युवराज यादव

बलौदाबाजार।-विगत 13 वर्षों से मानस प्रचार में लगे मारुति नन्दन राम चरितमानस प्रचार संस्था कसडोल के कथा मर्मग्य भक्तगण |
कहा जाता है कि भगवत कथा सुनने,कहने,गाने व समझने (धारण करने) मात्र से परमात्मा शरण देता है,किन्तु आज के मानव भौतिकता वादी होकर पाश्चात्य संस्कृति की जाल में फंसता जा रहा है ; जो ईश्वर से दूरी का कारण है | यही कारण है कि आज का मानव दुखी व तनाव ग्रस्त रहता है और अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहा है |
पहले नवधा रामायण,ग्रंथ, भागवत आदि के माध्यम से कथा सुनने मिलता था | वर्तमान मे उनमे भी परिवर्तन आ गया है ,जो इस समय कथा प्रधान न होकर मनोरंजन प्रधान हो गया है| ऐसे समय मे श्री मारुति नन्दन राम चरित मानस प्रचार संस्था कसडोल के कथाकारगण लगातार 13 वर्षों से मानस प्रचार के पुनीत कार्य में नि:स्वार्थ भाव से लगे हुए हैं जो विभिन्न स्थानो पर कथा के माध्यम से विभिन्न प्रसंगो पर व्याख्यान देकर श्रोताओं को रसपान कराते हुए परमात्मा से जोडने के मुहिम में लगे हुए हैं | इस संस्था के लोग किसी भी अवसर पर आमंत्रित करने पर नि:स्वार्थ सेवा देते हैं |
इसी कडी में  दि. 30/04/2017 को मंगल भवन कसडोल में श्री रामचरित मानस प्रचार समिति द्वारा संरक्षक श्री अरुण कुमार मिश्रा (पूर्व विधायक) एवं संचालक श्री के.डी.वैश्नव की उपस्थिति में मानस कथा का कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें मानस मर्मग्यों ने प्रवचनों के माध्यमों से श्रोताओं को कथा की ओर आकर्षित किया | आज के कथा का कुछ भाव इस प्रकार रहा–ग्राम धमलपुर से पधारे श्री गंगाराम कैवर्त्य सेवानिव्रित्त प्राचार्य द्वारा मानस मे चार विश्रामगृह का संकेत-चित्रकुट, पंचवटी, प्रवर्सन एवं सुवेल दिया गया |कसडोल से श्री उपमन्यु वर्मा द्वारा राम रोस कपि त्रास प्रसंग पर प्रकाश डाला गया,बिबर प्रवेश प्रसंग लवनबन से आये हुवे श्री साधराम साहू गुरूजी द्वारा आंख बंद करना व खोलना विश्वास एवं विवेक का प्रतीक बताया गया | लाहोद से आये हुए श्री डी.आर.साहू जी सेवा निव्रित्त प्राचार्य ने परसा सीस सरोरुह पानी/ कर मुद्रिका दीन्ह जनजानी|प्रसंग पर कथा श्रवण कराया |कसडोल से श्री पुनीराम साहू जी द्वारा -तात राम कहूँ नट जनि मानहु |प्रसंग पर प्रकाश डाला गया | अमेरा से आये श्रीपुनीत राम जी ने सम्पाती प्रसंग पर “मैं देखहुँ तुम्ह नाही”विषय पर प्रकाश डाला | अंत में पलारी (लच्छनपुर) से पधारे श्री अंतराम धरमन ने “कहइ रीक्षपति कह हनुमाना, का चुप साधि रहेउ हनुमाना एवं भवभेषज रघुनाथ जस”दोहे पर अपना व्याख्यान देते हुए नाम रूप लीला धाम चारों की विशेष कथा कही |
उक्त कथाकारों को सुनने बडी संख्या पधारे श्र्द्धालु भक्त श्रोतागण मानस कथा का रसास्वादन कर भाव विभोर हुए |
वास्तव मे वर्तमान मे ऐसे आयोजनों की नितान्त आवश्यकता है जिससे मनोरंजन के बजाय कथा की ओर लोगों का रुझान बढेगा जो मानव को सन्मार्ग की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण कारक सिद्ध होगा |

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