चैत्र नवरात्रों की अष्टमी पर शनिवार को शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारों में देवी दर्शन किए। जिला कांगड़ा के श्री चामुंडा नंदीकेश्वर धाम, श्री बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा, श्री ज्वालामुखी मंदिर और श्री बगलामुखी मंदिर में नवरात्रों के दौरान अष्टमी पर पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। शनिवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें शक्तिपीठों में लगना शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने माता के जयकारे और मां का गुणगान करते हुए देवी दर्शन किए। मंदिर प्रशासनों द्वारा अष्टमी पर्व के लिए मंदिरों में विशेष इंतजाम किए गए थे। अष्टम नवरात्र पर श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के महागौरी रूप की अराधना की। मां महागौरी की अराधना से असंभव कार्य संभव होते हैं तथा साधक को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। चैत्र नवरात्रों के दौरान रविवार को नवमी के शुभ अवसर पर मां सिद्धिदात्री स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री की अराधना से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त कर मोक्षफल प्राप्त करने में सफल होता है। श्री चामुंडा मंदिर, श्री बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा, श्री ज्वालामुखी मंदिर में नवरात्रों के दौरान आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों की रविवार को पूर्णाहुति डाली जाएगी।
पुलिस प्रशासन द्वारा आयोजित दुर्गा सप्तशती पाठ यज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्नimg_20180324_122650_hdr
पुलिस प्रशासन द्वारा पुलिस थाना धर्मशाला के प्रवेश द्वार पर स्थित हनुमान मंदिर में चैत्र नवरात्रों के अवसर पर रखे गए श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की शनिवार को पूर्णाहुति डाली गई। नवरात्रों के दौरान पंडित शिव कुमार मिश्रा श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। शनिवार को एसएचओ धर्मशाला सुनील राणा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर दुर्गा सप्तशती पाठ की समाप्ति पर अष्टमी पर्व पर आयोजित यज्ञ में पूर्णाहुति डाली। यज्ञ के मौके पर स्थानीय महिलाओं ने मंदिर में भजन कीर्तन भी किया। इस दौरान सुनील राणा व् उनकी पत्नी एक्साइज इंस्पेक्टर रोहनी राणा ने कन्या पूजन किया तथा इसके उपरांत खीर-चने का भंडारा लगाया गया। इस अवसर पर पुलिस विभाग के कर्मचारी भी उपस्थित थे। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्रों के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। अष्टमी व नवमी के दिन 3 से 9 वर्ष की कन्याओं के पूजन की परंपरा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार 3 से 9 वर्ष की कन्याएं माता का साक्षात रूप मानी जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार एक कन्या के पूजा से ऐश्वर्य, दो के पूजन से भोग और मोक्ष, तीन के पूजन से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छह कन्याओं के पूजन से छह प्रकार की सिद्धियां, सात कन्याओं के पूजन से राज्य, आठ कन्याओं की पूजा से संपदा और नौ कन्याओं की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्त होती है।

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