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मृत सफ़ाई कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख मुवावज़ा दे सरकार: स्वराज इंडिया 




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नवीन कुमार नई दिल्ली :-दिल्ली में पिछले 37 दिनों में सीवर के अंदर दस सफ़ाई कर्मियों की दुखद मौत हो चुकी है। बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर के अंदर जाने से और ज़हरीली गैस के कारण इतने बेकसूर ग़रीब लोग जान गंवा बैठे। इन सभी दर्दनाक मौतों की मुख्य वजह सरकारी लापरवाही और नियम कानूनों का उल्लंघन पाया गया है। नवगठित राजनीतिक पार्टी ने दिल्ली सरकार के अपने ही किये वादे के मुताबिक मृत सफ़ाई कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख मुवावज़े की मांग की है। साथ ही, सीवर सफ़ाई के काम का पूर्ण मशीनीकरण करने की भी बात कही है। पार्टी ने मांग किया है कि जब तक पूर्ण मशीनीकारण न हो किसी भी सफ़ाई कर्मी को बिना उचित सुरक्षा उपायों के सीवर के अंदर न जाने दिया जाए। और ये काम भी ठेका प्रथा ख़त्म कर नियमित सरकारी कर्मचारियों द्वारा ही करवाये जाएं।ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटनाएं आज पहली बार हो रही हैं। सरकारी लापरवाही के कारण सीवर लाईन के अंदर सफ़ाई कर्मियों की मौत निरंतर होती रहती हैं। फ़र्क़ बस ये है कि इस बार ये ख़बरें टीवी अख़बारों में आ रही हैं। इसलिए आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार और अन्य पार्टियां भी घड़ियाली आँसू बहाने में लगे हैं। एलजी और मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाने की कोशिश की है। जिसके बाद अब कई घोषणाएं भी हो रही हैं। लेकिन सच ये है कि सरकार अपने खुद के किये वादे और न्यूनतम ज़िम्मेदारियों से भागती रही है। दिल्ली के सभी सीवर लाईन दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत आते हैं, जिसकी ज़िम्मेदारी सीधे तौर पर दिल्ली सरकार की बनती है। लेकिन ऐसे हर मामले में सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि मृत सफ़ाई कर्मी उनके अपने कर्मचारी नहीं थे, ठेके पर काम कर रहे थे। हर मौत के बाद एक जाँच बिठा दी जाती है जिसका एकमात्र उद्देश्य ठीकड़ा फोड़ने के लिए कोई सर ढूंढना रहता है। ज्ञात हो कि 25 मई 2016 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सीवर की सफ़ाई में लगे कर्मियों के संबंध में एक अहम फैसला दिया था। नेशनल कैम्पेन फॉर डिग्निटी ऐंड राइट्स ऑफ सीवरेज ऐंड एलाइड वर्कर्स के इस मामले में अदालत ने दिल्ली सरकार के अधीन जल बोर्ड के सीईओ को सीवर सफ़ाई कर्मचारियों के लिए हर हाल में सुरक्षा उपकरण सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया था।स्वराज इंडिया के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनुपम ने लगातार हो रही इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा, “आम आदमी पार्टी ने चुनाव पूर्व ये वादा किया था कि वो सफ़ाई कर्मचारियों में ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह से ख़त्म कर देगी। लेकिन घोषणापत्र में वादा करने के बाद आज दिल्ली सरकार सीवर की सफ़ाई जैसे जानलेवा काम भी ठेकेदारों को ही दे रही है। इसका नतीजा यह है कि बिना उचित सुरक्षा उपायों के, बिना बीमा, मास्क, बेल्ट या सीढ़ी के मज़दूरों को सीवर लाईन के अंदर उतार दिया जाता है। और जब कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो जाये तो सरकार उन्हीं ठेकेदारों पर ठीकड़ा फोड़कर अपना पल्ला झाड़ लेती है।” 2014 में माननीय उच्चत्तम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सीवर लाईन के अंदर होने वाली इन सभी मौत में 10 लाख रुपये मुवावज़े के रूप में दिया जाए। लेकिन 10 अगस्त 2017 को लोकसभा के अंदर एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत ने बताया कि राजधानी दिल्ली में दस में से सिर्फ़ एक मामले में ही पूर्ण मुवावज़ा दिया गया है। वैसे तो आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में यह लिखित वादा किया था कि जान गंवाने वाले सफ़ाई कर्मचारियों को मुवावज़े के तौर पर 50 लाख रुपये दिया जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि मैला ढोने या मेहतरी जैसे अमानवीय काम पर सन 1993 से ही कानूनन प्रतिबंध होने के बावजूद आज भी यह कुप्रथा व्याप्त है। भले ही इसपर कानूनन रोक है लेकिन परोक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सरकार ही मेनुअल स्कैवेंजिंग करवा रही है। सभ्य समाज के लिए शर्मनाक होने के साथ साथ ये सरकार की असफ़लता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का सबसे बड़ा परिचायक है। स्वराज इंडिया ने मानवता और न्याय के लिए इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की घोषणा की है। पार्टी ने मांग किया है कि:

• पिछले सभी दस मृतक आश्रितों को एक महीने के अंदर दिल्ली सरकार वादे के मुताबिक 50 लाख का मुवावज़ा दे।

• सीवर के काम का पूर्ण मशीनीकरण करने की सरकार रूपरेखा पेश करे ताकि मेनुअल स्कैवेंजिंग पर रोक लगे।
• जब तक कि पूर्ण मशीनीकरण न हो जाए किसी भी सफ़ाई कर्मी को बिना उचित सुरक्षा उपाय के सीवर के अंदर ना जाने दिया जाए।
• सीवर सफ़ाई के सारे काम नियमित सरकारी कर्मचारियों द्वारा कराए जाएं। ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह से ख़त्म हो।
• सीवर सफ़ाई कर्मचारियों को स्वच्छ भारत सेनानी का दर्जा दिया जाए।

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