नवीन कुमार /नई दिल्ली :-उत्तरी दिल्ली के महापौर डाॅ संजीव नैय्यर ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मुख्यालय डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि स्वच्छ भारत मिशन उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों में सबसे प्रमुखता पर है और इसके तहत जल्द ही भलस्वा में ठोस अपशिष्ट विद्युत उर्जा संयंत्र लगाया जाएगा ताकि कूड़े की बढ़ती क्षमता के अनुरूप उसका निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट पदार्थों का निपटान उत्तरी दिल्ली नगर निगम समेत सभी नगरीय निकायों के लिए मुख्य चुनौती है, डाॅ संजीव नैय्यर ने कहा कि इस नये ठोस अपशिष्ट पदार्थों के निपटान के लिए लगने वाले प्लांट में 94 प्रतिशत अपशिष्ट पदार्थों का निपटान पूरी तरह हो जाएगा जबकि सिर्फ 6 प्रतिशत अपशिष्ट का उपयोग ईटें बनाने जैसे कार्यों में होगा। उन्होंने कहा कि वियाना से इस संबंध में तकनीकी सहायता भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा ली जाएगी।
डाॅ नैय्यर ने घोषणा की कि नरेला बवाना में निर्मित ठोस अपशिष्ट से उर्जा हेतु संयंत्र पर पूर्ण रूप से कार्य नवंबर माह में शुरू हो जाएगा। इसके अलावा अन्य छोटे-छोटे प्लांट लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।
महापौर ने बताया कि उत्तरी दिल्ली क्षेत्र में श्वानों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा विशेष बंध्याकरण अभियान शुरू किया जाएगा जिसमें रोजाना लगभग 1000 श्वानों का बंध्याकरण किया जाएगा। इसके अनुसार इस वर्ष 1.5 लाख श्वानों का बंध्याकरण करने का लक्ष्य इस वर्ष के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में बेहतर परिणाम लाने के लिए डाॅक्टरों व कर्मचारियों की सेवा को आउटसोर्स करने पर भी निगम विचार कर रही है। डाॅ नैय्यर ने बताया कि इसके लिए उत्तरी दिल्ली नगर निगम तीन नये बंध्याकरण केंन्द्र रोहतक रोड, रोहिणी व तिमारपुर में खोलेगा ताकि इसके बेहतर परिणाम हासिल किए जा सके। उन्होंने बताया कि इस कार्य का परिणाम आने वाले कुछ सालों में दिखाई देगा, लेकिन समय रहते यदि श्वानों की संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह दिल्लीवासियों के लिए मुसीबत का कारक बन सकता है।
स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री प्रवेश वाही ने कहा कि अब 500 मीटर तक के प्लाटों में निर्माण के लिए नागरिकों को उत्तरी दिल्ली नगर निगम से नक्शे पास करने हेतु स्वीकृति नहीं लेनी पड़ेगी पहले 105 मीटर तक के प्लाॅटों के लिए नागरिकों को स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती थी। उन्होंने बताया कि अब इस तरह के निर्माण कार्यों के लिए केवल निगम को सूचित करना होगा और आर्किंटेक्ट और मालिकों को अंडरटेकिंग देनी होगी कि नक्शा एकीकृत भवन उपनियमों के अनुरूप है। श्री वाही ने बताया कि आर्किटेक्ट को भी नक्शों को स्वीकृत करने का अधिकार होगा इससे लालफीताशाही में तो नियंत्रण होगा ही साथ ही भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण होगा।
श्री वाही ने बताया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नये ट्क, टिप्पर, लोडर्स व अन्य संबंधित उपकरणों की खरीद हेतु 110 करोड़ रूपये की योजना तैयार की गई है, ताकि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के विभिन्न क्षेत्रों से कूड़े के निपटान में किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।
श्री वाही ने बताया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार 46 नर्सों के अनुबंध को फिर से बढ़ा दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 1 जनवरी 2014 तक विकास कार्यों हेतु ठेकेदारों को 44 करोड़ रूपये की राशि का भुगतान विभिन्न विकास कार्यों हेतु ठेकेदारों को किया जा चुका है ताकि निगम द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों में कोई अवरोध उत्पन्न न हो।

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