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अच्छा इंसान बनाने की जिम्मेदारी प्राइमरी टीचर की है – महापौर कमलजीत सहरावत 




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नवीन कुमार /नई दिल्ली :-द.दि.न.नि ने आज देश के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षक दिवस का आयोजन किया गया  जिसमें शिक्षकों की उल्लेखनीय सेवाओं की सराहना की गई। निगम के स्कूलों के 35 शिक्षकों को महापौर कमलजीत सहरावत ने शिक्षक सम्मान प्रदान किये जिसमें 10,000रु. नकद स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र शामिल हैं। 35 शिक्षकों में 6 प्रधानाचार्य 2 नर्सरी शिक्षक और संगीत शिक्षक शामिल है  इन शिक्षकों में से एक प्रधानाचार्य और तीन शिक्षको  को दिल्ली राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए भी चुना गया है। ये पुरस्कार शिक्षकों की उपलब्धि उल्लेखनीय योगदान अनुकरणीय व्यवहार और नवीन पहल के लिए दिया जाता है। समारोह की अध्यक्षता शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री सुनील सहदेव ने की जबकि महापौर ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उपमहापौर कैलाश सांकला स्थायी समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता सदन की नेता शिखा रॉय  शिक्षा समिति की उपाध्यक्ष आरती सिंह कई पार्षद और अपर आयुक्त तथा शिक्षा निदेशक मीता सिंह भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम में विषय आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम की धूम रही।महापौर श्रीमती सहरावत ने कहा कि हम सभी 581 विद्यालयों को उत्तम बनाना चाहते हैं। उन्होंने सभी उपनिदेशकों से कहा कि वे हर स्कूल की अलग अलग जरूरतों की सूची बनायें ताकि हम समुचित प्रावधान कर सकें। उन्होंने  कहा कि अगले वर्ष निगम स्कूल के बच्चों की ड्रैस बदल जाएगी। उनकी नीली ड्रैस के स्थान पर स्मार्ट ड्रैस होगी। महापौर ने कहा कि शिक्षक होना गर्व की बात है और शिक्षकों को यह गर्व महसूस करना चाहिए। महापौर ने कहा कि बाल दिवस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए हर जोन को उनके फंड में से एक एक लाख रु. दिये जा रहे हैं। इसी तरह कार्यक्रम में  सर्वश्रेठ प्रदर्शन करने वाले तीन स्कूल को भी एक एक लाख रु मिलेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को अच्छा इंसान बनाने की जिम्मेदारी निभाते हैं क्योंकि 12 वर्ष से पहले की उम्र में सीखी गई और पढ़ी गई बातें जीवन भर काम आती है । शिक्षक सही मायने में बच्चों के लिए आदर्श होते है । महापौर ने कहा कि वह भी शिक्षक रही है  और उन्ही के समुदाय से संबंध रखती है इसलिए शिक्षक की छवि और व्यवहार अनुकरणीय होना चाहिए ताकि बच्चे कुछ सीख सकें। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक को अपनी पहचान छोड़नी नहीं चाहिए और बच्चों के भविष्य निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शिक्षक चुनौतियों को अवसरों में बदलने का कठिन काम करते हैं। वे लोग खुश नसीब होते जो शिक्षक होते हैं क्योंकि उन्हें नेक काम सौंपा जाता है। ऐसे कार्य से राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण की प्रक्रिया में गति आती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों के शिक्षण स्तर में  हो रही प्रगति की पल पल की जानकारी होती है। महापौर ने इस अवसर पर निगम के शिक्षा विभाग के सपनों और उपलब्धियों तथा सम्मानित शिक्षकों  के विवरण पर आधारित अनुभूति पुस्तिका का भी लोकार्पण किया। उपमहापौर कैलाश सांकला ने कहा कि गुरूओं का सम्मान करना हमारी पुरानी परंपरा रही है। श्री सांकला ने कहा कि भारत को विश्व गुरू बनाने में शिक्षकों का सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि वे बच्चों को प्रेरित कर सकते हैं। स्थायी समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षक अपनी मेहनत निष्ठा और ईमानदारी से सबके लिए मिसाल बनते हैं। उन्होंने निगम विद्यालय में दाखिलों में  आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की। दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में प्राइमरी कक्षाएं शुरू कर दी हैं। हम 8वीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करने में सक्षम है  और हमें अपने स्कूलों का दर्जा 8 वीं कक्षा तक करना होगा। सदन की नेता शिखा रॉय  ने कहा कि हमारा निगम सभी स्कूलों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे और  शिक्षा के स्तर को सुधार रहा है। अगर स्कूल की ख्याति बढ़ती है तो देश को दिशा मिलती है। अपर आयुक्त और शिक्षा निदेशक मीता सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिवर्तन करने के लिए महापौर ने खुली छूट दे रखी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम हर स्कूल को माडल  स्कूल के रूप में विकसित करना चाहते हैं।

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