युवराज यादव,बलौदाबाजार —

img-20161206-wa0002बलौदाबाजार। पहले गाँव के ही बच्चों को स्कूल तक लाने घर घर जाकर कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी, परन्तु अब गाँव के ही नहीं 12 से 15 कि मी दूर के अन्य गाँव के पालक भी अपने बच्चों को बलार नवागांव के स्कूल मे पढ़ाने मे गर्व महसूस करते हैं।यह सब कमाल यहाँ पर पदस्थ शिक्षकों की अपने कर्तव्य के प्रति लगन से हुआ।

आज के वर्तमान युग मे शासकीय स्कूलों मे पदस्थ शिक्षकों का कार्य वेतनभोगी कर्मचारी बनकर रह गया है।पिछले कुछ वर्षों मे शिक्षा के स्तर मे आई गिरावट को देखते हुए शासन द्वारा शासकीय स्कूलों मे शिक्षा के गिरते स्तर मे सुधार लाने तरह तरह के जतन किए जा रहे हैं। आम लोगों का शासकीय स्कूल के प्रति मोह भंग हो गया है, तथा लोग अपने बच्चों को मोटी फीश देकर निजी स्कूलों मे पढ़ाने विवश हो रहे हैं।ऐसे मे यदि यह कहा जाए कि घने जंगलों के बीच स्थित जन जाति बाहुल्य के गाँव मे प्राथमिक स्कूल के बच्चे हिन्दी, अंग्रेजी, गणित पढ़ने लिखने मे इतने पारंगत हैं कि शहरों के निजी स्कूलों मे पढ़ने वाले बच्चों को भी पीछे छोड़ देंगे,इस बात पर शायद ही किसी को विश्वास हो परन्तु यह बिल्कुल कडुवा सच है।कसडोल क्षेत्र के जीवनदायिनी कहे जाने वाले बलार बांध के पास स्थित नवागांव (बलार) विकास खण्ड मुख्यालय से करीब 15 कि मी दुरी पर स्थित है।इस गाँव के पालक अशिक्षित होने के कारण स्कूल भेजने के बजाए बचपन से उन्हें अपने परम्परागत काम मे लगा देते थे।इस गाँव मे पदस्थ शिक्षा गारण्टी गुरुजी देवलाल चौहान लोगों को समझाते समझाते थक गए थे। वर्ष 2011 मे इस गाँव के स्कूल मे बतौर प्रधान पाठक मनोज जाटवर की पदस्थापना हुई।अपने पदस्थापना के तुरंत बाद उन्होंने गाँव के सभी लोगों की बैठक बुलाकर उन्हें सिर्फ एक बात कही कि इस गाँव के पास बने बलार बांध के पानी से हमारे गाँव की खेतों मे सिंचाई होती है।जिसका अन्न खाकर मै पला बढ़ा हूँ।इस गाँव का मुझ पर कर्ज है और उस कर्ज को कम करने मै यहाँ आया हूँ इसके लिए आप सभी मुझे सहयोगकरें।आप को बच्चों को सिर्फ स्कूल भेजना है उनके लिए कापी, किताब ,स्कूल बैग और अन्य जरूरी चीजें शासन से और शिक्षकों के सहयोग से किया जाएगा।ग्राम के पटेल रामदयाल बरिहा सहित सभी गाँव वाले प्रधान पाठक की बातों से न केवल प्रभावित हुए बल्कि बच्चों को स्कूल तक स्वयं छोड़ने आते थे।शिक्षकों ने भी कड़ी मेहनत से बच्चों को पढ़ाने लिखाने मे कोई कसर नहीं छोड़ी और उनकी मेहनत रंग भी लाई।इस स्कूल मे अध्ययनरत पहली कक्षा से लेकर पांचवी तक के सभी बच्चे हिन्दी, अंग्रेजी, तथा गणित विषय पढ़ने लिखने और बोलने मे इतने पारंगत हो गए हैं कि वे शहरों के महंगे निजी स्कूलों मे पढ़ने वाले बच्चों को भी पीछे छोड़ देंगे। अब यहाँ पर पदस्थ शिक्षकों को किसी भी बच्चे को घर तक लाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही पालकों को छोड़ने की ,स्वयं बच्चे स्वस्फूर्त होकर स्कूल आते हैं।कहा जाता है अच्छाई की खुशबू धीरे परन्तु चारों ओर फैलती है इसी प्रकार इस गाँव के ही नहीं आसपास के 12 से 15 कि मी दूर गाँव के लोग भी अपने गाँव के स्कूल को छोड़कर नवागांव के स्कूल मे पढ़ा रहे हैं।अपने बच्चों को यहाँ पढ़ाने वाले दूसरे गाँव के पालक इस स्कूल की पढ़ाई से खुश हैं और वे यहाँ पर पदस्थ शिक्षकों की तारीफ करते नहीं थकते।

