सुजीत मिश्रा(सिट्टी)-कौशाम्बी /उत्तर प्रदेश 1951 में हुए पहले चुनाव के बाद से आजतक 3 बार रह चुकी हैं सामान्य चायल विधानसभा की सीट पर आज तक किसी *ब्राम्हण*को विद्यायक बनने का सौभाग्य नही प्राप्त हुआ था इस बार *ब्राम्हण विरोध का टैग लगाकर राजनीती कर रही सत्ताशीन सपा ने*इस बार स्थानीय *ब्राम्हण नेता शशिभूषण द्विवेदी उर्फ़ बालम महाराज* को 253 चायल से उम्मीदवार घोषितकर अपनी जीत की उम्मीद प्रबल कर ली हैं *गौरतलब*हैं की सपा यहाँ कई बार दूसरे स्थान तक पहुंच सकी है पिछली बार तो जीतते जीतते हार गयी कारण *ब्राम्हण समाज की अवहेलना*ही थी बताये चले की *बालम महाराज पिछली बार अपना दल से चुनाव लड़े और 21756(12.2प्रतिसत) मतो के साथतीसरे पायदान पर रहे थे* पिछली बार बीजेपी ने भी अपने *जिलाध्यक्ष जयचन्द्र मिश्र*को टिकट दिया था लेकिन उनका *4528 (2.5 प्रतिसत)* के साथ स्थान 7वाँ रहा चुनाव में। बालम का वर्चस्व *जिले की तीनो सीटो सिराथू /चायल/मंझनपुर* में हैं क्योकि फ़िलहाल *करवरिया परिवार*के जेल में होने के कारन *बालम महाराज ही ब्राम्हण समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं* चुनाव जितने की उनकी सम्भावनाये ज्यादातर हैं । वही बहुजन समाज पार्टी के *राष्ट्रीय महासचिव् 4 बार विधायक इंद्रजीत सरोज* की दिक्कते बढ़ गयी हैं फ़िलहाल *आसिफ जाफरी बसपा(54796/30.7 प्रतिसत) से ही चायल विधायक हैं* सम्भावनाये यह भी है की सिराथू और चायल से दोनों मुस्लिम उम्मीदवार के टिकट पर पुनः विचार भी किया जा सकता हैं ।

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