नवीन कुमार /नयी दिल्ली :- दिल्ली में तीन नगर निगमों में से सबसे पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का क्षेत्र न केवल पूरी तरह ग्रीन वेस्ट से मुक्त हो जाएगा अपितु इस वेस्ट की पूरी तरह रिसाइकलिंग होने के बाद इसका इस्तेमाल पार्कों में किया जाएगा। द.दि.न.नि. के दक्षिणी जोन में ग्रीन पार्क में आज आयोजित एक समारोह में सात वुड चिप्पर मशीनों की इस काम के लिए शुरूआत की गयी। इस समारोह में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र सिंह मोंटी अपर आयुक्त श्री जी.एस. मीणा दक्षिणी जोन के उपायुक्त श्री एस.के. सिंह और बागवानी विभाग के प्रमुख समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। श्री मोंटी ने कहा कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का समूचा क्षेत्र तीन महीने में पूरी तरह ग्रीन वेस्ट से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी पश्चिमी और दक्षिणी जोन में ग्रीन वेस्ट से मुक्ति पा ली गयी है और इस वेस्ट की रिसाइकलिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि निगम के चार जोन में प्रतिदिन लगभग पाँच टन ग्रीन वेस्ट निकलती है और हर रोज लगभग बाईस  टन ग्रीन वेस्ट को उठाकर ओखला स्थित लैण्डफिल साइट में भेजा जाता है। निगम का पूरा क्षेत्र ग्रीन वेस्ट से मुक्त हो जाने से इस वेस्ट को ओखला साइट तक ले जाना जरूरी नहीं होगा। चिप्पर मशीनों से इसे महीन बनाकर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह ग्रीन वेस्ट को लैण्डफिल साइट तक ले जाने में ट्रक और ईंधन का खर्च बचेगा तथा प्रदूषण में कमी आएगी। अभी तक पूरा ग्रीन वेस्ट लैण्डफिल साइट में नहीं पहुँचाया जा रहा जिसकी वजह से यह फैला रहता है। श्री मोंटी ने कहा कि पश्चिमी और दक्षिणी जोन में अब छः-छः चिप्पर मशीनें है जो कि ग्रीन वेस्ट के निपटान के लिए पर्याप्त हैं। मध्य और नज़फगढ़ जोन में फिलहाल एक-एक मशीन है। इन दोनों जोन में भी दिसम्बर के महीने में छः-छः मशीनें हो जाएंगी जिससे पूरे क्षेत्र में ग्रीन वेस्ट से मुक्ति मिल जाएगी। निगमायुक्त डॉक्टर  पुनीत कुमार गोयल ने बागवानी विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस वर्ष के अंत तक द.दि.न.नि. क्षेत्र को पूरी तरह ग्रीन वेस्ट से मुक्त किया जाए। बागवानी विभाग ने बताया कि इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है और दिसम्बर के अंत से पहले ग्रीन वेस्ट से मुक्ति मिल जाएगी।श्री मोंटी ने कहा कि ग्रीन वेस्ट से मुक्ति में इस वेस्ट की रिसाइकलिंग का बहुत बड़ा योगदान होगा। पार्कों के भीतर और पार्कों के बाहर पेड़ों से निकले ग्रीन वेस्ट का इस्तेमाल उसी स्थान पर किया जाएगा। चिप्पर मशीन से ग्रीन वेस्ट से बनकर निकले महीन पदार्थ का इस्तेमाल पार्कों में पक्के ट्रैक और चारदीवारी के बीच के कच्चे भाग में इस ग्रीन वेस्ट के महीन पदार्थ को फैलाया जाएगा। ऐसा करने से यह खाद का काम करेगा और हरियाली बढ़ाने में मददगार बनेगा। यह गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल ने पेड़ों के आस-पास बने कंक्रीट के क्षेत्र को हटाने के निर्देश दिए थे। निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने ये कंक्रीट के स्थान को हटाकर पेड़ों के इर्द-गिर्द मिट्टी का दायरा विकसित कर दिया है। मिटटी के दायरे में अब ग्रीन वेस्ट के महीन पदार्थ को फैलाया जाएगा जिससे पेड़ो के इर्द-गिर्द नमी बनी रहेगी, पेड़ो को पोषण मिलेगा और पूरा इलाका धूलमुक्त हो जाएगा। श्री मोंटी ने कहा कि यह एक किस्म की नई हरित क्रांति है।

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