(शैलेश कुमार पाण्डेय )
उतरप्रदेश में सपा का अंतर्कलह कम होने का नाम नही ले रहा है दोनों और सिट बटवारे को लेकर गुटबाजी चरम सीमा पर दिख रही है
कितना बगावती है अखिलेश का कदम?
– सीनियर जर्नलिस्‍ट के. विक्रम राव का कहना है, ‘अखिलेश यादव का ये कदम बगावती है। टिकट बंटवारे के बाद उन्होंने कई नेताओं से गुरुवार को मीटिंग की।’
– ‘लेकिन, 235 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी होने के बाद अब सपा पूरी तरह से दो फाड़ होने की कगार पर है।’
– ‘मुलायम सिंह बहुत ज्यादा समझौते के मूड में नहीं हैं, क्योंकि ये उनके भी अस्तित्व की लड़ाई है।’
– ‘ऐसे स्थिति में दोनों लोगों के कैंडिडेट एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, जिससे भितरघात होगा और इसका फायदा बीजेपी को होगा।’
मुलायम के बैकफुट पर जाने से अखिलेश होंगे हावी
– राव ने आगे बताया, ‘अगर मुलायम सिंह बैकफुट पर जाएंगे तो ये उनके लिए नुकसानदायक होगा। उन्‍हें खुद लग रहा है कि उनके बैकफुट पर जाने से अखिलेश हावी हो जाएंगे। ऐसे में फिर उनकी बात कौन मानेगा?’
– ‘अगर अखिलेश बैकफुट पर नहीं जाते हैं तो समझिए सपा दो फाड़ हो चुकी है। ये भी हो सकता है कि अखिलेश कांग्रेस से गठबंधन करके चुनाव लड़ लें।’
बेटे के साथ ही होगा पिता
– सीनियर जर्नलिस्‍ट विजय शर्मा ने कहा, ‘इतिहास गवाह है कि पिता हमेशा बेटे के साथ ही खड़ा होता है। मुलायम सिंह अभी कुछ भी कहें, लेकिन आखिर में वो खुद ही निर्णय लेंगे।’
– ‘अखिलेश की लड़ाई मुलायम से नहीं, शिवपाल से है। अखिलेश ने अपनी खुद की इमेज बनाई है, लेकिन अभी भी चुनाव की चाबी मुलायम-शिवपाल के पास है।’
– ‘चुनाव के लिए जिस साम-दाम-दंड-भेद की जरूरत होती है, वो अखिलेश में नहीं है। वो मुलायम और शिवपाल के पास ही है।’
ये ड्रामा से ज्यादा कुछ नहीं
– सीनियर जर्नलिस्‍ट अनूप श्रीवास्तव के मुताबिक, ‘सपा में जैसा दिख रहा है, वैसा कुछ नहीं है। पिछली बार की तरह इस बार भी कुछ नहीं होगा।’
– ‘जो भी हो रहा है, वो सिर्फ मीडिया को अट्रैक्ट करने और अखिलेश को अच्छा बताने के लिए है।’
– ‘मुलायम और शिवपाल के बारे में सभी जानते हैं कि वो किस तरह की पॉलिटिक्स करते हैं, जबकि अखिलेश अभी युवा हैं।’
– ‘अखिलेश के चेहरे पर चुनाव लड़ा जा रहा है। ऐसे में अखिलेश को पाक साफ बताने के लिए ये सब किया जा रहा है, जिससे ये मैसेज जाए कि सीएम अच्छा करना चाहते हैं, लेकिन कर नहीं पा रहे हैं।’mulayam-akhilesh-new_1483

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