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महापौर कमलजीत ,प्रीति ने दी वीर सावरकर को उनके जन्म दिवस पर श्रद्धांजलि 




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नवीन कुमार /नई दिल्ली :-दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की महापौर कमलजीत सहरावत ने आज महान देशभक्त, राजनीतिज्ञ एवं स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर जी को उनकी जन्मदिवस की 134वीं वर्षगांठ के अवसर पर लाजपत नगर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारीगण एवं अन्य प्रतिनिधिगण मौजूद थे।
महापौर कमलजीत सहरावत ने कहा कि वीर सावरकर उन स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी में आते हैं जो हर क्षेत्र में अग्रणी रहे। वे पहले भारतीय छात्र थे जिन्हें कट्टर देशभक्ति के कारण कॉलेज से निष्कासित किया गया। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने विदेशी सामान व कपड़ों की होली जलाई। वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्हें दोहरी उम्र कैद की सजा सुनाई गई। वे पहले लेखक थे जिनकी पुस्तक प्रकाशित होने से पूर्व ही ज़ब्त कर ली गई। वे प्रथम इतिहासकार थे जिन्होंने 1857 की लड़ाई को स्वतंत्रता की पहली लड़ाई बताया।
वीर सावरकर स्वतंत्रता के पश्चात् भारत को एक महान शक्तिशाली देश के रूप में देखना चाहते थे। वे एक राष्ट्र, एक भाषा एवं परस्पर एकता के सिद्धान्त के प्रबल समर्थक थे। वीर सावरकर पाश्चात्य सभ्यता की नकल करने के भी सर्वथा विरूद्ध थे।
वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप को अर्पित की गई श्रृद्धांजलि
महावीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को आज उनके जन्म दिवस के अवसर पर दिल्ली के नागरिकों की ओर से भावभीनी श्रृद्धांजलि अर्पित की गई। उत्तरी दिल्ली की महापौर, सुश्री प्रीति अग्रवाल ने आज अन्तर्राजीय बस अड्डे के समीप ऐतिहासिक कुदसिया बाग में स्थापित महाराणा प्रताप जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। इस अवसर पर सिविल लाइन क्षेत्र के उपायुक्त, श्री दीपक पुरोहित व निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
महाराणा प्रताप को भावभीनी श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए सुश्री अग्रवाल ने कहा कि वे भारतीय इतिहास की एक गौरवपूर्ण विभूति हैं। वे वीरता, बलिदान और देश भक्ति की मिसाल है। महाराणा प्रताप उन लोगों में से थे, जो संकट को चुनौती मानकर और भी दृढ़ संकल्प हो जाते हैं। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि वे अपनी जननी के दूध का मान रखेंगे और अन्तिम क्षण तक उन्होंने इस प्रतिज्ञा का पालन किया।इस अवसर पर महापौर ने यह भी कहा कि महाराणा प्रताप एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो हार कर भी जीतना जानते थे। स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने
वालों में आज भी महाराणा प्रताप का नाम सबसे ऊपर आता है।

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