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आकाशवाणी महानिदेशालय के दोगले नियम से मचा बवाल इसके अमानवीय कृत्य हुए जगजाहिर 




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नवीन कुमार /नई दिल्ली :-आकाशवाणी की स्थापना के बाद इस संस्थान में प्रसारण हेतु व्यक्तियों का चुनाव या पोस्टिंग की गई जो नियमित कर्मी की श्रेणी में आती है ।इन मे आकाशवाणी से आवाज के प्रसारण हेतु उद्घोषक , कंपेयर मुख्य पद है ।इसी प्रसारण श्रेणी में ट्रेक्स और पैक्स की भी भूमिका है ।उद्घोषकों के नियमित लोगों की भारी कमी के चलते एक निर्णय के अनुसार उद्घोषक की समान सेवा पर आधारित कैजुअल उद्घोषक/प्रस्तोताओं के पद सृजित किया गया जिस के अनुसार हर केंद्र पर नियमित उद्घोषक की आवश्यकता साथ 3 गुना तक कैजुअल उद्घोषकों का पैनल बनाया गया जो सतत 20-30  वर्षो से जारी है ।इसी पैनल में निदेशालय ने मनमानी करते हुए भर्तियां  आरंभ की और इन अनियमित लोगों को माह में कम से कम 6 ड्यूटी से भी कम डयूटी देना शुरू कर दिया ।ज्ञात हो कि निदेशालय की घोर अनियमितताओं और अपने अकाशवाणी में किये गए 20 से 25 वषों को आधार बना कर नियमितीकरण की मांग उठाई गई जो न केवल दिल्ली अपितु इलाहाबाद, पटना, एर्नाकुलम आदि कैट ने स्वीकार कर के उद्घोषकों के दावे को उचित माना ।विशेष कर एर्नाकुलम बेंच में आकाशवाणी महानिदेशालय को आदेश जारी कर के कहा कि इन उद्घोषकों का एक पालिसी के अंतर्गत  नियमितीकरण किया जाये ।ऑल इंडिया रेडियो केजुअल अनाउंसर एंड कम्पीयर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरी कृष्ण शर्मा एवं उपाध्यक्ष ने बताया कि इससे पहले तीन बार  हम जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर चुके है संसद में भी तीन बार आकाशवाणी में हो रहे इस मनमाने रैवये पर भी सवाल उठाये गए है की क्यों आकाशवाणी अपने गैर जिम्मेदाराना रवैये को सुधारता क्यों नहीं है पूर्व में कोर्ट के निर्देश पर प्रसार भारती के दूरदर्शन केंद्रों पर एक नियमितीकरण पॉलिसी के तहत 233 केजुअल प्रोडक्शन असिस्टेंट, म्यूजिशियन कारपेंटर आदि को नियमित किया और सिर्फ आकाशवाणी के उद्घोषक और कम्पियर्स को छोड़ दिया।इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने भी आदेश दिये है और अब ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचारधीन है जो महानिदेशालय की आंख में खटक रही है ।इसी याचिका में शामिल लोगों और इन जैसे देश भर में  लगभग 4 हजार लोगों को एक षड्यंत्र के तहत री स्क्रीनिंग के नाम पर बाहर निकालने की नीति बनाई गई है ।विभाग पर 50 से अधिक मुकदमे चल रहे हैं ।महिला उत्पीड़न से संबंधित एक जन हित याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में भी लंबित है । डयूटी लगाने या न लगाने हेतु महिला उत्पीड़न इन अधिकारियों का मुख्य अस्त्र है ऐसी घटनाएं राजधानी दिल्ली , हरियाणा, हिमाचल, उत्तरप्रदेश आदि राज्यो में हुई है ।इन जगहों पर शिकायतकर्ता कि या तो डयूटी ही बंद कर दी गई या शिकायतकर्ता जिन कार्यक्रमों के लिये काम कर रहे थे , वो कायर्क्रम ही बंद कर दिये। ये भी देखा गया है कि इस विभाग में अधिक संख्या में महिलाओं को भरती करने की उत्सुकता रहती है ताकि उन का शोषण किया जा सके ।ज्ञात सूत्रों के अनुसारइस प्रकार की घटनाएं कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली एफ एम गोल्ड में भी घट चुकी हैं जहां न केवल पुरुष अपितु महिला अधिकारियों ने भी कैजुअल कर्मियों को प्रताड़न दी थी ।ज्ञात हो कि वर्तमान में आननफानन में लिये निर्णय मेंमें पहले से पास हो कर नियुक्त हुए उद्घोषकों और प्रस्तोताओं को दोबारा लिखित परीक्षा , साक्षात्कार और स्वर परीक्षण के लिये बाध्य किया जा रहा है ।तर्क ये दिया जा रहा है कि उम्र बढ़ने पर आवाज की  क़्वालिटी खराब हो जाती है ।अब सवाल ये है कि वॉइस क्वालिटी केवल कैज़ुअल उद्घोषक की ही क्यों खराब हो जाती है ।