बिलासपुर. सकरी-कोटा मार्ग के पेड़ों की कटाई के विरोध में विभिन्न संगठन और विभिन्न समाज के लोगों ने मुहिम शुरू कर दी है। एकजुटता के साथ हर वर्ग कटाई के विरोध में सामने आने लगा है। शनिवार

को कोटा अंचल के लोग और अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने पेड़ों काटे जाने का विरोध किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने पेड़ों की रक्षा के न्याय के लिए दिल्ली तक लड़ाई लगाने की बात कही है।

बीते कुछ दिनों से सकरी-कोटा मार्ग में सड़क चैड़ीकरण के लिए पेड़ों की कटाई के निर्णय का विरोध किया जा रहा है। रविवार को अंचल के प्रकृति प्रेमियों ने मानव श्रृंखला बनाकर कटाई का विरोध किया था। पेड़ों की कटाई नहीं रोके जाने पर जन मानस ने आंदोलन की चेतावनी भी प्रशासन को दी है। इसके बाद कोटा क्षेत्र में जन जागरूकता रैली आयोजित की गई। रैली में लोगों ने नगर भ्रमण कर कोटा एसडीओपी का कलेक्टर के नाम ज्ञान सौपा। इस रैली में डाॅ.सी.वी.रामन विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, प्राध्यापक,अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में कोटा के नागरिक शामिल हुए। इस कड़ी में अब अंचल के लोगों ने पेड़ बचाने के लिए मुहिम छेड़ दी है। आज अधिवक्ता संघ ने इस कटाई का विरोध किया। वृक्षों की वजह से भू-जल का स्तर स्थिर रहता है, और तापमान के उतार-चढ़ाव के असर से भूमि के आयतन में अंतर नहीं आता। जिससे सड़क में गढ्डे ने होते और दरारें भी नहीं आती। सड़क किनारे लगे हुए वृक्ष बेरियर का काम करते हैं। जो वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं उन्हे पलटने और गंभीर दुर्घटना से बचाते है।  मार्ग में यातायात पूर्व की तुलना में कम कम रह गया है, कारण यह है कि बिलासपुर से कोटा होकर जो वाहन मध्य प्रदेश व अन्य प्रदेशों में जाते थे। वे सभी अचानकमार टाईगर रिजर्व का रास्त बंद होने से अब दूसरे मार्ग से जाते हैं। अब मात्र कोटा-लोरमी और टाईगर रिजर्व के पर्यटकों हेतु इस मार्ग का उपयोग छोटे वाहनों के लिए होता है। प्रस्तावित सड़क की डिजाइन में सड़क किनारे में समस्त वृक्ष मुख्य सड़क के बाद दूसरे सोल्डर यानी बाहरी सोल्डर में आ रहे हैं। अतः इनको कटने से बचाया जा सकता।

क्षेत्र का हर व्यक्ति इन पेड़ों का कर्जदार

अधिवक्ता संघ सदस्य आक्रोश त्रिवेदी का कहना है कि क्षेत्र का हर व्यक्ति न पेड़ों का कर्जदार है। यदि हमें इन पेड़ों की जान नहीं बचा सके तो प्रकृति अपने अनुसार प्रत्येक मनुष्य से बदला लेगी। इसलिए हमें एकजुट होकर इनकी जान बचाना चाहिए। सरकार भी जिम्मेदारी है कि वे इस विषय पर संवेदनशीलता से विचार करें।

बीच का रास्ता निकालें प्रशासन

अधिवक्ता संघ के सचिव सुनील साहू का कहना है कि इन पेड़ों में बहुत से पेड़ दुर्लभ हैं, जिसका सभी आयुर्वेद और औषधीय महत्व है। इसके साथ धार्मिक महत्व के भी पेड़ है। लिहाजा इन पेड़ों को नहीं काटा जाना चाहिए। प्रशासन  कोई बीच का रास्ता निकालकर काम करें।

ईमानदारी से लगाएं जाएं पौधे

अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष सतीष जोशी ने पेड़ों की कटाई को गलत ठहराते हुए कहा कि यदि पेड़ को काटा जाना बेहद जरूरी है तो काटे जाने से ठीक पीछे ईमानदारी से पौधों लगाएं जाएं। यह भी सुनिश्चित किया जाए की दूसरी बार लगाए गए पौधे जीवित है। इसके बाद ही पुराने पेड़ों को काटा जाना चाहिए, भले ही इसके लिए 2 साल इंतजार करना पड़े।

पौधें लगाने के लिए भी बनेगी मानव श्रृंखला

कांग्रेस नेता का कहना है आदित्य दीक्षित का कहना है कि ऐसा नहीं है कि हम पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे है। कोटा अंचल के लोग पेड़ लगाने के लिए भी बेहद गंभीर है।इसलिए यह फैसला लिया गया है कि जिस तरह से पेड़ों की कटाई रोकने के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई थी। जुलाई-अगस्त के महिने में पौधें लगाने के लिए भी मानव श्रृंखला बनाई जाएगी।

भावी पीढ़ी को होगी संकट में

कोटा निवासी हरिश लाल ने कहा कि पेड़ों की सुरक्षा करना हर व्यक्ति का धर्म है, जिस तरह से वर्तमान में पेड़ों की कटाई हो रही हैं उससे यह स्पष्ट है कि हमारे आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के क्षेत्र में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। आने वाला समय प्रदूषण युक्त हो जाएगा। जिससे अपने बीमारी पसरेगी। हर व्यक्ति का कतव्र्य है कि वे पेड़ों को कटने से रोंके।

स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है वृक्षों को होना

कोटा के चिकित्सक डाॅ. राम अग्रवाल ने कहा कि वृक्षों हमें आक्सीजन प्राप्त होती है साथ ही साथ स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण को बचाए रखना आवश्यक है। इनमें हमें छांव एवं फल मिला है जो स्वास्थ्य के लिए फायदेंमंद है। जब भी मानव समाज पर संकट आता है कि तो समाज के जिम्मेदार लोग ही एक होकर इस संकट से सभी को बाहर निकालते हैं। कोटा क्षेत्र आज इसी दौर गुजर रहा है। पेड़ों का काटा जाना पूरे मानव समाज के लिए घातक हैं। यही कारण है कि अब लोग खुद ही पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं।

सिर्फ सरकारी निर्भरता से नहीं हो सकत

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