नाचन वन मंडल जारी करेगा 25 जड़ी बुटियों के परमिट-
पंजीकृत ठेकेदारों के साथ-साथ स्थानीय बेरोजगारों को भी दिए जाएंगे औषधी निकालने के परमिट-
सुनामी ब्यूरो कुल्लू/मंड़ी(राजीव)-
नाचन वन मंडल इस साल क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगी जड़ी बूटियों के रख रखाव व इसके निर्यात करने के लिए परमिट जारी करेगा। यह बात वन मंडलाधिकारी टी.आर.धीमान ने कही। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जड़ी बुटियों के सरक्षण व संबर्धन हेतू यह कदम उठाया गया है ताकि पंजीकृत ठेकेदारों के साथ-साथ स्थानीय बेरोजगार भी इसका लाभ उठा सके। वनों में औषधि जैसी अमुल्य संपदा को वरकरार रखने के उद्ेश्य से नाचन वन मंडल ने नए तरीके से परमिट जारी करने का ऐलान किया है। वन मंडल अधिकारी नाचन टी.आर. धीमान ने कहा कि इससे लुप्त हो रही अमुल्य वन संपदा को खत्म होने से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही वनों में आग लगने जैसी घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकता है। टी.आर धीमान ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके उच्च अधिकारीयों के प्रयास से नाचन मंडल में जड़ी बुटियों से संबंधित प्रोजैक्ट लगाया जा रहा है जिससे यहां के स्थानीय बेरोजगारों को बड़ी मदद मिलने वाली है। गौरतलब है कि नाचन वन मंडल के अंर्तगत लगभग 20 से 25 प्रकार की ऐसी जड़ी बुटियां पाई जाती है जिन्हें कई प्रकार औषधीयां बनाने में प्रयोग किया जाता है। नाचन वन मंडल के अंर्तगत क्षेत्र में रखाल, मेहंदी, ठूठ, बिंदी फूल, डोरी घास, पोडाली, डंगतूली, जरका, तेज पत्ता, कढ़ी पत्ता, गुच्छी, बनस्का, पठान बेल मुश्कबाला जैसी कई अन्य गुणकारी औषधीयां पाई जाती है जिनकी आर्युवेद क्षेत्र में काफी मांग रहती है। इन जड़ी बुटियों की बाजार में अत्याधिक मांग व उच्च मुल्य के कारण बेरोजगार अपनी अच्छी आजीविका कमा सकते है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लोगों को इन जड़ी बुटीयों की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि लुप्त हो रही इन बहूमुल्य वन संपदा को बचाया जा सके। इन में से तेज पत्ता कढ़ी पत्ता व गुच्छी को निकाल कर बाहर के देशों में निर्यात भी किया जा रहा है। गौरतलब है इन जड़ी बुटियों में रखाल जैसी जड़ी बुटी से कैंसर जैसी बिमारियों पर काबू पाया जा सकता है।

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