भारत की राजनीती में बड़ा भूचाल ।
लम्बे समय से चली आ रही उठापठक को लगभग विराम लग गया
मार्च में ही होने वाले द्विवर्षीय राज्यसभा चुनाव में संयुक्त प्रत्यासी बन सकती है मायावती । हलाकि उन्होंने अपने नाम  एलान अभी प्रई 10 राया है।ज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने है।
समाजवादी पार्टी के पास विधायक की संख्या के हिसाब से मात्र एक व्यक्ति को राज्यसभा भेज सकती है जिनमे किरमयी नन्दा का नाम सबसे ऊपर है।
और बांकी बचे 10 विधायकों के मत अगर बसपा के 19 मतों के साथ मिल जाते है तो केवल 7 के जादुई आंकड़े से दूर रह जायेगी।ऐसे में बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ठ कहा है कि अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उन्हें यहाँ समर्थन देती है तो वो मध्य प्रदेश में कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में समर्थन दे सकती है।
हालांकि उत्तर प्रदेश में भी बहुजन विधायको को विधान परिषद चुनाव में सपा उम्मीदवार को समर्थन करना होगा जिसके लिए दोनों दल तैयार है।
साथ ही बसपा ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए भाजपा को हराने वाले उम्मीदवार को उप चुनाव में समर्थन की बात कही हैं।

बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने मुँह घुमाकर की सही लेकिन हाथ मिलाने की तरफ की इसारा कर दिया है।

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