.लेह लद्दाख में प्रेस कल्ब ने किया विशिष्ट कला संगम को सम्मानित-
हिमालय में पर्यावरण की अलख जगाने में कला संगम का विशेष योगदान-
गीतों व नाटी के माध्यम से किया जागरूक, किशन लाल ने किया सम्मानित-
सुनामी ब्यूरो राजीव(कुल्लू/मंडी)-
प्रेस क्लब ऑफ कुल्लू द्वारा ग्रीन हिमालय क्लीन हिमालय अभियान जारी है। इस अभियान में कुल्लू से लेकर लेह लद्दाख तक दर्जनों संस्थाएं प्रेस क्लब ऑफ कुल्लू के साथ जुड़ गई है। चाहे नदियों को बचाने की बात हो या फिर हिमालय के पर्यावरण को इसके लिए स्थानीय विभिन्न संस्थाओं का क्लब को सहयोग मिल रहा है। इसी कड़ी में लेह लद्दाख में प्रेस क्लब ऑफ कुल्लू ने विशिष्ट कला संगम मनाली को पर्यावरण के क्षेत्र में अलख जगाने के लिए सम्मानित किया है। यह सम्मान प्रेस क्लब ऑफ कुल्लू के ब्रैंड एवेंसडर किशन लाल ठाकुर द्वारा दिया गया। यह कला संगम अपनी पुरातन वेशभूषा में नाटी व गीतों के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहा है। लेह लद्दाख में उक्त कला संगम ने विभिन्न कार्यक्रम पेश करके वहां के स्थानीय लोगों व पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का कार्य किया है। इस दौरान लेह लद्दाख में कुल्लवी नाटी की भी धूम रही। इस दौरान संगम के कलाकारों ने दुई टांकी तोसा चार टांकी रौई, अपना हिमाचल और लद्दाख हरा भरा बनाणा आदि गीतों से लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। वहीं, स्वच्छता अभियान के बारे भी जागरूक किया। इसके अलावा बेटी लागी नौचदी ढालपुरा शाढ़ा गीत गाकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बेटी है अनमोल का संदेश लेह लद्दाखवासियों को दिया। संगम के ग्रुप लीडर बालक राम ने बताया कि यह गु्रप लेह लद्दाख, जम्मू कश्मीर से लेकर हिंदूस्तान के कोने-कोने में अंडेमान निकोबार में अपनी कुल्लवी नाटी की छाप छोड़ चुका है। ग्रुप में बालक राम, पूनम ठाकुर, नीशा ठाकुर, गुंजन ठाकुर, सलोनी महंत, दिशा ठाकुर, निखिल, शुभम, अमन, हरी चंद, टिकम राम, मेहर चंद, गोविंद आदि शामिल हैं। प्रेस क्लब के प्रधान धनेश गौतम ने बताया कि हिमालय के संरक्षण के लिए यह बीड़ा उठाया गया है और पूरे हिमालय क्षेत्र की संस्थाओं को हिमालय के पर्यावरण व नदियों के संरक्षण के बारे में जागरूक किया जा रहा है ताकि वहीं की स्थानीय संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्र में नदी नालों को संरक्षित रख सके और पर्यावरण के लिए तमाम कार्य कर सकें। उन्होंने बताया कि इस कार्य में क्लब के बै्रंड एवैंसडर किशन लाल व नन्हीं पर्यावरण विद कल्पना ठाकुर का उन्हें बेहद सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब हिमालय के ताज को ऑक्सीजन मिलेगी तो पूरा हिमालय स्वस्थ रहेगा। हिमालय एशिया का टैंक ऑफ वाटर है। यहां के ग्लेशियरों से दुनिया के कई देश सिंचित होते हैं और यहां का पर्यावरण बिगड़ा तो मनुष्य का जीवन संभव नहीं है। इसलिए सभी संस्थाओं व आम लोगों को यहां के पर्यावरण बचाने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

 

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