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नवीन कुमार /नई दिल्ली :- दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने अपने मध्यम आकार के और बड़े पार्कों में कलात्मक और सुन्दर गजीबो यानि गार्डन हट स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। कलात्मक गजीबो का इस्तेमाल बुजुर्गाें, युवा विद्यार्थियों और बच्चों समेत समाज के विभिन्न आयु वर्ग के लोग सामाजिक विचार-विमर्श , मनोरंजन गतिविधियों तथा स्वयं को थकान और तनाव से मुक्ति दिलाने के लिये कर सकेगें। इनका इस्तेमाल वर्षा से बचने के लिये भी किया जा सकेगा। स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री शैलेंदर सिंह मोन्टी ने आज बताया कि गजीबो सुविधा पार्क में आने-वालों को आपस में विचार-विमर्श करने और समाज की भावना मजबूत बनाने का बेहतरीन अवसर प्रदान करेगी। उद्यान विभाग पार्कों का विकास इस तरह से कर रहा है कि ये बैठने और मंनोरंजन की गतिविधियों के लिये बेहतर स्थान बन सकें और इनमें सुन्दर और हरा-भरा वातावरण मौजूद रहें। निगम के पास 2169 एकड़ क्षेत्र में 6818 पार्क है। इनमें से कम से कम 600 पार्कों में चरणबद्ध तरीके से गजीबो विकसित करने का निर्णय लिया गया है। शुरू में मध्यम और बड़े आकार के 30 पार्कों का चयन इस कार्य के लिये किया गया है। श्री मोन्टी ने यह भी कहा कि 30 गजीबो अगले तीन महीने में चालू हो जायेगें। महानगरों में पार्क सामाजिक एकता में मद्दगार होते हैं, उन्होंने कहा।
इस समय लगभग आठ पार्कों में गार्डन हट की सुविधा है लेकिन इनमें बैठने का समुचित स्थान और कलात्मक चित्रण नहीं है। ये गजीबो यानि गार्डन हट ग्रीन पार्क एक्सटेंशन , सुभाष पार्क आर.के. पुरम, तिलक नगर और सर्वोदय नगर तथा अन्य स्थानों पर संबंधित आर.डब्लू.ए. के अनुरोध पर बनाये गये है। एक गजीबों की औसत लागत छः लाख रुपये आयेगी और निगम को अपने 607 पार्कों में यह सुविधा देने के लिये 36 करोड़ 50 लाख रुपये की जरुरत होगी। 3 से 5 मीटर व्यास के गजीबों त्रिकोण, गोलाकार, वर्ग, चकोर और अन्य आकारों के होगें। इनमें गोलाकार बैन्चों पर 15 से 30 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। इनका निर्माण एम.एस. स्टील और लोहें के पिल्लर से किया जायेगा और छत फाईबर या कन्क्रीट सीमेंट की होगी और इनमें न कोई दीवार होगी न दरवाजा। छत पिल्लर और बैन्चों पर कलात्मक चित्रण किया जायेगा और कुछ गजीबों में मूर्ति कला का प्रदर्शन होगा। इनमें सैर करने वाले उन लोगों को भी कुछ समय और बैठकर अपने आस-पास और पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा जो सैर करने के बाद तुरन्त वापस चले जाते हैं। श्री मोन्टी ने उम्मीद जाहिर की कि इनका इस्तेमाल बड़े विद्यार्थी अपने करियर और शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिये कर सकेगें। महानगरों में प्रवासियों की संख्या बढ़ती जाने से सामाजिक सम्पर्क में कमी आ रही है। ऐसे में गजीबो वाले पार्क विभिन्न सामाजिक और जातीय प्रष्ठ भूमि के लोगों को मिलकर विचार-विमर्श करने का मौका देगें।

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