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उपराज्यपाल से की हस्तक्षेप करने की मांग:महापौर प्रीति अग्रवाल 




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नवीन कुमार /नई दिल्ली :-उत्तरी दिल्ली की महापौर सुश्री प्रीति अग्रवाल ने आज दिल्ली के उपराज्यपाल, श्री अनिल बैजल से उनके कार्यालय में मुलाकात कर उत्तरी दिल्ली के क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन को अधिसूचित करने संबंधी मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की। इस अवसर पर निगमायुक्त, श्री प्रवीण गुप्ता भी मौजूद थे।महापौर ने उपराज्यपाल श्री बैजल को उत्तरी दिल्ली नगर निगम की वर्तमान स्थिति के संबंध में जायजा देते हुए कहा कि निगम की नयी सभा का गठन दो महीने पूर्व किया गया था लेकिन अब तक कोई भी कार्य सुचारू रूप से प्रारंभ नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि निगम के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए निगम की वैधानिक समितियों का गठन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रों की अधिसूचना के अभाव में उत्तरी दिल्ली नगर निगम अपने विकास कार्य आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं है।सुश्री प्रीति अग्रवाल ने उपराज्यपाल महोदय से कहा कि क्षेत्रों की अधिसूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसमें उनके तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है ताकि दिल्ली के नागरिक उन्हें मिलने वाली नागरिक सुविधाओं से वंचित न हो और निगम का कार्य सुचारू रूप से चल सके। उन्होंने कहा कि इससे वार्डों के परिसीमन के बाद उत्पन्न हुई कुछ विसंगतियां भी दूर हो जाएंगी। उन्होंने कुछ विधानसभा क्षेत्रों को जो कि दो क्षेत्रों में विभाजित हुए है उसका उदाहरण देकर समझाया जो इस प्रकार है-

 1- बवाना विधान सभा क्षेत्र- वार्डों की संख्या 6 है, जिसमें दो वार्ड नरेला क्षेत्र और 4 वार्ड रोहिणी  क्षेत्र में आ रहे है।

 2- करोलबाग विधानसभा क्षेत्र- वार्डों की संख्या 3 है जिसमें से 2 वार्ड करोलबाग क्षेत्र और 1 वार्ड सदर पहाड़गंज क्षेत्र में आ रहा है।

 3- बल्लीमारन विधानसभा क्षेत्र- वार्डों की संख्या 3 है जिसमें से 2 वार्ड सदर पहाड़गंज क्षेत्र और 1 वार्ड शहरी क्षेत्र में आ रहा है।

 4- चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र – वार्डों की संख्या 3 है जिसमें से 2 वार्ड शहरी क्षेत्र और 1 वार्ड सिविल लाइन क्षेत्र में आ रहा है।महापौर ने कहा कि इसी प्रकार सिविल लाइल क्षेत्र व रोहिणी क्षेत्र में क्रमशः 29 और 35 वार्ड है, जहां कार्य करने के लिए एक क्षेत्रीय उपायुक्त और उनका सहयोगी स्टॉफ पर्याप्त नहीं है। बेहतर प्रशासन हेतु दो क्षेत्रों को तीन क्षेत्रों में पुर्नगठित करना आवश्यक है। हालांकि अतिरिक्त क्षेत्र केशवपुरम का प्रस्ताव करने से पहले ये पूरा ध्यान रखा गया है कि इससे निगम को किसी भी प्रकार का वित्तीय बोझ न पड़े। इसलिए सदर पहाड़गंज क्षेत्र और शहरी क्षेत्र के विलय की सलाह भी दी गई है ताकि बचे हुए एक क्षेत्र के कर्मचारियों का उपयोग नये क्षेत्र में किया जा सके।  महापौर ने प्रस्तावित क्षेत्रवार वार्ड का विवरण भी संलग्न करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर तत्काल उपराज्यपाल महोदय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है ताकि निगम दिल्ली के नागरिकों की सेवा करने हेतु बेहतर स्थिति में हो। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल महोदय, दिये गए विवरण से काफी संतुष्ट थे चूंकि यह बेहतर प्रशासन और नागरिकों के हित में है। सुश्री अग्रवाल ने कहा कि क्षेत्रीय सीमाओं के पुर्नगठन की अधिसूचना के संबंध में एक सप्ताह के भीतर यदि कुछ स्पष्ट नहीं होता है तो यह मामला न्यायालय में ले जाया जाएगा। महापौर ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर क्षेत्रीय सीमाओं की अधिसूचना के संबंध में फाइल को मंजूरी नहीं दी गई तो हम न्यायालय में मामला ले जाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार दलगत राजनीति से उपर नहीं उठ रही है जिसके कारण निगम को कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वार्ड की सीमाओं को अधिसूचित करने का प्रस्ताव खारिज करने के लिए उनके पास कोई भी एसा महत्वपूर्ण कारण नहीं है लेकिन इसके अधिसूचित नहीं होने से नागरिक भी अपने वार्ड को लेकर असमंजस की स्थिति में है। महापौर ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव क्षेत्र के संतुलन व नागरिकों के कार्यों में आसानी के लिए बनाया गया है।

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