नवीन कुमार /नई दिल्ली :-उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त श्री प्रवीण गुप्ता ने आज भलस्वा में स्थित सैनेटरी लैंडफिल साइट की वस्तुस्थिति का जायजा लेने के लिए निरीक्षण किया। इस अवसर पर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त श्री पुनीत गोयल, उत्तरी निगम के अतिरिक्त आयुक्त (अभियांत्रिकी) श्री संजय गोयल, उत्तरी व दक्षिणी नगर निगम के प्रमुख अभियंता क्रमशः श्री विजय प्रकाश व श्री उमेश सचदेव, प्रमुख निदेशक पर्यावरण एवं प्रबंधन सेवाएं श्री देवेन्द्र कुमार, सिविल लाइन क्षेत्र के उपायुक्त श्री दीपक पुरोहित, मुख्य अभियंता (उत्तरी दिल्ली नगर निगम) श्री संजय जैन व श्री नवरंग सिंह सहित निगम के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद श्री अजीत यादव के साथ स्थानीय निवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था, जिन्होंने लैंडफिल साइट से होने वाली पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के संबंध में निगम अधिकारियों को जानकारी दी।इस अवसर पर श्री गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कूड़े के बेहतर प्रबंधन के लिए जल्द से जल्द और बुलडोजर व उत्खन्न उपकरण खरीदें जाएंे अथवा किराये पर लिए जाए। इन उपकरणों से कूड़े को समतल करने और उसकी ड्रेसिंग करने में सुविधा मिलेगी।उन्होंने निर्देश दिए कि जल्द से जल्द कूड़े के समतलीकरण का कार्य प्रारंभ किया जाए जिससे उत्पन्न होने वाले धूंए और दुर्गंध जैसी समस्याओं से निजात मिल सके। उन्होंने वहां अधिक मात्रा में पौधे व झांड़ीनुमा पौधे लगाने के भी निर्देश दिए ताकि क्षेत्र के पर्यावरण को अधिक नियंत्रित रखा जा सके। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि कूडे़ के बेहतर प्रबंधन के लिए यहां पर कूड़े के निपटान की मात्रा कम की जाए। इससे स्थानीय नागरिकों को भी सुविधा हो।श्री प्रवीण गुप्ता ने बताया कि कूड़े के वैज्ञानिक रूप में प्रबंधन के लिए अपशिष्ट पदार्थों से उर्जा संयंत्र की स्थापना ही मात्र एक स्थायी समाधान है, जिसके लिए उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से राजमार्गों के निर्माण व विकास कार्यों में कूड़े का उपयोग करने के संबंध में संपर्क किया जा रहा है ताकि कम से कम अस्थायी रूप से समाधान हो सके। आयुक्त श्री गुप्ता ने कूड़े से भरे ट्रकों के वजन को नापने के लिए बनाए गए तुला-चौकी का भी निरीक्षण किया जो रिकाॅर्डिंग सिस्टम और जीपीआरएस से लैस है। जिसके कारण कूड़े भरकर आने वाले प्रत्येक ट्रकों के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध रहती है।

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