दूसरा बड़ा नाम कोठा मालकिन शहनाज  का है जिसकी उम्र (36) वर्ष है इस शहनाज  की कहानी कुछ यूँ है शहनाज मूलरूप से आंध्रप्रदेश   की रहने वाली है शहनाज  को महज 13 वर्ष की उम्र में एक मानव तस्कर गिरोह ने दिल्ली लाकर उसे कोठे पर बेच दिया था यहाँ कई वर्षों जिस्मफिरोशी का धंधा करने के बाद शहनाज  ने एक कोठा किराये पर लिया और धीरे –धीरे से आज शहनाज  खुद इन बदनाम कोठो की मालकिन बन गयी कोई तबका ऐसा हो जो इन बदनाम गलियों में आता ना हो आज शहनाज  के बच्चे नामी गिरामी स्कूलों में पढ़ते है  ये दिल्ली की एक मात्र झलक है ये जिस्म फिरोशी का जाल तो पुरे भारत में समाया हुआ है जिसका समाधान निकालना  बहुत जरुरी है

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