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बच्चों को किताब,कापी, गणवेश,और बैग शासन तथा शिक्षक देते हैं

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शासकीय प्राथमिक शाला बलार नवागांव मे पढ़ने वाले लगभग सभी बच्चे अनु जन जाति वर्ग के हैं तथा वे अत्यंत गरीब भी हैं इसीलिए बच्चों को पहले स्कूल भेजने से कतराते थे,पालकों के इस मर्म समझते हुए प्रधान पाठक तथा सहायक शिक्षक ने निर्णय लिया कि शासन द्वारा दिए जाने वाले शाला अनुदान ,एवं शिक्षक अनुदान की राशि के अलावा कुछ राशि अपने वेतन का भी स्कूल एवं बच्चों के लिए खर्च करेंगे।यहाँ पढ़ने वाले बच्चों हर सामग्री स्कूल से ही दिया जाता है।

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तीसरी कक्षा के बच्चों को याद है 27 तक पहाड़ा

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इस स्कूल के कक्षा तीसरी के बच्चों को 2 से लेकर 27 तक का पहाड़ा कंठस्थ याद है,जबकि कि अन्य शासकीय स्कूल मे पढ़ने वाले पांचवी के बच्चों को भी बमुश्किल 20 तक पहाड़ा आती होगी। पहाड़ा के कारण यहाँ के बच्चे गणित विषय के सवालों को भी आसानी से हल कर लेते हैं।

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हिन्दी और अंग्रेजी दोनों विषय की लिखावट भी कमाल की

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इस स्कूल मे पढ़ने वाले कक्षा पहली से पांचवी तक के किसी भी बच्चे की लिखावट को देखकर किसी को भी विश्वास नहीं होगा कि यह लिखावट शासकीय स्कूल मे पढ़ने वाले प्राथमिक स्कूल के बच्चों की लिखावट है,परन्तु यह भी कड़वा सच है कि यहाँ के बच्चों की लिखावट भी आकर्षक है।

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अहाता निर्माण एवं मैदान समतलीकरण का सपना अधूरा

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इस स्कूल के प्रधान पाठक मनोज जाटवर एवं ग्रामीण  ग्राम पंचायत सरपंच एवं शासन से स्कूल की ऊबड़ खाबड़ मैदान को समतल करने एवं अधूरे अहाता को पूर्ण करने की मांग कई वर्षों से करते आ रहे हैं ,परन्तु इस ओर न तो ग्राम पंचायत ने ध्यान दिया और नहीं उच्च अधिकारियों ने। प्रधान पाठक एवं ग्रामीण मैदान समतलीकरण हो जाने पर यहाँ पर बागवानी एवं वृक्षारोपण करना चाहते हैं,ताकि पढ़ने वाले बच्चों के अलावा यहाँ आने वाले लोगों की स्कूल के प्रति लगाव और भी बढ़े।

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कम उम्र के बच्चे भी आते हैं पढ़ने

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नवागांव मे पदस्थ प्रधान पाठक मनोज जाटवर तथा सहायक शिक्षक देवलाल चौहान ने ग्रामीणो मे शिक्षा की ऐसी अलख जगाई है कि पाँच बर्ष से कम उम्र के बच्चे भी बड़े बच्चों के साथ पढ़ने के लिए स्कूल आ जाते हैं।छोटे बच्चों के लिए भी शिक्षकों ने विकल्प चुन लिया है उनके लिए निजी स्कूल जैसे नर्सरी की कक्षा लगाते हैं तथा उन्हें भी पढ़ाते हैं।प्रधान पाठक मनोज जाटवर का कहना है कि यदि बच्चों को स्कूल मे नहीं बैठाएंगे तो उनमें कुण्ठा की भावना उठने लगती है।

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बच्चों के रूचि के अनुसार बनता है मध्यान्ह भोजन

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एक तरफ जहां शासकीय स्कूलों मे मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाली समूहों के द्वारा मध्यान्ह भोजन शासन के नियम के अनुसार नहीं दिए जाने की प्रायः शिकायतें मिलती रहती है, परन्तु यहाँ पढ़ने वाले स्कूली बच्चों दीपांजलि कर्ष,तरुण बरिहा,संजू श्रीवास,राकेश बरिहा,यामिनी जायसवाल,राहुल श्रीवास,हीना ठाकुर सहित अन्य सभी ने बताया कि मध्यान्ह भोजन बनाने वाली समूह के लोग रोज बच्चों से पूछकर रूचि के अनुसार ही सब्जियां बनाते हैं।बच्चों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन दाल,भात, सब्जी, पापड़ ,आचार,दिया जाता है।महीने मे दो या तीन दिन अण्डे की सब्जी भी बनाई जाती है।

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