नवीन कुमार :-पत्रकारों के हितों के लिए एक संस्था का गठन 20 दिसंबर 1957 को हुआ।  इसकी अध्यक्षता उस समय के नाम चीन पत्रकार श्री दुर्गा दास ने की थी. प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के प्रथम अध्यक्ष भी वही थे, उस समय से लेकर आज तक  तय किये गए सिद्धांतो पर ही  प्रेस क्लब   चलता आ रहा है मकसद एक ही है की पत्रकार अपने कर्तव्य को जिम्मेवारी के साथ निभाता रहे और यदि कोई अड़चन, मुसीबत  आये तो पत्रकारों को  उसकी लड़ाई में प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ढाल की तरह पत्रकार के हितों की रक्षा के लिए हर समय उसके साथ खड़ा रहे,  दौर कैसा भी रहा हो पत्रकार हमेशा संघर्ष करता मिला है और भविष्य में भी शायद करता रहेगा पत्रकारों को अपने हितों के लिए सरकार चाहे वो  किसी की भी हो दो चार होना पड़ता रहा है वजह एक साफ़ यही है पत्रकार निष्पक्ष रहता है जो किसी भी सरकार  के लिए आँख की किरकिरी बनता ही रहता है लेकिन पत्रकार अपनी कलम को हमेशा सही दिशा में चलाता ही रहता है यही वजह है की प्रेस को अपनी लड़ाई लड़ते देखा जाता है  पत्रकार को समाज आदर सम्मान देता है लिहाजा पत्रकार की जिम्मेवारी बनती है की वो अपनी लेखनी और कलम पर आंच न आने दे ऐसे में पत्रकार अपना सुख दुःख की लड़ाई के लिए हमेशा संघर्ष करते दिखते है सच को पढ़ाने  और दिखाने  की जद्दोजहद  में पत्रकार आँखों में रड़कने  भी लगता है लेकिन पत्रकार को इससे कोई सरोकार नहीं होता उसका काम है समाज को सही मार्गदर्शन कराना इसके अलावा दूसरा कोई उदेश्य पत्रकार का नहीं होता है इन्ही सब बातो को  ध्यान में रखकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया  का गठन किया गया था जो आज भी अपने दम पर संघर्ष करता दिख रहा है  सभी पत्रकार यही चाहते है पत्रकार की कलम कभी समझौते के साथ बिके ना जब कभी भी मुसीबत इस तरह की पत्रकारों के साथ आयी प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पत्रकारों के साथ एकजुट नजर आया बात कुछ वर्ष पहले की है जब प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सरकार के भुगतानों तले दब  गया था करीब 1 करोड़ का भुगतान प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के ऊपर चढ़ गया था एक पत्रकार के गैर जिम्मेदाराना और लापरवाही के कारण प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया बदनाम हो गया था प्रेस क्लब की छवि इतनी दागदार हो गयी थी की कोई भी नामचीन पत्रकार यहाँ  आना और इससे जुड़ना पसंद नहीं कर रहा था ये बात है साल 2009 और 2010 की उस समय पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ (सेक्रेटरी जनरल ) हुआ करते थे जिसने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को अपनी जागीर मान लिया था और प्रेस क्लब  शून्य की और पहुंच गया  था प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की थू थू होने लगी थी आखिरकार ये सब होने के बाद प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के  आरोपी पुष्पेंदर कुलश्रेष्ठ को वर्ष 2010 में होने वाले चुनाव में बुरी तरह मुँह की  हार  खानी पड़ी इसके बाद आरोपी पुष्पेंदर कुलश्रेष्ठ पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया से इनकी मान्यता हमेशा के लिए रदद कर दी इस घटना के तीन चार वर्ष बाद धीरे धीरे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को अपनी साख बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ी जिसके परिणाम स्वरूप आज प्रेस क्लब आफ इंडिया में भिन्न भिन्न तरह के समाज से जुड़े कार्यक्रम बड़ी तादाद में आयोजित किये जाते है प्रतिष्ठित परिवार और पत्रकार की संख्या सैकड़ों में देखी  जाती है आज वर्तमान में कुल 3600 पत्रकार इसके अलावा 1000 गैर पत्रकार इस क्लब के एक्टिव मेंबर है नियम भी इतने सख्त कर दिए गए है की कोई भी धांधली होने के कोई चांस नहीं है कोई भी पत्रकार नियम से अलग होने की कोशिश करता है या गलत पाया जाता  है तो प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया उसे संस्था से तुरंत हटा देती है इस काम के लिए 21 लोगों की नामचीन पत्रकारों की मैनेजिंग कमेटी है जो ये भी तय करती है की प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया का कौन पत्रकार मेंबर होगा या नहीं आप को बता दे दे की आज भी फिलहाल  प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया किराये पर ही है गौरतलब है कि जब साल 2002 में  अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने दिल्ली में शास्त्री भवन के सामने राजेंदर प्रसाद रोड पर   जमीन प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के नाम आवंटित की थी जिसका समस्त भुगतान सभी पत्रकारों ने मिलकर वर्ष 2015 में  सरकार  को कर दिया था  लेकिन अभी तक वो जमीन प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया को सुपुर्द नहीं की गयी है प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया का एक ही उद्देश्य है की कोई भी सही खबर जो समाज  के हित के लिए सर्वोपरि हो हर हाल में आप तक पहुंचे कई बार प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को इस बात के लिए भी लेकर चर्चा होती है की यहाँ खबरे तय की जाती है की सत्ता या विपक्षी को   लेकर जबकि प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया का ऐसा कोई उदेश्य ना कभी पहले था और न रहेगा  ये केवल प्रेस क्लब को बदनाम करने की कोशिश रहती है चंद  लोगों  की उनके मंसूबो को प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया कभी पूरे नहीं होने देंगी

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