गोपालगंज जिले के जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियो कि उदासीनता के कारण विकास कि रौशनी से कोसो दूर है जिले का यह गाँव 

विदेश में रहने वाले युवक शाहिद कौसर ने सोशल मिडिया के माध्यम से शुरू कि अपने पिछड़े गाँव को विकसित करने कि मुहीम img_3736611062270 img-20160726-wa00092015-05-18_23-21-59

आज मैं बात करने जा रहा हु बिहार राज्य के गोपालगंज में बशे एक छोटा सा गांव मांझा गद्दीटोला के बारे में। ये गांव महज मांझा प्रखंड से एक किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित है जिसकी आबादी इसके साथ बशे कुल टोलो को मिलाकर 5000 तक है। इस गांव में अल्पसंख्यक,पिछड़ी,हरिजन,अनुसूचित जाति,तथा अनुसूचित जनजाति के लोग बशे हुवे है। ये गांव मांझा प्रखंड के इतनी करीब होने के बावजूद भी सरकार के तरफ से दी जाने वाली मुलभुत सुविधाओ से बंचित है जो की बिहार राज्य के बढ़ते बिकाश को देखते हुवे बहुत ही शर्म की बात है।आईये मै कुछ जरुरी सुविधाओ से बंचित रहे इस गांव के बारे में बिस्तार से बता रहे है। सबसे पहले आदमी की और गांव की बिकाश के लिए जरुरी है
1. सड़क
इस गांव में करीब 200 घर है और गांव के आसपास 5 टोले है जिनकी यातायात की साधन इस गांव से होकर ही है फिर भी इस गांव के साथ साथ आसपास के टोले भी दुसवारिया झेल रहे है क्योंकि इस गांव की सड़क का हाल इतनी ख़राब है कि आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते है बारिश के दिनों में तो आना जाना ही ठप हो जाता है। 15 साल पहले बिधायक फण्ड से इस रोड का इटीकरण कराया गया था पर आज वो इटीकरण कच्ची सड़क में तब्दील हो गयी है। आज बिहार सरकार ने सारी जिमेद्वारी मुखिया/वार्ड सदस्य के हाथ में दी है फिर भी दो बार रहे तत्कालीन मुखिया की नजर इस गांव टोले से कोशो दूर है।
2. नाला
सड़क के साथ साथ आज के जीवन में सबसे जरुरी है नाला का होना जिस से गांव की प्रदूषित जल नाला के रास्ते गांव से दूर चला जाये जिस से गांव में बीमारी का फैलाव न हो लेकिन इस गांव के लोग नाला की सुविधा तो क्या आजतक नाम भी नहीं सुने है।
3. बिजली
काफी प्रयाश और नितीश सरकार की उपलब्धियों की वजह से आजादी के 69 साल बाद बिजली तो आयी पर आजतक पुरे गांव में घर घर कनेक्शन नहीं दिया गया है जिस से अभी तक सारे लोग इस अद्भुत सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे है।जबकि गांव के 90 परसेंट लोग बी पी एल के श्रेणी में आते है।
4.शिक्षा
गांव की अच्छी बिकाश के लिए आज के ज़माने में सबसे अहम और जरुरी है शिक्षा जो की न के बराबर है। गांव की जनसँख्या मुस्लिम बहुमूल्य होने की वजह से गांव में एक बर्षो से मख्तब स्कूल है जिसमे सुविधाओ की घोर कमी है। कभी नल ख़राब रहता है तो कभी शिक्षक की कमी। गांव वालों के काफी प्रयाश के बाद इस स्कूल में अभी 2 उर्दू के शिक्षक है जबकि वहा बच्चो के प्रतिशत के हिसाब से और उर्दू शिक्षक की जरुरत है।इन असुविधावो की वजह से गांव के छोटे छोटे बच्चो को उर्दू की पढाई करने के लिए किसी कोचिंग संचालक को पकड़ना पड़ता है या फिर दूसरे और दूर स्थित स्कूल का रुख करना पड़ता है। गांव वालों के द्वारा बहुत बार जिला पदाधिकारी को स्कूल को अपग्रेड करने के लिए आवेदन दिया गया है पर राजनीती कारण से ये सब सुविधाओ से गांव आज भी बंचित है।
इस गांव के लोग ज्यादातर अपना घर चलाने के लिए विदेशो का रुख करते है और इतनी कम सुविधाओ के बावजूद भी इस गांव में कुछ सरकारी नौकरिया भी है उन लोगो से मिलने और बातचीत के बाद उनका कहना था कि अगर सरकार हमे अच्छी सुविधाएं देने का वादा करे तो हम और बेहतर कर के दिखाएंगे।गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इतनी कम सुविधाओ के बावजूद भी आज हमारे बच्चे सबसे ज्यादा इंजीनियर है। गांव के युवा पीढ़ी के 70 परसेंट बच्चे इंजीनियर है।उनके गार्डियन का कहना है कि अगर हमें सरकार के तरफ से अच्छी सुविधाएं मिले तो हम अपने बच्चों को देश की सेवा करने के लिए अच्छी अच्छी पढ़ाई विदेशो से कराना चाहते है भले हम लोग एक वक़्त की रोटी कम ही खाएंगे। गांव के बुजुर्गों में आज़ाद अली , शम्सुल हक गद्दी,सिराजुद्दीन गद्दी,फकरुद्दीन अली,निजामुद्दीन गद्दी,महंथ गद्दी,दारोगा गद्दी,सलामत गद्दी,बाबूलाल गद्दी और सारे युवा साथियो का कहना है कि अगर थोड़ी सी सरकार हमारे गांव पे धयान दे दे तो हम अपने बिहार राज्य तथा देश का नाम करने में सबसे आगे नजर आएंगे।
आज इस गांव के इन लोगो से मिलने के बाद ये मालूम चलता है कि आज भी बिहार के ऐसे कई गांव है जहाँ ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है जिस से उस गांव की बिकाश पूर्ण रूप से नहीं हो पाया है। मै माननिये मुख्यमंत्री बिहार श्री नितीश कुमार का धयान इस गांव के तरफ मोड़ना चाहता हु साथ साथ बिहार के और भी ऐसे ही गांव के तरफ भी झुकाव करना चाहता हु की आप इन सभी गांव का बिकाश करने में निचली स्तर के अधिकारियो तथा जन प्रतिनिधियों पे दबाब बनाये जिस से आपकी छबि पे कोई आंच न आये।
शाहिद कैशर(इंजीनियर सह समाजसेवक)
मांझा गद्दीटोला
गोपालगंज
बिहार

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