देश का सबसे पुराना राजनैतिक संगठन इन दिनों बहुत ही संकट के दौर से गुजर रहा है।
ऐसे में अंतिम दाव खेलना उसकी मजबूरी भी बन गया था
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता करने का मौका पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के पुत्र राहुल राजीव गांधी को मिलना लगभग तय हो गया है।
पार्टी के सर्वोच्च पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह वरिष्ठ नेता कमलनाथ,अशोक गहलोत,आनन्द शर्मा,गुलाम नबी आजाद,मोती लाल वोरा, सहित तमाम रिष्ठ नेताओं खासकर पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राहुल के विशेष शिपहसलाहकर मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में नामांकन किया
उनके विरोध में किसी और का नामांकन होने की उम्मीद कम है।
देश के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष पंडित प्रणव मुखर्जी से राहुल ने आशीर्वाद भी लिया
उसपर श्री मुखर्जी ने कहा कि मैं बंगाल का ब्राह्मण और राहुल कश्मीर के ब्राह्मण है।
प्रधानमंत्री ने राहुल की ताजपोशी पर व्यंग करते हुए कहा-कांग्रेस के बड़े नेता खुद मानते है कि यह पार्टी नही बल्कि कुनबा है।कांग्रेस का औरंगजेब राज उन्ही को मुबारक

भाजपा छोड़ कांग्रेस में आये मशहूर क्रिकेटर व पंजाब के कबीना मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने तो राहुल को बब्बर शेर बताया-सौ भेड़ो के आगे एक शेर लगाओ तो भेड़ें शेर हो जाती है,सौ शेरो के आगे एक भेड़ लगा दो तो शेर ढेर हो जाते है,यहां शेर नही बब्बर शेर है।

फिलहाल राहुल उत्तर प्रदेश की अमेठी से सांसद है वो लगातार तीसरी बार सांसद है वर्तमान केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी को उन्होंने चुनाव हराया था

राहुल के सामने तमाम चुनौतियां है जिनमे सबसे बड़ी कर्नाटक में अपनी सत्ता बचना,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान में अच्छे परिणाम देने।

राहुल के हिन्दू और ब्राह्मण होने पर प्रणव मुखर्जी के स्पष्ठ बयान के बाद एक अलग सन्देश गया है आज ही विपक्षी और तमाम लोगो राहुल की जाति और धर्म को लेकर तमाम मतभेद है।

राहुल

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