नवीन कुमार /नई दिल्ली :- माननीय उपराज्यपाल श्री नजीब जंग ने आज द दि न नि के मध्य जोन में आयोजित समारोह में 5 फिक्सड कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन नगर को समर्पित किये। लाजपत नगर रिंग रोड क्रासिंग के निकट कैप्टन गौड़ मार्ग और तुगलकाबाद एक्स टेंशन में तारा अपार्टमैंट में दो अलग अलग समारोह में दो ऐसे स्टेशनो का उदघाटन किया जबकि इन समारोहों में उन्होने नेहरु कैंप कालका जी एम टी एन एल कार्यालय के निकट सरिता विहार और सेवा नगर कोटला के ऐसे स्टेशनो के चालू हो जाने की घोषणा की।
दक्षिण दिल्ली स्वच्छ इनिशियेटिव्स लिमिटेड के सहयोग से चलाई जा रही परियोजना की कई प्रमुख विषेषताएं हैं। इस परियोजना में आटो टिपर से गलियों और सड़को से कचरा एकत्रित किया जायेगा, इस कचरे को ढके हुए वाहनों में रखकर फिक्सड कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन एफ सी टी एस/ मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन तक ले जाया जायेगा, कम्प्रेस किये गये कचरे को एफ सी टी एस/ मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन से कचरे से बिजली बनाने के संयंत्र तक ले जाया जायेगा और गलियों में झाडू लगाकर एकत्र कचरे और नालियों की गाद को लैंड फिलिंग साइट में डाला जायेगा। इस परियोजना मेें कचरे को अलग अलग कर निपटान के जरियें 3 आर यानि रिडयूस, रिसाइकिल और रीयूज पर बल दिया गया है इस परियोजना से कचरे की अधिकतम मात्रा का निपटान होगा और कम से कम कचरा लैडफिल साइट में डाला जायेगा।
इस अवसर पर श्री जंग ने कहा कि दिल्ली देश का दिल है जबकि दक्षिणी दिल्ली हमारे शहर का दिल है। उन्होंने ये भी कहा कि द दि न नि द्वारा की जा रही पहल की अन्य नगरों और देश में भी जरुरत है। उन्होने यह भी कहा कि सफाई और स्वच्छता में कमी से बीमारियां फैलती हैं कई बीमारियों का संबंध सफाई में कमी रह जाने से होता है। अपर्याप्त सफाई के कारण कुछ इलाकों में बीमारियों का प्रभाव हुआ। कई बार बीमारियां फैलने पर एजैसियों के ढीले काम को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होने कहा कि इन सब कठिनाइयों के बावजूद द दि न नि को स्वच्छता और सफाई के क्षेत्र मे कारगर सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी । निगम आयुक्त डाॅ. पुनीत कुमार गोयल के अनुरोध का जवाब देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि वे बदरपुर में कचरे से बिजली बनाने की परियोजना के लिए एन टी पी सी के साथ संपर्क में हैं। उन्होने यह भी कहा कि ऐसी परियोजनाएं चालू करने से पहले हमें स्थानीय निवासियों की स्वास्थ्य चिंताओं का समाधान करना होगा। श्री जंग ने द दि न नि को भरोसा दिलाया कि डीडीए उसे कचरे के उपयोगी निपटान के लिए ओखला लैंडफिल साइट के साथ 100 एकड़ जमीन आवंटित करने के लिए निश्चित तौर पर विचार करेगा।
