सुजीत मिश्रा(सिट्टी)/प्रदेश प्रमुख

उत्तर प्रदेश में नए राजनैतिक काल का उदभव इस नवरात्रि को होने जा रहा है।

मायावती के बेहद करीबी और पूर्व मंत्री राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज और उनके सबसे करीबी दो बार कौशाम्बी की चायल विधानसभा से चुने गए आसिफ जाफरी


 

और 250 बड़े नेता समाजवादी पार्टी की कमान संभालने को तैयार है  जिनमे कई पूर्व विधायक कई पूर्व उम्मीदवार साथ ही कई दिग्गज  बहुजन समाज पार्टी नेता शामिल

गौरतलब है कि बसपा प्रमुख ने इंद्रजीत को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निकाला था जबकि इंद्रजीत ने पार्टी नेता के ऊपर पैसे मांगे जाने का आरोप भी लगाया था जिसके बाद पूरे प्रदेश में इंद्रजीत के समर्थन में लोगो ने बसपा से इस्तीफा देना सुरु कर दिया था

इस नए समीकरण से सबसे बड़ा फर्क कौशाम्बी की लोकसभा सीट पर पड़ेगा और चूंकि इंद्रजीत अपने समाज के एकमात्र सबसे बड़े नेता है और जनप्रिय भी रहे है ।

ऐसे में उनके सपा में जाने के बाद समाजवादी पार्टी को लाभ होने तय है ।

और नुकसान बसपा से ज्यादा बीजेपी को होगा इसकी भी सम्भावना है।

अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के तमाम नेताओं को खासकर कौशाम्बी के नेताओ  कल लखनऊ बुलाकर  इंद्रजीत को पार्टी में लेने की बात और चर्चा की और सर्वसम्मति से इंद्रजीत को पार्टी में लेने का फैसला लिया गया जिसके बाद

21 को लखनऊ में अखिलेश के समक्ष होना है सपथ ग्रहण 

देखना यह है कि अखिलेश इंद्रजीत का इस्तेमाल सही तरह से कर पाते है कि नही

इंद्रजीत राज्यसभा या विधान परिषद जा सकते है ।

 

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