नियमित उद्घोषक और नियमित ट्रेक्स और पैक्स जिन की आवाजें भी ऑन एयर जाती है उन की वॉइस क्वालिटी 60 साल तक क्यों खराब नही होती , उन का दोबारा टेस्ट क्यों नही लिया जाता ?गौरतलब है कि   केजुअल दूरदर्शन एंकर, AIR न्यूज रीडर आदि की भी नहीं होती रिस्क्रिनिंग ।देश मे ये पहला मामला है कि जहां 50-55 साल की उम्र में दोबारा लिखित परीक्षा , साक्षात्कार और स्वर परीक्षण किया जा रहा है ताकि इन्हें फेल कर के बाहर किया जाये ।अन्य विभागों में इस उम्र में ऐच्छिक आधार पर प्रमोशन के लिये परीक्षा ली जाती है जब कि यहाँ निष्कासन लिये ।प्रशासन संभाल रहे अधिकारियों की कार्य क्षमता पर भी बढ़ती उम्र का फर्क पड़ता होगा तो क्यों नही उनका दोबारा टेस्ट SSC/UPSC से करवा लिया जाय ।(ज्ञात हो कि इस विभाग से रिटायर हो रहे केंद्र निदेशक, ट्रेक्स , पैक्स और नियमित उद्घोषकों को दोबारा कैजुअल डयूटी पर हर महीने 29 दिन 700 ₹ प्रति दिन के आधार पर बुलाया जा रहा है जहां ये लोग 40 हजार पेंशन के साथ 20 हजार रुपये महीना राशि का आनंद ले रहे है ।इनमे से कई लोगों की उम्र 70-75  साल से अधिक हो चुकी है )यहां एक और तथ्य उभर कर आया है कि इस विभाग के स्थायी कर्मी और अधिकारी कैजुअल कर्मियों को हेय दृष्टि से देखते हुए ये तक कह जाते है कि आप तो कैजुअल हो आप का नियमित होने का कोई अधिकार नही है ।यानी ये अधिकारी ही किसी विशेष प्रयोगशाला से उतरे है ।इस प्रकार की दुर्भावनाएं इन अधिकारियों के मन मे किस ने भरी है , ये जांच का विषय है ।क्या कभी किसी कैज़ुअल कर्मी ने सरकार/यूपीएससी/एस एस सी  से ये कहा है कि आप इन अधिकारियों को विभाग में भर्ती न करें या विभाग से निकाल दें ।यानी ये केवल हम कैज़ुअल कर्मी है जिन पर नैपकिन की तरह यूज़ एंड थ्रो का फार्मूला लागू होता हैउपरोक्त मानसिकता का प्रसार देश के एक श्रेष्ठ विभाग में होना निंदनीय है , अमानवीय और असहिष्णु की श्रेणी में आता है ।उपरोक्त ऑडिशन में हास्यपद बात ये है कि  इस तानाशाह विभाग ने एंट्री की उम्र को पचास साल रखा है ।उपरोक्त नादिरशाही और ताना शाही से त्रस्त हम सब इस का विरोध करते है ।सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में स्टेटस को और देश की 17 में से 12 कैट बेंच और 2 हाई कोर्ट ने महानिदेशालय के इस आदेश पर स्टे और स्टेटस को लागू किया है ।जालंधर पंजाब , दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित देश के सभी राज्यो से 1000 से अधिक लोग कोर्ट की शरण मे जा चुके है ।आज भी दिल्ली अकाशवाणी के सभी केंद्रों एफ एम गोल्ड और रेनबो के कर्मी 150 से अधिक की संख्या में कैट में न्याय मांगने के लिये गए हैं।ज्ञात हो कि 10 जुलाई को कैट प्रिंसिपल बेंच ने देश के 7 राज्यो के हक में स्टे दिया है ताकि इन राज्यो में तैनात कर्मी इस प्रक्रिया के तहत कोई भी परीक्षा देने से मुक्त है ।पर निदेशालय है कि न वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानता है ना हाइ कोर्ट के फैसले को और न ही कैट के फैसले को ।।प्राप्त सूचनाओं के अनुसार अभी तक देश के विभिन्न केंद्रों से 300 से अधिक लोगों का नाम आकाशवाणी पैनेल से काट कर बाहर का रास्ता दिखा दिया है ।इस ताना शाही का विरोध करते हुए हिसार के कर्मी भूख हड़ताल पर भी बैठे थे जहाँ कुछ लोगों की जान पर बन आई थी जिन्हें स्थानीय जिला प्रशासन ने हस्पताल में भर्ती कराया ।इन सब पर आंख मूंद कर आकाशवाणी महानिदेशक ने हिसार में स्थानीय प्रशासन का सहारा लिया धारा 144 लागू कर , पुराने और नए कर्मियों का लिखित इम्तहान लिया ।।इंतहा है जुल्म की ।और ये जुल्म और इस कि खबर प्रधानमंत्री, प्रसारण मंत्री , अध्यक्ष प्रसार भारती और सीईओ प्रसार भारती को है ।( प्रसार भारती के नए कार्यालय में मृतप्राय 1 अरब के पत्थर लगा दिये ।जीवंत प्राणियों के जीवन की चिंता किसी को नही है  )देश भर में प्रसार भारती और आकाशवाणी निदेशालय की ज्यादतियां चल रही है ।

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