युवराज यादव, बलौदाबाजारimg_20171102_134135
अध्यात्मिक वातावरण के साथ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है गिरौदपुरी
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बलौदाबाजार ।  बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में प्राकृतिक पर्यटनों के अस्तित्व के साथ-साथ मानव निर्मित पर्यटन स्थल को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिरौदुपरी, दामाखेड़ा, पलारी स्थित सिद्धेश्वर धाम मंदिर, जारा स्थित सिद्धेश्वर धाम, तुरतुरिया, गातापार स्थित रणबौर देवी का मंदिर, सोनाखान, बारनवापारा अभ्यारण्य शामिल है। गिरौदपुरी संत गुरू घासीदास की जन्मस्थली के साथ तपोभूमि रही है। यहां अध्यात्मिक वातावरण के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी सुंदर मेल दिखने को मिलता है।
गिरौदपुरी-छत्तीसगढ़ को संत महात्माओं की जन्मस्थली कहा जाता है। यहां की शस्य-श्यामला पावन भूमि में अनेक संत महात्माओं का जन्म हुआ। इनमें 18 वीं शताब्दी के महान् संत सतनाम संप्रदाय के प्रणेता, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत संत गुरू घासीदास जी का बलौदाबाजार-भाटापारा जिला में महानदी के पावन तट पर स्थित पवित्र ग्राम गिरौदपुरी में माघ पूर्णिमा 18 दिसम्बर 1756 को जन्म हुआ था। उक्त स्थल सतनाम संप्रदाय के तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। गुरूघासीदास जी के जन्म स्थली गिरौदपुरी बिलासपुर से 80 कि.मी., शिवरीनारायण से मात्र 15 कि.मी.दूरी पर स्थित है। रायपुर से 135 कि.मी. बलौदा बाजार होते हुए ग्राम बरपाली सड़क मार्ग से सीधे जीप या बस द्वारा गिरौदपुरी पहुंचा जा सकता है। यहाॅ पहुंचने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा भी राजधानी से सेवाएॅ उपलब्ध करायी जाती है।
गिरौधपुरी में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कुतुबमीनार से भी ऊॅचा जैतखम्भ का निर्माण किया गया है। जिसका लोकार्पण मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह द्वारा 18 दिसंबर 2015 को आयोजित विश्व स्तरीय मेले के दौरान किया गया। उक्त मेला में भारत के कोने कोने के अलावा अन्य देशों के श्रद्धालु भाग लेते हंै। गिरौदपुरी में 243 फीट ऊॅचा एवं 60 मीटर व्यास का जैतखम्भ 54 करोड़ रूपये की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा गिरौदपुरी के छाता पहाड़, अमृत कुंड, चरण कुंड, पंचकुंडी, गुरूघासीदास गद्दी, तपस्थली, सुफरा मठ आदि दर्शनीय स्थल का भी सौन्दर्यीकरण किया गया है। गिरौदपुरी में प्रतिवर्ष विशाल मेला का आयोजन होने के अलावा बारह माह दर्शनार्थियों का आवागमन होता है। यह क्षेत्र पर्यावरण से परिपूर्ण एवं वनांचल से घिरा हुआ है, जिसके चलते यहाॅ की सुन्दरता देखती ही बनती है।

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