आयुक्त डाॅ. गोयल ने परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि इसके लागू होने से एक ही साथ प्राइमरी और सैकेंडरी स्तर पर कचरे के संकलन का काम सुनिष्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि मध्य जोन में नया एफ टी सी एस कचरे के संकलन और निपटान में बडा अनुकूल परिवर्तन लायेंगे। मध्य जोन में 15 एफ टी सी एस और 32 मोबाइल कंपैक्टर चालू किये जायेंगे जिससे इस जोन के पूरे कचरे में से आधे का निपटान आसानी से किया जा सकेगा। इस जोन में प्रतिदिन 650 एम टी कचरा निकलता है। डाॅ. गोयल ने कहा कि इसी तरह के काम के लिए पश्चिमी और दक्षिणी जोन में भी निविदा आवंटित किये जाने की प्रक्रिया जारी है। समारोहों में स्थानीय सांसद सुश्री मीनक्षी लेखी, महापौर श्री श्याम शर्मा, स्थायी समिति अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र सिंह मोंटी, सदन के नेता श्री सुभाष आर्य, अपर आयुक्त श्री जी एस मीणा उपस्थित थे जबकि अध्यक्षता वार्ड समिति के अध्यक्ष श्री नीरज गुप्ता ने की। श्री मोंटी ने धन्यवाद करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एफ सी टी एस का काम शुरु हो जाने से सडकों और इसके आस पास कूडा कचरा दिखाई नहीं देगा। इससे दिल्ली में स्वच्छता अभियान की सफलता में भी मदद मिलेगी। उन्होने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत एफ सी टी एस/ मोबाइल कंपैक्टर, 250 आटोटिपर, हुकलोडर और अन्य उपकरणों समेत परियोजना लागत 80 करोड़ रु होगी जबकि एक एफ सी टी एस की लागत 40 लाख रु होगी।
एफ सी टी एस में एक बिन, टिप कार्ट, हाइड्रोकली चलने वाले लोडिंग शोविल बकट, कंप्रैसर और हुक लोडर होंगे। कालोनियों और इलाकों से संकलित कचरे को टिपकार्ट से बिन में डाला जायेगा जिसकी क्षमता 7 टन होगी और इसका भीतरी क्षेत्र 10.50 घन मीटर होगा। टिपकार्ट द्वारा लाया गया ढाई टन कचरा बिन में डाला जायेगा। इसके बाद बिन में डाला गया कचरा लोडिंग शोविल बकट से फिक्सड कंपैक्टर में डाला जायेगा जहां इसे दबाकर छोटा आकार दिया जायेगा। कंप्रैस किया गया कचरा 10 टन क्षमता के हुकलोडर में डालकर ओखला के कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्र में भेेजा जायेगा। इस हुक में प्लास्टिक कचरे के लिए अलग बिन होगा। कंप्रैस्ड कचरे को बिजली से चलने वाले संयंत्र में भेजने के लिए हुक को एफ सी टी एस से अलग किया जायेगा और एक अन्य हुक उसके साथ जोड़ा जायेगा। एफ सी टी एस 7.5 किलोवाट बिजली की मोटर से चलेगा जबकि मोबाइल कंपैक्टर डीजल से चलेंगे। इस परियोजना में 15 एफ सी टी एस, 32 मोबाइल कंपैक्टर, 18 सिल्ट टिपर और 4 बिन वाषिंग मषीन तथा अन्य उपकरण होंगे। एफ सी टी एस एक जांची परखी मषीन है जिसे कोलकाता में इसकी सफलता को देखने के बाद लागू किया जा रहा है। एफ सी टी एस उन ढलावों का स्थान लेंगे जिनमें कूडा कचरा डालने की काफी अधिक क्षमता है।
पहले की अवधारणा में कचरे के प्राइमरी संकलन के लिए और सैकेंडरी निपटान के लिए अलग अलग एजेंसियां थी और इस व्यवस्था में एक एम टी कचरे से संबंधित कार्य पर प्रति एम. टी. 2600 रु खर्च आता था जबकि नई व्यवस्था में 1727 रु आयेगा।
उप-राज्यपाल ने तारा अपार्टमैंट के निकट एक नए शुरु किए गये शौचालय परिसर को भी देखा और संबंधित विभाग को सफाई बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी तैनात करने के निर्देश दिये।

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